क्या हो रहा है लोगो को ,,लोगो के संस्कार को ,,क्यों वोह फ्रस्ट्रेशन में
है ,,क्या उन्हें अपनी परेशानियों से छुटकारे का रास्ता ,,अल्लाह ,,ईश्वर
,,खुदा में नज़र नहीं आता है ,,क्या उनकी आस्थाये कम हो गयी है ,,,सरकार या
आसपास के हालातो से कुछ भी स्थिति बने मुक़ाबला तो करना चाहिए जीना चाहिए
,,यूँ हार कर ज़िंदगी को खत्म करना ,,अपराध है ईश्वरीय अपराध है ,,,फिर पुरे
के पुरे के परिवार ऐसे सामूहिक आत्महत्या ,,हत्या के दौर में है के समाज
स्तब्ध सा हो रहा है ,,,सरकारों ,,सरकार में बैठे ,,महिला बाल विकास
,,समाजकल्याण विभाग को इस मामले में कोई मुहीम कोई कार्यक्रम चलाना होगा
,,अखबारों ,,न्यूज़ चैनलों ,,सोशल मिडिया एक्टिविस्टों ,,,समाज सुधारको ,,जो
संगठन खुद को राष्ट्रवादी कहते है उन्हें एक सर्वेक्षण कर समाज को इस
बेहूदा आत्महत्या कार्यक्रम से बचाना होगा ,,अभी पिछले दिनों ,,एक कलेक्टर
ने विडिओ बनाकर पुरे चौबीस घंटे बाद आत्महत्या की ,,न माँ ,,बाप ,,पत्नी
,बच्चो के बारे में कुछ नहीं सोचा गया ,,कई फेसबुक पर लिखते है और मर जाते
है ,,देश की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी जिस सी आर पी एफ जवान के हाथ में थी
,,उस उदयपुर के सी आर पी एफ जवान मंजीत ने पहले पत्नी को गोली मारी फिर खुद
गोली मारकर आत्महत्या कर ली ,,चूरू सादुलपुर शहर में एक विवाहिता सुनीता
अपने दो बच्चो को केरोसीन छिड़क कर जलाती है ,,फिर खुद आत्महत्या कर लेती
है ,,पति जोगेंद्र से देखा नहीं जाता और वोह खुद कुंड में कूदकर आत्महत्या
कर लेता है ,,छात्र के नंबर कम आये बस आत्महत्या कर लो ,,बेरोज़गारो को
नौकरी नहीं मिली बस आत्महत्या कर लो ,,प्यार में धोखा हुआ कोई समाधान नहीं
खोजा ,,,बस आत्महत्या कर ली ,,,,यह तमाशे ,यह हिम्मत हार आत्महत्याओं के
दौर देश के इस समाज को कैसे निकाले ,,इसके लिए हमे ,,आपको ,,अमीरी ,,गरीबी
,,ऊंच ,,नीच ,,जाति ,,समाज ,,धर्म मज़हब ,,सियासी पार्टियों के मतभेद भुलाकर
एक मंच पर आकर कोई कार्ययोजना तैयार करना होगी ,,कुछ सरकार ,,सरकार के
समाजकल्याण अधिकारी ,,महिला बालविकास अधिकारी ,,साइक्रेटिक्स ,,पत्रकार
,,समाजसेवक ,,धार्मिक गुरु ,,,,मौलवी ,,क़ाज़ी ,,साधु ,,संत ,,शकराचार्यो
,,समाजसेवी संस्थाओ ,,सहित सभी अधिकारी कर्मचारी संगठनों को इस मामले में
संयुक्त मोटिवेशन कार्यक्रम आयोजित करना होंगे ,,लोगो को समझाना होगा
,,मरना किसी समस्या का समाधान नहीं ,,,जीना ,,संघर्ष करना ,,अपने अंदर की
हार को हराना ही इस समस्या का समाधान है ,,अगर हम अभी भी नहीं चेते
,,हिन्दू ,,मुस्लिम ,,कांग्रेस ,,,भाजपा ,,नेकर ,पेन्ट ,टोपी ,,कहकर एक
दूसरे को कोसते रहे ,,तो जनाब रोज़ अखबारों में इस तरह की दिल दहला देने
वाले खबरे मुख पृष्ठ पर होंगी ,,और हमारे देश के समाज ,,हमारे देश के ,युवा
,हमारे देश के बेरोज़गार ,,,थोड़ी सी समस्या से फ्रस्ट्रेट लोग
,,मनोवैज्ञानिक रूप से इसे ही प्रमुख समाधान समझने लगेंगे और रोज़ हमे दिल
दहला देने वाली इन खबरों से दो चार होना पढ़ेगा ,,सो प्लीज़ कोटा में मंच की
शुरुआत है ,,हालांकि बहुत सफल नहीं लेकिन फिर फिर भी मोटिवेशन तो है ,,सभी
लोग मिलकर सरकारी सर्वेक्षण ,,मदद से ऐसे कार्यक्रम बनाये ,,मरना समस्या का
समाधान नहीं ,,अपने अंदर के बुरे विचार को मारना ,,हार कर भी फिर से जीतने
की तमन्ना रखकर संघर्ष करना हमारा सिद्धांत है ,,ऐसा अगर हम कर सकेंगे तो
इस समाज पर अहसान होगा ,,बेवजह यूँ ही मर जाने वालो को सच्ची श्रद्धांजलि
होगी ,,,,,,,क्या कर सकोगे ऐसा ,,क्या आओगे इस काम में मेरे साथ मेरे विचार
,मेरी कोशिश को कामयाब बनाने ,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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