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01 जून 2017

अधिस्वीकृत पत्रकारों की सुविधाओं और उनके नवीनीकरण पर अब सरकार की नयी निति नए नियमों के तहत गाज गिरने वाली है

राजस्थान के अधिस्वीकृत पत्रकारों की सुविधाओं और उनके नवीनीकरण पर अब सरकार की नयी निति नए नियमों के तहत गाज गिरने वाली है ,,भविष्य में स्वतंत्र पत्रकार के नाम पर थोक में बने अधिस्वीकृत स्वतंत्र पत्रकारों के लिए मुसीबतें खडी हो सकती है ,,पूर्व सरकार ने अधिस्वीकरण का सरलीकरण और विकेन्द्रीकरण व्यवस्था के तहत ऐतिहासिक रूप से थोक में स्वतंत्र पत्रकार नियमों में शिथिलता देकर बनाये थे ,,लेकिन अब पिछले कुछ महीनो से ,,कॉन्फ्रेंस व अन्य कार्यक्रमों में ऐसे पत्रकारों की बेहिसाब उपस्थिति से सरकार का मन बदला है और पुख्ता जाँच के बाद ही अब नवीनीकरण किये जाए ऐसे निर्देश जारी किये गए है ,,,,दूसरे राज्यों के मुक़ाबले राजस्थान में अधिस्वीकरण खासकर स्वतंत्र पत्रकार का अधिस्वीकरण का सरलीकरण होने से ,,यहां अधिस्वीकृत पत्रकारों की बहुतायत हो गयी है ,,हालत यह है के सरकारी कार्यक्रमों ,,प्रेसकॉन्फ्रेंसों में अधिकतम लोग संख्या से काफी अधिक तादाद में पत्रकारों के पहुँच जाने से अधिकारी और आयोजक दुखी होने लगे है ,,अभी कोटा में आयोजित एग्रीकेट कृषक मीट में भी सरकारी अधिकारीयों को काफी असुविधा का सामना करना पढ़ा और भोजन ,,उपहार सहित कई व्यवस्थाओ को विड्रॉ करना पढ़ा ,,,,आम तोर पर आयोजन में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के केमरामेन सहित कमसे कम दो आदमी तो होते ही है जबकि एक अख़बार में जिन्होंने स्वंतंत्र पत्रकार के रूप में एक्रीडेशन करवा रखा है उनके साथ दूसरे साथी भी चले जाने से संख्या बेहिसाब हो जाती है ,,बस ऐसे ही मुद्दों की वजह से अब अधिस्वीकरण व्यवस्था पर लगाम कसने की तैयारी है ,,राजस्थान में इस सरकार ने पिछली सरकार की तरह पत्रकारों को भूखंड और आवास व्यस्था सहित ,लेबटोप वगेरा की सुविधाएं तो उपलब्ध नहीं कराई उलटे यह भविष्य में लटकाई गई तलवार ,,पत्रकारिता पर कुठाराघात भी हो सकता है ,,इसकी खास वजह राजस्थान के पत्रकार संगठनों में आपसी गुटबाज़ी और सरकार के प्रति कुछ पत्रकारों का बेहिसाब झुकाव बताया जा रहा है ,,अलग अलग संगठनों के विरोधाभासी कार्यक्रम और एक दूसरे को नीचा दिखाने की चुगल खोर निति ने भी सरकार का मनोबल इस मामले में कार्यवाही करने के लिए बढ़ाया है ,,नैतिकता की बात तो यह है के विधि नियमों के विपरीत सरकारी सुविधाएं भोगने के लिए जो अधिसूचित हो रहा है उसे खुद को यह सुविधाएं छोड़ देना चाहिए ,,क्योंकि पत्रकारिता ,,या लेखन के लिए सरकारी सुविधाएं होना ज़रूरी नहीं है ,,,पत्रकारिता नियमों के तहत जिसकी सम्पूर्ण आजीविका पत्रकारिता पर ही निर्भर हो उसके ईश्वर को साक्षी मानकर शपथ पत्र देने के बाद ही सरकारी सुविधा के लिए अधिस्वीकरण होता है ,,लेकिन सरकारी अंदरूनी रिपोर्ट के मुताबिक़ कई पत्रकार सीधे तोर पर खुले रूप से दूसरे व्यवसाय से भी अपनी आजीविका चला रहे है और झूंठा शपथ पत्र दे रहे है ,,जबकि स्वतंत्र पत्रकार के लिए अनुभव और उम्र की बाध्यता के अलावा प्रतिबंध है के वोह किसी भी दूसरे