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06 नवंबर 2017

विधिक चेतना,,विधिक साक्षरता के नाम पर जब,,,,,

विधिक सप्ताह का कोई अतिरिक्त बजट नहीं हुआ करता था ,,विधिक चेतना,,विधिक साक्षरता के नाम पर जब ओरिजनल शिविर लगाए जाते थे ,,तब कोटा में ऐतिहासिक ,,,विधिक चेतना रैली ,,ब्रह्ममांनद शर्मा एडवोकेट की अध्यक्षता में निकाली गयी थी ,,एडवोकेट ब्रह्ममांनद शर्मा अध्यक्ष और भाई रघु गौतम महासचिव थे ,,तब जिला जज ,,न्यायिक अधिकारियो और वकीलों के समन्वय से ,,समाज सेवी संस्थाओ को बुलाकर ,,कोटा में अब तक की सबसे बढ़ी विधिक चेतना रैली ,,कोटा सड़को पर ,,विधिक जागरूकता कार्यक्रम के लिए निकाली गयी थी ,,,यह ऐतिहासिक रैली राजस्थान के सभी ज़िलों में अव्वल थी ,,लेकिन आज ऐसा नहीं होता ,,ज़रा हम सोचे ,,,,कई दशक गुज़र जाने के बाद भी विधिक सेवा ,,विधिक सहायता ,,के लिए आम जनता जागरूक क्यों नहीं है ,,ज़रा सोचे इतना बढ़ा भवन ,,इतना स्टाफ ,,अतिरिक्त अधिकारी ,अतिरिक्त कर्मचारी ,, अतिरिक्त बजट ,,फिर भी एक भी सिविल दावा ,आज तक विधिक सेवा समिति से सहायता प्राप्त कर क्यों पेश नहीं हो सका ,,घरेलु हिंसा से संबंधित एक भी कार्यवाही ,,विधिक सेवा समिति के मदद से क्यों नहीं हो सकी ,,,घरेलु हिंसा का एक भी परिवाद प्रोटेक्शन ऑफीसर द्वारा उसकी तरफ से घटना की तस्दीक़ कर पेश क्यों नहीं हुआ ,,बात साफ है ,सिर्फ रस्म निभाई जा रही है ,,लोगो को फायदा मिले इसके लिए कोई दिलचस्पी नहीं है ,,निराधार लोग व्यवस्था से जुड़ गए ,,अदालतों में विधिक सहायता के पेनल मात्र बना दिए गए ,,,विधिक साक्षरता हो ,,लोगो में सरकारी स्तर पर विधिक सहायता प्राप्त करने का विशवास पैदा हो ऐसा नहीं हो सका है ,,ताल्लुका ,,जिला ,क़स्बा ,,संभाग ,प्रदेश और राष्ट्रिय स्तर पर समितियां है ,,बढे बढे न्यायिक अधिकारी ,वरिष्ठ वकील इस व्यवस्था में जुटे फिर इस व्यवस्था ,,इस सहायता का लाभ गलियों में ,,बस्तियों ,,गरीबो में ,पीड़ितों में क्यों नहीं पहुंच पा रहा है ,,यह एक प्रश्न है जिसपर हमे सभी को गौर करना होगा ,,,विधिक सहायता कार्यक्रम में नौकरी करने वाले वकीलों की भागीदारी जिन्हे काम का पारिश्रमिक मिलता है उनसे उम्मीद करना ठीक नहीं है ,,अगर सही मायने में विधिक सहायता ,विधिक जागरूकता ,,विधिक साक्षरता कार्यक्रम चलाना है तो हर शहर में पहले तो ,,समाजसेवा क्षेत्र से सरोकार रखने वाले ज़िम्मेदार वकील साथियों को इसमें पेनल बनाकर जोड़ना होगा ,,हर कार्यक्रम के आयोजन के पहले ,,वकील साथियों और ज़िले के समाजसेवक ,,जनप्रतिनिधियो के साथ पूर्व बैठके आयोजित कर अपना मक़सद बताना होगा ,,आम जनता तक ,,आम लोगो तक ,,पीड़ितों तक विधिक सहायता का लाभ पहुंचाना है तो कलेक्टर को ,जिला जज को ,खुद हायकोर्ट की विधिक सहायता समिति ,,प्राधिकरण और विधि विभाग को इस मामले में अभिभाषक परिषदों ,,बार कौंसिल को भरोसे में लेना होगा ,,और अभिभाषक परिषद ,,बारकोंसिल के आलावा भी जो वकील गुटबाज़ी के कारण इस कार्यक्षेत्र में सक्रिय होने पर भी ,,अभिभाषक परिषदों की तरफ से उनके नाम नहीं जाने पर वंचित रह जाते है उन्हें खुद विधिक सहायता ,,विधिक साक्षरता समिति तलाश कर अपने साथ जोड़े ,,देखते है इस कार्यक्रम में ,, इस विधिक साक्षरता ,,विधिक चेतना ,,विधिक सप्ताह कार्यक्रमों में क्या कुछ नया होता है ,,,वरना रस्म अदायगी तो कई सालो से हम देखते आ रहे है ,,सिर्फ बजट आना ,,कुछ वकीलों को बजट का हिस्सा पेनल में लेकर पहुंचाना ,,,उनसे काम लेना ,,,डायरियां भरना ,,विधिक कार्यक्रमों की फहरिस्त बनाना ,,कोटा दशहरा मेले में हर साल विधिक शिविर केम्प का टेंट नियमित लगाना तो सभी देख रहे है ,,,ऐसा नहीं है इस क्षेत्र में सभी जगह ऐसा हो ,,कोटा सहित कई जगह पर बेहतर कार्यक्रम भी हुए है ,,लेकिन ऐसे कार्यक्रम वकीलों और जनप्रतिनिधियों को जोड़े बगैर कामयाब किया जाना कल्पना करना भी बेकार है ,,आम जन कैसे जुड़े ,आम जनता को कैसे फायदा पहुंचे ,कैसे हर शख्स सामान्य अनुक्रम में विधिक रूप से साक्षर हो ,,विधिक क्षेत्र में जागरूक हो ,और कैसे सुपात्र गरीब ,,बुज़ुर्ग ,ज़रूरत मंद ,पीड़ित ,बलात्कार की शिकार असहाय महिला ,,घरेलु हिंसा से पीड़ित पीड़ित असहाय महिला को उसका ज़्यादा से ज़्यादा लाभ पहुंचे ,,इसके लिए विधिक साक्षरता कार्यकम ,,विधिक सेवासमिति कार्यक्रमों को जनभागीदारी से जोड़कर ,,इसमें शऊर रखने वाले वकील साथियों को जोड़ कर आगे बढ़ाना होगा ,तब कहीं यह कार्यक्रम ,, सरकार और वरिष्ठ अधिकारियो की मंशा के अनुरूप कामयाब हो सकेगा ,,,, हम सब तो इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए तैयार और तत्पर है बस बस हमे तो एक बेहतर प्रबंधन ,,निष्पक्ष ,,निर्भीक व्यवस्था चाहिए ,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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