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04 जून 2017

कहते है जिसका कोई नहीं होता ,,,उसका,,, खुदा यानी ईश्वर ,, होता है

कहते है जिसका कोई नहीं होता ,,,उसका,,, खुदा यानी ईश्वर ,, होता है ,,,यारो ,,,यहां में ,,,बात कर रहा हूँ ,,,इंसान के रूप में ,,शिक्षकों के संकटों के वक़्त ,,,,संकट मोचक बने ,,ईश्वर सिंह की,,, जो शिक्षक नेता के रूप में,,,,, एक समाज सेवा की हैसियत से ,,,अपनी पहचान रखते है और पिछले कई सालों से शिक्षकों की समस्या के समाधान के लिए संघर्ष से जुड़े है ,,ग्राम मोठपुर तहसील अटरू में एक पुलिस अधिकारी के घर में जन्मे ईश्वर सिंह ने इंग्लिश में एम ऐ किया,, फिर बी ऐड की परीक्षा उत्तीर्ण की ,,वोह छात्र जीवन से ही छात्रों की समस्या समाधान मामलों को लेकर संघर्ष से जुड़े थे ,,,उन्होंने ने स्काउट प्रशिक्षण में राष्ट्रीयता और खुद को हवंन कर मज़लूमों ,,पीड़ितों की समस्या के लिए निर्भीकता निडरता से संघर्ष करना सीखा ,,वर्तमान में वोह बूंदी ज़िले के तालेड़ा क़स्बे के देलुन्दा गांव के सीनियर स्कूल के प्रिंसिपल है ,,वोह राजस्थान शिक्षक संघ शेखावत गुट के संरक्षक ,,अखिल राजस्थान संयुक्त कर्मचारी महासंघ के संभागीय संयोजक है ,,कोटा बारां कर्मचारी शिक्षा सहकारी सभा 696 मंत्री है ,,ईश्वर सिंह कोटा शिक्षकसंघ के कई महत्वपूर्ण पदों पर भी रहे है ,,अपने छात्र जीवन से शिक्षक नेता के कार्यकाल में ईश्वर सिंह ने कई संघर्ष किये ,,कई उतार चढ़ाव देखे ,,,कई लोगो की नाराज़गी का शिकार हुए ,,लेकिन इनकी हिम्मत ,,इनकी ताक़त ,,इनके नेतृत्व के आगे विरोधियों को हर बार झुकना पढ़ा ,,यही वजह है के आज शिक्षकों में इनकी अपनी साख है ,,इनका अपना सम्मान है ,,अपने शैक्षणिक कार्यः को पूरी ज़िम्मेदारी से निभाने के बाद बकाया वक़्त में यह अपने सेवा और संघर्ष कार्यों से जुड़ते है ,,यही वजह रही है के इनके स्कूल के वर्तमान परीक्षा परिणाम ऐतिहासिक रूप से सफल रहे है ,शत प्रतिशत बच्चे पास हुए है और यह इस सफलतम परिणाम से गद गद है ,,,स्कूल का प्रशासन ,,साफ सफाई व्यवस्था सभी स्कूलों से बेहतर है ,,, ईश्वर सिंह ने 1986से1988 के बीच गैरसरकारी शैक्षिक संस्था अधिनियम को लेकर प्राइवेट स्कूलों के शिक्षको को नियमानुसार वेतनमान सुविधाओं अवकाश आदि के लिए कोटा में जबरदस्त आंदोलन भी किया,,,,संचालको पर तगड़ा दबाव भी बना ,,,लेकिन सरकारी दमन के कारण ,,,यह आंदोलन आगे नही बढ़ सका,,,,इनकी नोकरी लग गयी और ये सरकारी शिक्षको के संघर्ष मे आ गए,,, ईश्वर सिंह के सहकारिता शैक्षणिक कार्यकाल में ,,,सहकारी सदस्यो की ऋण सीमा ,,सवा लाख से बढ़ाकर,,,3लाख70 हजार तक करना,,,, ब्याज दर,,,12फीसदी से,,,9 फीसदी करना, पेनलिटी ब्याज समाप्त करना, लगातार हर साल ,,आम सभाये कराना, लाभांश,,,4प्रतिशत से बढ़ाकर ,,,6प्रतिशत तक बांटना, शिक्षको की ब्लॉक स्तर पर जनसुनवाई शुरू करना,,, ऐसे कार्य है जो इनकी उपलब्धिया कही जा सकती है,,,संस्था के जनहित कोष से ,,,विद्यालयों की खेलकूद प्रतियोगिता में सहयोग,,,, प्रवेश उत्सव नामांकन बढ़ाने