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07 फ़रवरी 2017

बार कौंसिल आॅफ राजस्थान की ओर से बनाए गए वन बार वन वोट रूल्स 2013 शून्य

बार एसोसिएशनों में चुनाव आदि बाबत बार कौंसिल आॅफ राजस्थान की ओर से बनाए गए वन बार वन वोट रूल्स 2013 शून्य करार
-कहा सोसाईटीज रजिस्ट्ेशन एक्ट के तहत गठित बार एसोसिएशनों पर अन्य संस्थान को नियम बनाने का नहीं क्षेत्राधिकार। हाईकोर्ट ने एसोसिएशनों को संचालित करने व चुनाव तथा वेल्फेयर सहित नए नियम कायदों का सुझाव देने को ग्यारह सदस्यीय कमेटी का किया गठन
जोधपुर।
राजस्थान हाईकोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ राजस्थान की ओर से राज्य के बार एसोसिएशनों के संविधान, प्रबंधन, फंडिंग व चुनाव को लेकर बनाये गये बीसीआर नियम 2013 को चुनौती देने वाली अपीलो को स्वीकार करते हुए नियमो को अवैधानिक व शून्य करार दिया ।जस्टिस गोविन्द माथुर व जस्टिस कैलाश चन्द्र शर्मा की खंडपीठ जोधपुर,उदयपुर,भीलवाडा,चित्तौडगढ व जयपुर बार संघ सहित अन्य की ओर से दायर अपीलो पर सुनवाई पूरी करते हुए 21 अक्टूबर 2015 को फैसला सुरक्षित रखा था। सोमवार को जस्टिस गोविन्द माथुर की खंडपीठ ने फैसला सुनाते हुए बार काउंसिल की ओर से बार संघो के चुनाव को लेकर बनाये गये नियमो को शून्य करार दिया। वही हाईकोर्ट ने अपनी शक्तियो का उपयोग करते हुए एक कमेटी का गठन किया है, जो कि 20 मार्च तक इस बाबत नए सुझाव पेश करेगी ।
बार कौंसिल अध्यक्ष लोढा होंगे कमेटी के चेयरमैन
महाधिवक्ता तथा वर्तमान में बार कौसिल आॅफ इंडिया की विशेष समिति के अध्यक्ष एनएम लोढा चेयरमैन होंगे। वही बीसीआई व बीसीआर के पूर्व अध्यक्ष व जयपुर के वरिष्ठ अधिवक्ता बीरी सिंह सिनसिनवार, बीसीआर के पूर्व अध्यक्ष व वरिष्ठ अधिवक्ता जगमालसिंह चैधरी, कोटा के अधिवक्ता एवं बीसीआर के पूर्व अध्यक्ष एमसी गुप्ता, उदयपुर के हर्ष मेहता, जयपुर के इन्द्रराज सैनी, अजमेर के भवानीसिंह शक्तावत, अध्यक्ष राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन जोधपुर, अध्यक्ष राजस्थान हाईकोर्ट लॉयर्स एसोसिएशन जोधपुर, अध्यक्ष राजस्थान हाईकोर्ट बार संघ जयपुर, व अध्यक्ष बार संघ जयपुर कमेटी के सदस्य होंगे। जब कि बार कौंसिल आॅफ राजस्थान के सचिव इस कमेटी के सचिव होंगे। यह कमेठी सुप्रीम कोर्ट में बीडी कौशिक के जजमेंट की पालना करवाने के लिए अपनी ओर से बार संघो व बार काउंसिल के लिए सुझाव देगी। कमेठी को अपने सभी सुझाव 20 मार्च तक हाईकोर्ट में पेश करने होंगे।
वन बार वन वोट का बनाया था नियम
बार काउंसिल ने नियम 2013 के तहत बार संघो के चुनाव को लेकर नियम बनाये थे जिसमें वन बार वन वोट,दिसम्बर के दूसरे सप्ताह में पूरे राजस्थान में एक दिन चुनाव,चुनाव लडने वालो की पदो के अनुसार उम्र की बाध्यता,पदाधिकारियों की वित्तीय शक्तियो पर प्रतिबंध,चुनाव अधिकारी बार काउंसिल द्वारा तय करना,वोटर लिस्ट बार काउंसिल द्वारा ही बनाया जाना सहित कई नियम बनाये थे। नये नियमो को विभिन्न बार संघो की ओर से राजस्थान हाईकोर्ट में नियमो को चुनौती दी गई थी।
बीसीआर ने कहा नियम बनाने का अधिकार
गौरतलब है कि बार काउंसिल ऑफ राजस्थान की ओर से पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता एमएस सिंघवी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने बीडी कौशिक के मामले में निर्णय दे रखा है जिसे हाईकोर्ट ने लागू भी करवाया है बीसीआई व बीसीआर के अपने नियम बनाने का पूरा अधिकार दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को लागू करवाना हाईकोर्ट का कार्य है । पूर्व निर्णयों के अनुसार बार काउंसिल ऑफ राजस्थान अपने चुनाव नियम बना सकता है उसे नियम बनाने का पूरा अधिकार है चुनाव में पारदर्शिता लाने के लिए ही नये नियम बनाये गये है।वही विभिन्न बार संघो की ओर से पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता एमआर सिंघवी ने बताया कि बीडी कौशिक के निर्णय में ना तो बार कौंसिल ऑफ इंडिया और ना ही बार कौंसिल ऑफ दिल्ली को पक्षकार थे इसलिए इस मामले में बार की शक्ति,क्षेत्राधिकार का प्रश्न नही था और ना ही फैसला में कुछ कहा गया।उन्होने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की सर्वोच्चता को स्वीकार करते हुए यह निर्धारित किया था कि बार संघ अपने नियम स्वयं बना सकते है।सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू करवाना हाईकोर्ट का कार्य है लेकिन फैसले में तय बिन्दूओं के अलावा कोई अन्य आशय नही निकाला जा सकता है।दोनो पक्षो की बहस पूरी होने पर हाईकोर्ट ने याचिकाओ पर फैसला सुरक्षित रखा था।

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