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07 दिसंबर 2017

,राजस्थान वक़्फ़ बोर्ड के चेयरमेन अबूबकर नक़वी सहित दो महिला सदस्यों को अयोग्य क़रार देते हुए ,,उन्हें सदस्य के रूप में नियुक्ति देने के वर्ष 2016 की नियुक्ति अधिसूचना निरस्त कर दी

राजस्थान हाईकोर्ट ने नज़ीर हसन की याचिका की सुनवाई के बाद ,,राजस्थान वक़्फ़ बोर्ड के चेयरमेन अबूबकर नक़वी सहित दो महिला सदस्यों को अयोग्य क़रार देते हुए ,,उन्हें सदस्य के रूप में नियुक्ति देने के वर्ष 2016 की नियुक्ति अधिसूचना निरस्त कर दी है ,, अबूबकर नक़वी ने अंतरिम राहत के रूप में अग्रिम आदेश तक उन्हें चेयरमेन बनाये रखने की प्रार्थना की थी ,,उनका यह प्रार्थना पत्र भी आज हाईकोर्ट ने ख़ारिज कर दिया है ,,हाईकोर्ट ने वक़्फ़ विधि नियम प्रावधानों के तहत ,,नई अधिसूचना के माध्यम से नए सदस्यों की नियुक्ति की स्वतंत्र जांच के बाद नियुक्ति के आदेश राज्य सरकार को दिए है ,,नई नियुक्ति कार्यक्रम में सरकार विधि अनुसार नियुक्तियां देने के लिए स्वतंत्र होगी ,,,उक्त आदेश के बाद वक़्फ़ बोर्ड में हलचल का माहौल रहा ,,वक़्फ़ बोर्ड से जुड़े पूर्व के सभी फैसले भी इस आदेश से प्रभावित होंगे ,,वक़्फ़ बोर्ड चेयरमेन ऍन केन प्रकारेण अभी भी इस पद पर बने रहने के प्रयासों में जुटे है ,वोह सम्भवत इस फैसले के खिलाफ डबल बेंच में भाग्य आज़माना चाहते है ,,,राजस्थान सरकार ने इस अवैध नियुक्ति के आदेश के बाद ,,नए योग्य सदस्यों की तलाश शुरू कर दी है ,,,लोगो का मानना है के गलत जानकारियां देकर ,सरकार को गुमराह कर वक़्फ़ बोर्ड चेयरमेन ने जो आदेश प्राप्त कर सरकारी सुविधाएं ,,मंत्री दर्जा ,,मकान किराया ,,यात्रा भत्ते ,,पेट्रोल डीज़ल का खर्च ,,वेतन वगेरा प्राप्त किया है उसकी गणना कर ,,उक्त लाखों रूपये की राशि इनसे व्यक्तिगत रूप से वसूली जाना चाहिए ,,,राजस्थान वक़्फ़ बिगड़े निज़ाम से नाराज़ लोगो में इस आदेश के बाद खुशी की लहर दौड़ गयी है ,दो दिन से विचाराधीन अंतरिम राहत के प्रार्थना पत्र के ख़ारिज होने के बाद ,अबूबकर नक़वी और उनके समर्थको में मायूसी का माहौल बना हुआ है ,,जबकि वक़्फ़ बोर्ड सदस्यों नियुक्तियों को लेकर भाजपा समर्थित योग्यता पूर्ण रखने वाले कार्यकर्ताओ ने इस नियुक्ति के लिए अपने अपने नेताओ से सम्पर्क शुरू कर दिया है ,,राजस्थान के इतिहास में एक साल के कार्यकाल में सर्वाधिक अपमान सरकार को वक़्फ़ बोर्ड चेयरमेंन की नियुक्ति के बाद ,,,उनके नौसिखिये मनमाने फेसलो के कारण होना पढ़ा है ,,सरकार ने अलवर कमेटी मामले में एक टेप लीक होने के बाद नक़वी के खिलाफ टेढ़ी नज़र की थी लेकिन सियासी मैनेजमेंट के बाद उन्हें अभयदान मिल गया था ,,अब राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा उनकी नियुक्ति की अधिसूचना अयोग्य होने से निरस्त करने के बाद ,,सरकार का रुख उन्हें दुबारा नियुक्त करने को लेकर सख्त हो सकता है और सरकार भी इस पद पर अब किसी निर्विवाद परिपक्व अनुभवी व्यक्ति को बिठाने का मन बना चुकी है ,,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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