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22 मार्च 2017

योगी आदित्यनाथ का धन्यवाद

उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का धन्यवाद ,,जो उन्होंने उत्तरप्रदेश के अवैध बूचड़खाने ,बन्द करवाकर दलित और अल्पसंख्यकों ,,क्षत्रिय लोगो को बिमारी से बचाने के लिए क़दम उठाये है ,,चुनावी वायदे में बूचड़ खाने बन्द करने का घोषणापत्र था ,,लेकिन कोई बात नहीं जुमला बदला कर ,,वेध और अवैध बूचड़खाने में बदल लिए गए ,,वेध बूचड़खाने चालु रहेंगे ,,जबकि अवैध बूचड़खाने बन्द हो रहे है ,,देश भर में बूचड़खाने चलाने ,,बूचड़खानों में ,,जानवरों की मेडिकल जांच ,,साफ़ सफाई ,,सहित कई मामलों में क़ानून बने हुए है ,,उन क़ानूनों की क्रियान्विति की शत प्रतिशत जाँच ,,,देश के ,,,सभी बूचड़खानों की होना चाहिए ,,,सभी जानते है ,,दलित ,,अल्पसंख्यक ,,क्षत्रिय नॉनवेज खाते है ,,लेकिन अवैध बूचड़खानों में बिना चिकित्सक की जांच और मोहर के जानवरो के काटने से कई बीमार ,,जानवर भी काटकर बेचे जाते है ,गन्दगी रहने से भी ,,इंफेक्शन होता है ,,,कई नॉनवेज खाने वाले ,कुपोषण के शिकार हो जाते है ,कई बीमार हो जाते है ,,ऐसे में योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री बनते ही ,,अवैध बूचड़खाने बन्द करवाकर ,,,बेचारे ,दलित ,,अल्पसंख्यक ,,क्षत्रिय लोगो के स्वास्थ्य के बारे में सोचा तो सही ,,इसके लिए आदित्यनाथ को मुबारकबाद बधाई ,,बस अब वोह एक हिम्मत और कर ले ,,महिलाओ को शराबियो से अपमानित होने से बचने ,,शराब की लत में तबाही का रास्ता अपनाने वालों को बचाने के लिए ,,एक योगी का कर्तव्य निभाते हुए ,,समूचे उत्तरप्रदेश में शराब बन्दी लागु कर कड़ी कार्यवाही करे ,,ताकि उत्तरप्रदेश उत्तम प्रदेश बन सके ,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

1 टिप्पणी:

  1. अख्तर खान साब , बेबाकी से अपनी राय रखने के लिये आपका शुक्रिया।
    दरअसल अनिल तिवारी जी का मैं भी मुरीद हूँ। ब्लॉग लिखना(ajoshi1967.wordpress.com) और शायरियां कविताएं लिखना मेरा शगल है,और उनके समाचार पत्र यंग एचीवर को तलाशते हुए मैं आपके ब्लॉग तक आ गया।
    शामिष और निरामिष भोजन पर कई महानुभावों ने अपनी राय दी है। मेरा मानना है कि प्रकृति ने एक से बढ़कर एक पदार्थ हमें आहार के लिए जुटाये हैं। बेहतर है उन्ही से हम अपनी क्षुधा पूर्ण करें । हिन्दू धर्म में गौ माता सर्वदा पूज्या है , उसे बचाना हिन्दू धर्म का कर्तव्य है। बूचड़खानों में गायों के अलावा अन्य जानवरों की बेतरतीब कटाई एक अनाचार है। उसकी भी कोई तो संहिता होगी ही, उसका पालन अनिवार्य हो।
    गौ रक्षा हितार्थ आदिरीनाथ जी का कदम अत्यंत सराहनीय है। गौ की सेवा से जितने पदार्थ मानवता को मिल जाते हैं उसे काटने से एक बार के मांस के सिवा कुछ नहीं मिलता।
    बहरहाल , ये लंबी बहस का मुद्दा है।
    आपका लेखन अच्छा लगा।
    बहुत बहुत अभिवादन आपका..!

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