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21 जनवरी 2017

कोटा के प्रख्यात पत्रकार ,,अल्फ़ाज़ों के जादूगर ,,विजय माथुर उर्फ़ तिमिर भास्कर

कोटा के प्रख्यात पत्रकार ,,अल्फ़ाज़ों के जादूगर ,,विजय माथुर उर्फ़ तिमिर भास्कर ,,,पत्रकारिता और खूबसूरत लेखन का ,,,जाना माना नाम ,,जी हाँ दोस्तों,,, तिमिर भास्कर यानी ,,,अँधेरे में सूरज ,,अँधेरे को चीर कर,,, उजाला करने वाला सूरज ,,,यही सिफ़्त हमारे अग्रज ,,,,विजय माथुर उर्फ़ तिमिर भास्कर के,,,, पत्रकारिता लेखन में रही है ,,हम कहावत सुनते है ,,चिराग तले अन्धेरा ,,लेकिन दोस्तों ,,,जिन्होंने इनके ,,,,तले में अँधेरा कर ,,चिराग बनकर,,, रौशनी बटोरकर वाहवाही लूटी है ,,वोह सभी जानते है,,, के विजयमाथुर ने,,, एक दहाई नहीं ,,,कम से कम सैकड़ा ,,,,पत्रकारों के नाम से ,,खूबूसरत लेखन कर ,,,इस लेखनी को ,,,,उनके उत्साहवर्धन के लिए,,, उन लोगो का नाम दिया है ,,जो आज पत्रकारिता के भामाशाह बने है ,,,लेकिन फिर भी,,, विजयमाथुर जो लेखन के जादूगर है ,,जिन्होंने पत्रकारिता की दुनिया को ,,एक चिराग बनकर,,, रोशन किया है ,,आज उसी दिए के तले ,,,अँधेरा है ,,वोह गुमनामी के अँधेरे में तो रहे ,,लेकिन पत्रकारिता के समाज को ,,,,उनसे बहुत कुछ सीखना है ,,इसीलिए मेरे इसरार के बाद,,, वोह नए ,,नवेले पत्रकार और लेखन क्षेत्र में अपने जोहर दिखाने के लिए,,,, प्रयासरत लेखकों को ,,पत्रकारिता और लेखन ,,का हुनर ,,,,सिखाने के लिए ,,एक टीचर के रूप में,,,,प्रशिक्षण देने को तैयार हुए है ,,,दोस्तों ,,,विजय माथुर उर्फ़ तिमिर भास्कर ,,,जिनका जन्म तहज़ीब की नगरी ,,नवाबो की नगरी टोंक में 24 अप्रेल 1942 को हुआ ,, उनके पिता श्री हरिवल्लभ माथुर ,,टोंक नवाब के यहां ,,,एक मात्र ,,,अंग्रेजी क्लर्क थे ,इनकी परवरिश,, टोंक के तहज़ीब भरे माहौल में हुई ,,,जहाँ इन्हें एक उस्ताद,,, हिंदी पढाने ,,एक उस्ताद तहज़ीब सिखाने ,,एक उस्ताद उर्दू पढाने आते थे ,,,विजय माथुर के लिए ,,,अप्रेल माह लक्की रहा ,,इसी माह में ,,,इनकाविवाह हुआ ,,इसी माह में 27 अप्रेल को ,,,इनको जीवन संगिनी मिली और इसी माह की ,,,16 तारीख को,,,, इनकी नोकरी लगी ,,,विजय माथुर को बचपन से ही ,,लिखने का शोक़ रहा ,,उनकी पहली कहानी ,,बच्चो की पत्रिका ,,चन्दा मामा ,,में जब छप कर आयी ,,तो उसे खूब सराहा गया ,,,कोई पाठक मानने को तैयार नहीं था के,, एक नाबालिग 14 वर्ष के लड़के ने ,,,यह बहतरीन कहानी लिखी है ,,खेर ,,,विजयमाथुर फिर दूसरी पत्रिकाओ में भी लिखने लगे ,,वोह अठ्ठारह वर्ष की उम्र में ही मुम्बई फिल्मसिटी में ,,लेखक बनने चले गए ,,,,छोटी सी उम्र में ही उन्होंने ,,,एक पटकथा लिख डाली ,जिसे निशाँन फिल्म में ,,संजीव कुमार एक्टर के साथ फिल्माया गया ,,,,इस फिल्म के डायटोलोग ,,कहानी सब कुछ विजयमाथुर द्वारा लिखित है इनके गुरु ऍन ऐ अंसारी साहब ने इनकी पीठ थपथपाई ,,लेखराज भाखरी फिल्म लेखक ने इनकी सराहना की और बुन्देल खण्ड फिल्म की इस कहानी को खूब शाबाशी मिली ,,विजयमाथुर को इसफिल्म के बाद देवर फिल्म के डायलॉग लिखने का मौक़ा मिला ,,वोह फिल्म स्क्रिप्ट राइटर के साथ लेखन कार्य से भी जुड़े थे ,संघर्ष का ज़माना था ,,लेकिन अचानक ,,,एक तार ने उन्हें लेखक से,,, सरकारी कर्मचारी बना दिया ,,,,मुम्बई में ,,,बांद्रा जहां वोह रहते थे ,,,,एक तार आया ,,माँ बीमार है ,,,जैसे हो चले आओ ,,घबराकर,,, विजयमाथुर जयपुर लोटे,,,, तो फिर वापस फ़िल्मी दुनिया में जा न सके ,,उनके माता पिता के इसरार के बाद ,,,उन्हें सरकारी नोकरी में जाना पढ़ा ,,,पहले वोह