समाचार पत्र में नियमित कर्मचारी के रूप में कार्य नहीं करेगा ,,लेकिन कई खुद का समाचार पत्र होने या फिर दूसरे किसी समाचार पत्र से संबद्ध होने के बाद भी ऐसे स्वतंत्रपत्रकार का अधिस्वीकरण करवाने की जाँच सूची में है जबकि स्वतंत्र पत्रकार के लिए आवश्यक है के प्रतिमाह उसके द्वारा लिखित आलेख ,,रिपोर्ट ,,समाचार कम से कम बाराह अलग अलग अख़बारों में प्रकाशित हो उनकी जाँच के बाद ही यह स्वतंत्र पत्रकार का अधिस्वीकरण अब जारी रह सकेगा ,,पहले यह पाबंदी सिर्फ चार अख़बारों में लेख प्रकाशन करने की थी ,,वर्तमान में अधिकतम ऐसे स्वतंत्र पत्रकार है जिनके आलेख ,,खबरे ,,या रिपोर्टे ,,दूसरे किसी भी अख़बार या मैगज़ीन में उनके नाम से प्रकाशित नहीं होते है ,यह प्रकाशन उनके नाम से प्रकाशित होना अनिवार्य है ,,जबकि अधिकतम सेवानिवृत पत्रकार स्वतंत्रपत्रकार हुए है ,,,कुछ दूसरे अख़बारों में फिर से काम भी करने लगे है ,यह सब अख़बारों के सी सी टी वी फुटेज में क़ैद भी है ,,,ऐसे में अब भविष्य में अगर सख्ती की गयी तो ,,अधिस्वीकृत स्वतंत्र पत्रकारों के लिए एक मुसीबत सामने आ जायेगी ,,पत्रकारिता नियमों के तहत कोई भी पत्रकार पत्रकारिता से जुड़ सकता है ,,,लेखन कार्य से जुड़ सकता है ,,लेकिन सरकारी अधिकारी ,,कर्मचारी ऐसा नहीं कर सकेगा ,,सिर्फ वकील को अधिवक्ता अधिनियम के नियम 54 में पत्रकारिता ,,लेखन ,,वेतनभोगी पत्रकारिता करने की छूट दी गयी है सरकारी कर्मचारी नियमों में तो पत्रकारों से संबध रखने पर भी ,,अनुशासनात्मक कार्यवाही करने का नियम है ,,नए पत्रकारों के लिए अख़बार निकालना भी मुश्किल है ,,शीर्षक लेने में भी न्यूनतम योग्यता स्नातक कर दी गयी है ,,घोषणापत्र प्रस्तुत करते समय पुलिस वेरिफिकेशन ,,प्रेस वेरिफिकेशन ,,आचरण वेरिफिकेशन ,प्रसार संख्या ,,नियमतिकरण की भी पाबंदी है ,,जबकि बढे अख़बारों में काम करने वाले कुछ पत्रकारों के अलावा किसी एजेंसी ,,किसी विज्ञापन एजेंसी ,,या ठेका प्रणाली के तहत पत्रकार बनाये गए है ,,इलेक्ट्रॉनिक मिडिया में भी स्टिंगर के नाम पर पत्रकारिता है सम्पूर्ण पत्रकारिता का नियुक्ति पत्र सीमित लोगो के पास है ,,ऐसे में पत्रकारों के सभी संगठनों को आपसी गुटबाज़ी भुलाकर ,,आपस में एकजुट होकर इन मुद्दों पर बहस करना होगी ,,आत्मचिंतन करना होगा ,, संगठनों को एक जुट होकर सरकार से बात कर ,,ऐसी कार्यवाहियों को रोकने के लिए कठोर नियमों में सरलीकरण की बात करना होगी ,,एक दूसरे के खिलाफ आंतरिक विरोध को खत्म कर एक जुट होना होगा ,,खुद आत्मचिंतन के साथ पत्रकार वार्ताओं में आयोजक द्वारा निजी तोर पर बुलाने पर ही जाने का कठोर अनुशासित नियम खुद पत्रकारों को बनाना होगा ,,बिन बुलाये महमान बनकर जाने से बेहतर है के ऐसे कार्यकमों का बहिष्कार कर दूर से ही अपनी खबरे निष्पक्ष रूप से तैयार कर छपवाए ,,,स्वतंत्र पत्रकारों को भी दूसरे अख़बारों में काम करना बंद करना होगा ,,एक स्वंतंत्र , लेखन ,,जीवंत लेखन ,,समाजोपयोगी लेखन बहुउपयोगी हो खुद के नाम से कम से कम बाराह अख़बार ,,मैग्ज़ीनों में तो छपवाने होंगे ,,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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