साज़िशे हारती है ,,नेकियां जीतती है ,,हुकूमत के गुलाम भी गलत हो अगर ,,तो
भी इन्साफ की लड़ाई में सच अकेला होने पर भी जीत जाता है ,,जी हाँ दोस्तों
टोंक जिला वक़्फ़ कमेटी के सदर ,,मोहम्मद अहमद खान भय्यू को ,,ग़ैरक़ानूनी
तरीके से हटाने के सरकारी वक़्फ़ के आदेशों की आज हाईकोर्ट में धज्जियां उड़
गयी ,,,,हाईकोर्ट ने बिना बोर्ड की अनुमति के दबाव में सिर्फ
मुख्यकार्यकारी अधिकारी के आदेश से टोंक वक़्फ़ कमेटी में कथित रूप से
प्रशासक लगाने के आदेश खारिज कर दिए है ,,,मोहम्मद अहमद भय्यू जिन्होंने टोंक
ज़िलावक़्फ़ कमेटी के सदर के नाते ऐतिहासिक रचनात्मक काम किये ,,,वक़्फ़ बोर्ड
चेयरमेन अबूबकर नक़वी के इशारों पर नहीं चले ,उनकी वक़्फ़ की बकायेदारी की
रसीदे नहीं बनाई तो नाराज़ होकर ,,बिना वक़्फ़ बोर्ड के किसी फैसले के
,,उन्होने अपने अधिकारों का दुरूपयोग कर टोंक में प्रशासक लगा दिया था
,,जिसके खिलाफ वक़्फ़ ट्रिब्यूनल ने याचिका खारिज कर दी ,,थी ,मोहम्मद अहमद
भय्यू ने इस वक़्फ़ ट्रिब्यूनल आदेश के खिलाफ जस्टिस मुनीश्वरनाथ भंडारी की
बेंच में अपील पेश की थी ,,आज इस याचिका की सुनवाई के बाद ,टोंक वक़्फ़
कमेटी सहित राज्य की सभी कमेटियों को समय पूरा होने के नाम पर जहाँ
ग़ैरक़ानूनी तरीके से कमेटी बनाये बगैर प्रशासक लगा दिए गए थे ,,वोह सभी आदेश
निरस्त कर दिए है ,,हाईकोर्ट ने पंद्रह दिनों के भीतर वक़्फ़ बोर्ड के विधि
नियमों के तहत नयी कमेटियो के गठन के निर्देश भी दिए है ,,टोंक जिला वक़्फ़
कमेटी की इस जंग में जीत के बाद सबित हो गया है ,,ईमानदारी ,,और सच्चाई कभी
भी किसी फरेब ,,किसी षड्यंत्र ,किसी सरकारी साज़िश ,,सियासी बेईमानी से
हारती नहीं जीतती ज़रूर है ,,इस जीत के बाद सभी ने भय्यू भाई को मुबारकबाद
दी है ,,ध्यान रहे राजस्थान वक़्फ़ बोर्ड पूर्व में नवम्बर 2016 की बैठक में
कोटा ,,टोंक सहित सभी कमेटियों के गठन का फैसला ले चुका था ,,लेकिन वक़्फ़
बोर्ड ने न जाने किसके दबाव ,,न जाने किस लालच में यह कमेटियों का आदेश
नहीं निकाला और चोर दरवाज़े से प्रशासक लगा दिए ,,,,,,अख्तर खान अकेला कोटा
राजस्थान

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