में सहयोग के अलावा,,,90 से अधिक विद्यालयों में ,,,ठंडा पानी मिले इस के लिए वाटर कूलर लगाए है,,मल्टीपर्पस गुमानपुरा स्कूल को अतिक्रमण से बचाने के लिए ,,, मुख्य द्वार लगवाया गया ,,,अनेक जनहित कार्य योजना में शामिल किए है,,अभी कार्यकाल समाप्त होने को है इसलिए चुनाव की तैयारी में जुटे है,,,,राज्य सरकार चुनाव ना कराके प्रशासक लगाने के प्रयास में है ,,लेकिन इन्होंने,, नए चुनाव तक स्टे ले लिया है,,इनके कार्यकाल में ,,, सहकारिता की जनहितकारी योजनाओं के तहत,,,,40 लाख रूपये से अधिक के विकास कार्य कराए जा चुके है ,ईश्वर सिंह विद्यार्थी जीवन मे राजकीय महाविद्यालय कोटा में रोवर स्काउटिंग का संचालन करते हुए अनेक राष्ट्रीय व प्रान्त स्तरीय कैम्प्स में छात्रों का नेतृत्व बने और समाज सेवा व साम्प्रदायिक सदभावना के लिए ,,सर्वोच्च पुरुष्कार,,,1985 में महामहिम राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह जी से प्राप्त किया,, बाद में बी ऐड व् एल एल बी की पढ़ाई करते समय,, कॉलेज में एस एफ आई छात्र संघठन से,, जुड़े शिक्षा व रोजगार की मांग को लेकर,,, आंदोलन से जुड़ेरहे ,,कोटा में,,,1989,,में हुए हाडौती विश्वविद्यालय आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाते हुए ईश्वर सिंह अनेक बार जेल भी गए,, ईश्वर सिंह शिक्षक की नोकरी लगते ही ,,,कोटा में राजस्थान शिक्षक संघ शेखावत से जुड़े,,उस समय कोटा ने ,,,इस धर्मनिर्पेक्स व समाजवादी ,,विचारधारा के संघ के समर्थक ,,,नाम मात्र के थे,, धीरे धीरे निरंतर संघर्ष व शिक्षको की सेवा के दम पर,,,, शिक्षक समुदाय मे ,,,अपनी पहचान बनाकर ,,,आज हाडौती में इस संघठन का दबदबा कायम करने में ,,,,सफलता प्राप्त की,,,,शिक्षको व कर्मचारियों के हकों पर ,,,,संघर्ष से घबराकर,,, इनके10से15 बार ,,,दूर दराज तबादले कर,, इनकी आवाज़ को दबाने की,,, राज्य सरकार की कोशिश ,,,कभी कामयाब नही हुयी,,,,1989 से 2016 तक जो भी शिक्षको व कर्मचारियों के आंदोलन हुए,,,, इनकी भूमिका अगुवा की रही,,,हड़ताल2000 में जेल में भी रहे,,,इसी बीच,,, शिक्षा सहकारी के चुनाव में,,अगस्त2000,,में सर्वाधिक 1890 वोट लेकर,, मंत्री बने,,, बाद में,,,2006 के चुनाव मे ,,,इन्हें सर्वाधिक2980 वोट मिले व पैनल के,,11में से 7 सदस्य जीतकर बहुमत हांसिल किया ,,, जबकि तत्कालीन ,,,भाजपा सरकार ने इन्हें हराने में पूरी ताकत झोंक दी थी,,,पिछले2012 के चुनाव में भी,,, कांगेस के एक दिग्गज के ना चाहने के बाद भी ये सर्वाधिक वोटो से जीते व मंत्री बने,,ईश्वर सिंह पीड़ित ,,शोषित शिक्षकों के लिए लगातार संघर्ष कर रहे है इतना ही नहीं उनके परिजनों की निजी समस्याओं के समाधान के लिए भी वोह संघर्षरत रहते है ,,ऐसे ईश्वर ऐसे सिंह ऐसे इंशा ,,को इस दुआ के साथ सेल्यूट के खुदा इन्हे हर संघर्ष में ज़िंदाबाद रखे ,,,ग़रीबों और शोषितो को इंसाफ दिलाने का इन्हे कामयाब हौसला दे ,,,आमीन ,,सुम्मा आमीन ,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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