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25 सितंबर 2016

"नज़र" "नमाज़" "नज़रिया"

"नज़र" "नमाज़" "नज़रिया" सब कुछ बदल गया
इक रोज़ इश्क हुआ , और मेरा खुदा बदल गया !!,,यह कुछ लाइने पिछले दिनों एक वक्ता ने एक सियासी बैठक में उन मोलवी ,,उन कार्यकर्ताओ के लिए बोली जिन्होंने खुदा के मुक़ाबिल ,,अपने भाईसाहब कहे जाने वाले नेताओ से इश्क़ कर लिया ,,किसी ने तो नेताओ की जल्दबाज़ी में रोज़ा इफ्तार पहले करवा दिया ,,किसी ने,, नेता जी का भाषण पूरा होने तक ,, अज़ान और नमाज़ रुकवा दी ,,तो कई तो ऐसे भी थे जिन्होंने रोज़ा ,,और फिर रोज़े इफ्तार के तुरन्त बाद होने वाली नमाज़ भी अपने इन नेताओ के चक्कर में छोड़ दी ,,,,बेचारा यह वक्ता काफी दिनों तक अपने इस कथन के बाद बचता रहा लेकिन ,,इसे इन लाइनों की सज़ा ऐसी दी गई है ,,के एक बढे शहर के अस्पताल में यह अपनी चोटो का इलाज करा रहे है ,,,अख्तर

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