अध्यापक रहे,,, फिर कृषिपाशुपालन विभाग में गंगानगर ,,अलवर ,,जयपुर में रहे,,, वोह शॉर्टहैंड विधा में पारंगत है ,,,हिंदी ,,उर्दू ,,अरबी ,संस्क्रत ,,अंग्रेजी भाषा पर उनका कमांड है ,,,,वोह अंग्रेजी खूब लिख पढ़ लेते है,, इसीलिए उन्हें शार्ट हेंड विधा के साथ,, अलवर कलेक्टर के निजी सहायक के रूप में भी,,, काम करने का सौभाग्य मिला ,,फिर वोह ,,,कोटा सी ऐ डी प्रोजेक्ट डाइरेक्टर के,,, निजी सहायक कार्यालय प्रभारी के रूप में,,, कोटा पहुंचे ,,,तब से वोह,,, कोटा में ही रम गए ,,,लेखन विजयमाथुर का शोख ,,उनका जूनून था ,,,,बस इसीलिए ,,,वोह रोज़,,, सरकारी कामकाज से निवर्त्त होकर,,, अपने आराम के समय में ,,आराम छोड़कर,,, लिखने का काम करते रहे ,,इसीलिए वोह कोटा के दैनिक जननायक ,,दैनिक धरती करे पुकार ,,सांध्य दैनिक अमर नायक ,,देश की धरती ,,नवज्योति ,,पत्रिका,,, भास्कर के कई सालो तक सम्पादक रहे ,,कोटा के कई दैनिक,, समाचार पत्रो ,,साप्ताहिक पत्रो में,, कार्यरत पत्रकारों के वोह उस्ताद भी रहे है ,,कई ऐसे बढे नामचीन पत्रकार भी है ,,,जिन्हें विजय माथुर ने,,, उंगली पकड़ कर,,, पत्रकारिता की,,, क ख ग ,,,सिखाया है ,,कई पत्रकारों के नामो से ,,,उन्होने खबरे बनाकर,, उनके नाम से ,,,खबरे प्रकाशित करवाकर ,,,उन्हें पत्रकारिता के अँधेरे से ,,,,सूरज बनाया है ,,विजयमाथुर,,,, पत्रकारिता ,,लेखन के अलावा ,,,कलाकार भी है ,,उन्हें कलाक्रतियो का शोक है ,,जयपुर में आज भी ,,,प्राचीन कलाकृति ,,एब्स्ट्रेक्ट ,,अमूर्त कला ,,इनकी बहतरीन कलाकर्ती की गवाह बनी हुई है,,, जो कमानी हॉउस में लगी हुई है ,,,विजयमाथुर नोकरी से ,,,अलविदा कहने के बाद ,कई साल,,,, दैनिक भास्कर में सम्पादक रहे ,,कई विज्ञापन एजेंसियों के ,,प्रचारक ,,डायलॉग लेखक रहे ,,कई चुनावो में ,प्रत्याक्षियों के प्रचार और विज्ञापनों में दिए जाने वाले डायलॉग के राइटर रहे ,,,कोटा मेले दशहरे के शताब्दी वर्ष के दौरान ,,मेले दशहरे का ,,,लोगो ,,जो काफी विख्यात रहा ,,,वोह ,,लोगो,,, विजय माथुर द्वारा ही तय्यार किया गया था ,,,विजय माथुर ,,,बहुमुखी प्रतिभा के धनि होने साथ साथ ,,मिलनसार खुशमिजाज़ और लोगो के हमदर्द है ,इसीलिए ,,,कई बार कई लोग ,,इनकी हमदर्दी ,इनकी फराख दिली का फायदा भी उठाते रहे है ,इन्हें ठगते भी रहे है ,,,लेकिन विजय माथुर,,, मुस्कुरा कर कहते है ,,जिसका जैसा स्वभाव ,,में लेखक हूँ ,,पत्रकार हूँ आर्टिस्ट हूँ ,,,में अपना स्वभाव ,,उम्र के इस पड़ाव में ,,क्यों बदलूँ ,,वोह अपने जीवन से ,,,सन्तुष्ठ है ,,उन्हें नामवरी मिली ,,,उन्हें वाहवाही मिली ,,,लोगो का प्यार मिला ,,,उनकी पत्नी ,,,एक बहतरीन दोस्त बनी ,,उनके तीन पुत्र,, कामयाब है जबकि एक पुत्री हिंदी साहित्य में पी एच डी कर,,, उज्जैन में प्रोफेसर है ,,,,,विजयमाथुर ,,चन्दामामा ,,धर्मयुग ,,साप्ताहिक हिंदुस्तान ,,सारिका ,,सुचित्रा ,,,प्रथम प्रवक्ता ,,पब्लिक एजेंट ,,नयी सदी ,,महानगर कहानियां ,,मनोहर कहानियां ,,मधुर कथाये ,,गृह शोभा ,,सरिता ,,सरस सलील ,,मुक्ता ,,इण्डिया न्यूज़ ,,सुपर एनडीए सहित,,,, कई दर्जन पत्रिकाओ के लेखन से जुड़े है ,,,विजयमाथुर अब ,,,,खुद का समाचार पत्र ,,कचनार के प्रकाशक सम्पादक मालिक है ,,,जो नियमित प्रकाशित हो रहा है ,,,कोटा की पत्रकारिता ,,कोटा के लेखन क्षेत्र में ,,,,निखार और पत्रकारिता ,,लेखन क्षेत्र से जुड़े लोगो के उत्साहवर्धन और उनके गाइडेंस के लिए विजयमाथुर तय्यार हो गए है ,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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