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25 जुलाई 2017

एक हफ्ते से राजस्थान की सभी अदलाते ठप्प ,,,,हड़ताल के नाम से हाईकोर्ट के परिपत्र से ख़ौफ़ज़दा वकीलों को लेना होगा सबक़ ,

एक हफ्ते से राजस्थान की सभी अदलाते ठप्प ,,,,हड़ताल के नाम से हाईकोर्ट के परिपत्र से ख़ौफ़ज़दा वकीलों को लेना होगा सबक़ ,,वकील हड़ताल करे तो कंटेम्प्ट ,,रोज़ आंकड़े देना होंगे ,,वकील की मोत हो जाए ,,शोकसभा हो ,अंतिमसंस्कार हो तो अदालते कहें हम नहीं मानते ,,कार्यस्थगन के पत्र को ,,वकील सर झुका कर हो जाता है ऐसे मामलों में नतमस्तक ,,,अपने हक़ की वाजिब लड़ाई सीखे वकील इन अदालत के जांबाज़ न्यायिक कर्मचारियों से ,,,,ज़ीरो काम भी नहीं ,,अदालतों में ताले बंद ,,,किसी की ज़मानत नहीं ,,,कोई आवश्यक कार्यवाही भी नहीं ,,दगाबाज़ जयचंद स्वभाव वाले हड़ताल में काम कर वकीलों की हड़ताल को नुकसान पहुंचाने वाले गद्दार वकीलों की तरह एक भी न्यायिक अधिकारी नहीं ,,,वकील ज़रा चिंतन करे ,ज़रा सोचे ,,,सम्मान ,,अपनी वाजिब मांग ही सबसे बढ़ी है ,,रुपया ,,चमचागिरी ,,डर ,,खौफ ,,चापलूसी ,की वकील नेतृत्व में कोई अहमियत नहीं होना चाहिए ,,,,,निष्पक्ष ,,निर्भीक ,,नेतृत्व हो ,,खासकर वकीलों के अंतिम संस्कार के जब उनके शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया हो ,,जब अदालत में वकीलों की शोक सभा हो ,,या फिर वकील के मान सम्मान ,,प्रतिष्ठा का प्रश्न हो तो कमसे कम कार्यस्थगन में हर हाल में ऐसा ही नेतृत्व ,,ऐसी ही हड़ताल , ऐसे ही ज़ीरो काम का उदाहरण पेश करे ,,ज़रा खुद के ज़मीर को टटोले ,क्या हम ऐसा कर सकते है ,क्या हम ऐसा कर सकेंगे ,,,,वकील कुछ कहे तो कंटेम्प्ट ,,,कंटेम्प्ट हो जाये तो वकील से माफ़ी मंगवाई जाए ,,वकील को भविष्य के लिए पाबंद करते हुए ,,लक्ष्मण रेखा में रहने ,,यानि अपनी हदो में रहने की चेतावनी के साथ अपमानकारी आदेश से उसके विरुद्ध कार्यवाही स्थगित की जाए ,,अब नारेबाजियों में ,,अब कार्यस्थगन में ,,अब ज़ीरो काम में ,,अब हायकोर्ट के हर हाल में कार्य होना ही चाहिए के निर्देशों में ,,न्यायालय की अवमानना की कार्यवाही नहीं है ,क्योंकि न्यायिक कर्मचारियों की यूनियन में जयचंद नहीं है ,,गद्दार नहीं है ,,,,,,न्यायिक कर्मचारियों के साथ अन्याय हुआ है उन्हें 2003 में सेठी आयोग का जो हक़ मिल जाना चाहिए था वोह अब तक क्यों नहीं ,,अदालतों के ज़रिये आदेश देकर ,,अदालत सरकारों को इंसाफ देने के लिए पाबंद करती है ,,इस मामले में न्यायिक कर्मचारियों ने अब तक हाईकोर्ट के ज़रिये रिट लगाकर सरकार का पक्ष लेकर उचित न्यायिक आदेश क्यों जारी नहीं करवाया ,,,यह सब सवाल है जो कहीं न कहीं इस अनावश्यक हड़ताल के कारण है ,,,,देखते है कब तक ,,यह सरकार ,,,जिसकी मुख्यमंत्री खुद वित्तमंत्री है ,,यह हायकोर्ट के न्यायिक कर्मचारी जो दुसरो को न्याय दिलवाने में सहायक बनते है ,,इन्हें इंसाफ कब देती है ,,कितना इन्साफ देती है ,हर बार की तरह इन न्यायिक कर्मचारियों को लॉलीपॉप ,,आश्वासन सिर्फ आश्वासन मिलता है या फिर इन्हे सच में ईमानदारी से जो इनका हक़ है ,,वोह सब कुछः इन्हे दे दिया जाता ,है ,अखबारों ,मीडिया को अब जेल भरी हुई नज़र नहीं आ रही ,,दूर दराज़ से आने वाले ,गवाह पक्षकारो का दर्द नज़र नहीं आ रहा ,वोह तो जब वकीलों की हड़ताल होती है ,तब हड़ताल को बदनाम करने ,,उसे डेमेज करने के लिए ,,फीलगुड सिस्टम के तहत ,अख़बार मीडिया में योजनाबद्ध तरीके से ऐसी खबरे कृत्रिम रूप से प्रसारित ,,प्रकाशित करवाई जाती है ,वरना खबरों में ईमानदारी होती तो रोज़ कितने गवाह वापस गए ,,कितने पक्षकारो को इंसाफ नहीं मिला ,,हायकोर्ट को भेजने वाले रोज़ मर्रा के दैनिक कार्यो की रिपोर्ट कार्ड में न्यायिक अधिकारियो ने क्या आँकड़े भेजे ,,इस पर खबरें होना चाहिए थी ,,लेकिन वकीलों को डेमेज करने वाले यह मिडिया साहिब इस तरफ क्यों ध्यान देंगे वर्तमान हालातो में ,,किसी कोई तकलीफ है भी या नहीं ,,इन्हे नज़र कहाँ आती है ,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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