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30 नवंबर 2017

क़ुरान का सन्देश

(इन बातों को समझें ख़ाक नहीं) बल्कि जो अगले लोग कहते आए वैसी ही बात ये भी कहने लगे (81)
कि जब हम मर जाएँगें और (मरकर) मिट्टी (का ढ़ेर) और हड्डियाँ हो जाएँगें तो क्या हम फिर दोबारा (क्रबों से जि़न्दा करके) निकाले जाएँगे (82) इसका वायदा तो हमसे और हमसे पहले हमारे बाप दादाओं से भी (बार हा) किया जा चुका है ये तो बस सिर्फ़ अगले लोगों के ढकोसले हैं (83)
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि भला अगर तुम लोग कुछ जानते हो (तो बताओ) ये ज़मीन और जो लोग इसमें हैं किस के हैं वह फ़ौरन जवाब देगें ख़ुदा के (84)
तुम कह दो कि तो क्या तुम अब भी ग़ौर न करोगे (85)
(ऐ रसूल) तुम उनसे पूछो तो कि सातों आसमानों का मालिक और (इतने) बड़े अर्श का मालिक कौन है तो फ़ौरन जवाब देगें कि (सब कुछ) खु़दा ही का है (86)
अब तुम कहो तो क्या तुम अब भी (उससे) नहीं डरोगे (87)
(ऐ रसूल) तुम उनसे पूछो कि भला अगर तुम कुछ जानते हो (तो बताओ) कि वह कौन शख़्स है- जिसके एख़्तेयार में हर चीज़ की बादशाहत है वह (जिसे चाहता है) पनाह देता है और उस (के अज़ाब) से पनाह नहीं दी जा सकती (88)
तो ये लोग फ़ौरन बोल उठेंगे कि (सब एख़्तेयार) ख़ुदा ही को है- अब तुम कह दो कि तुम पर जादू कहाँ किया जाता है (89)
बात ये है कि हमने उनके पास हक़ बात पहुँचा दी और ये लोग यक़ीनन झूठे हैं (90)

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