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11 दिसंबर 2017

क़ुरान का सन्देश

अलीफ़ लाम मीम (1) (ये) वह किताब है। जिस (के किताबे खु़दा होने) में कुछ भी शक नहीं (ये) परहेज़गारों की रहनुमा है (2)
जो ग़ैब पर ईमान लाते हैं और (पाबन्दी से) नमाज़ अदा करते हैं और जो कुछ हमने उनको दिया है उसमें से (राहे खु़दा में) ख़र्च करते हैं (3)
और जो कुछ तुम पर (ऐ रसूल) और तुम से पहले नाजि़ल किया गया है उस पर ईमान लाते हैं और वही आखि़रत का यक़ीन भी रखते हैं (4)
यही लोग अपने परवरदिगार की हिदायत पर (आमिल) हैं और यही लोग अपनी दिली मुरादें पाएँगे (5)
बेशक जिन लोगों ने कुफ्र इख़तेयार किया उनके लिए बराबर है (ऐ रसूल) चाहे तुम उन्हें डराओ या न डराओ वह ईमान न लाएँगे (6)
उनके दिलों पर और उनके कानों पर (नज़र करके) खु़दा ने तसदीक़ कर दी है (कि ये ईमान न लाएँगे) और उनकी आँखों पर परदा (पड़ा हुआ) है और उन्हीं के लिए (बहुत) बड़ा अज़ाब है (7)
और बाज़ लोग ऐसे भी हैं जो (ज़बान से तो) कहते हैं कि हम खु़दा पर और क़यामत पर ईमान लाए हालाँकि वह दिल से ईमान नहीं लाए (8)
खु़दा को और उन लोगों को जो ईमान लाए धोखा देते हैं हालाँकि वह अपने आपको धोखा देते हैं और कुछ शऊर नहीं रखते हैं (9)
उनके दिलों में मर्ज़ (मरज़) था ही अब खु़दा ने उनके मर्ज़ (मरज़) को और बढ़ा दिया और चूँकि वह लोग झूठ बोला करते थे इसलिए उन पर तकलीफ देह अज़ाब है (10)

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