तुमने लंकेश को मारा ,,तुमने गाँधी को मारा ,,,एक जवाब जो मेने डिलीट कर
दिया ,, हाँ ऐसे ही मारेंगे ,,ऐसे लोगो को ऐसे ही मारेंगे ,,तुम्हे भी
मारेंगे ,,,तुम्हे भी मारेंगे ,,अप्रत्याशित था ,,लेकिन संभावित भी था
,दिलो में ज़हर जो घुला था ,,दिमागों में नफरत जो भरी थी ,,,खेर मुझ से भी
मेरे एक मित्र ने कह दिया तुम लिखते हो तुम्हे भी मरना होगा ,,भाई ,,गीता
हो ,,क़ुरान हो ,,एक ही संदेश है ,,मृत्यु का मज़ा सभी को चखना है ,,कुल्लो
नफ़्सूं ज़ायकातुल मोत ,,मौत का मज़ा हर शख्स को चखना है ,,तुम मुझे
,,मेरे जैसे कई लोगो को मार तो दोगे ,क्योंकि तुम हत्या करने में पारंगत
हो ,,लेकिन विचारधारा कैसे मारोगे ,,तिरंगा ,,एक ध्वज नहीं एक विचारधारा है
,,संविधान ,,देश का क़ानून एक किताब नहीं ,,देश में सामाजिक व्यवस्था है
,,,देश को जानवरो से अलग कर इंसानो को जीने का हक़ देता है ,,तुम धमकाओ
,,चाहे मेरी हत्या करो ,,लेकिन मेरे भाइयों में ऐसा ही हूँ ,,डरूंगा तो
नहीं दबूंगा भी नहीं ,,मोत से पहले मरूंगा भी नहीं ,,मरने के पहले तक
तुम्हे राष्ट्रिय विचारधारा से कैसे जोडू ऐसा करने से चुकूँगा भी नहीं
,,तुम हत्या की धमकी दे सकते हो ,,लेकिन हो तो मेरे अपने भाई ,मुझे
तुम्हारा इन्तिज़ार है ,मेरे भाइयो ,अख्तर

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