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03 सितंबर 2016

416 साल में पहली बार; मृत्यु के बाद सबसे कम वक्त में बनीं संत, मिल चुके हैं नोबेल और भारत रत्न समेत दुनियाभर के 124 बड़े सम्मान



mother teresa
कोलकाता के मिशनरीज ऑफ चैरिटी हाउस में शनिवार को श्रद्धालु।
नई दिल्ली/वेटिकन सिटी.मदर टेरेसा रविवार से संत कहलाएंगी। जीते-जी 124 बड़े पुरस्कारों से सम्मानित टेरेसा को निधन के बाद यह सबसे बड़ी श्रद्धांजलि है। भारत रत्न और नोबेल पुरस्कार जीतने वाली वह पहली महिला हैं जिन्हें वेटिकन में ईसाई समुदाय के धर्मगुरु संत घोषित करेंगे। इसके साथ ही टेरेसा विदेश में जन्मी पहली कैथोलिक हैं जिन्हें भारतीय मानकर संत का दर्जा दिया जा रहा है। रोमन कैथोलिक समुदाय में 1600 ईस्वी से संत घोषित करने का लिखित इतिहास है। तब से पोप के अलावा पहली बार किसी को मृत्यु के महज 19 साल बाद संत घोषित किया जा रहा है। रविवार को वेटिकन में 13 देशों के राष्ट्राध्यक्ष व 1 लाख लोग मौजूद होंगे। भारत से विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, ममता बनर्जी, केजरीवाल पहुंचे हैं। पढ़ें, 416 साल पुराना नियम , किन 3 चरणों में होती है संत घोषित करने की प्रक्रिया...

- पोप 1232 से संत घोषित कर रहे हैं। पर रोमन कैथोलिक संत घोषित करने की प्रक्रिया के साक्ष्य 1600 से मिलते हैं। यह 3 प्रमुख चरणों में बंटा है।

#1. चर्च की समिति द्वारा व्यक्ति की जांच

- चर्च सबसे पहले समिति बनाती है, जो संबंधित व्यक्ति के जीवन और कार्यों की समीक्षा करती है। व्यक्ति के बारे में दस्तावेज जमा किए जाते हैं। यह प्रक्रिया देहत्याग के 5 साल बाद ही शुरू की जा सकती है। मदर टेरेसा के मामले में यह नियम तोड़ा गया। निधन के 3 साल बाद ही प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी।

#2. सबूत मिलने पर ‘धन्य’ घोषित करना

- निधन के पांच साल बीतने के बाद स्थानीय बिशप संबंधित व्यक्ति को ‘धन्य’ घोषित करने की प्रक्रिया शुरू करने का आग्रह करते हैं। व्यक्ति के पवित्र होने के पर्याप्त सबूत होने पर पहले ‘धन्य’ घोषित किया जाता है। पोप जॉन पॉल-2 ने एक चमत्कार को मानकर टेरेसा को निधन के 6 साल बाद ही धन्य घोषित कर दिया था।

#3. दो चमत्कार मिलने पर संत घोषित

- इसके बाद संबंधित व्यक्ति द्वारा किए गए दो चमत्कारों के सबूत खोजे जाते हैं। अगर मिल जाते हैं तो पोप उन्हें ‘संत’ घोषित करते हैं। ‘धन्य’ से संत घोषित करने के बीच कम से कम 50 साल का अंतर रखते हैं। 1590 के बाद मृत्यु व संत हाेनेे के बीच औसतन 181 साल का अंतर रहा। टेरेसा 19 साल बाद ही संत हो गईं।
13 साल में मदर टेरेसा के दो चमत्कारों को दो पोप ने मान्यता दे दी

पहला 2002 में वेटिकन ने यह दावा मान लिया कि पश्चिम बंगाल की मोनिका बेसरा के पेट का कैंसर ट्यूमर मदर टेरेसा की तस्वीर वाला लाॅकेट फेरने और प्रार्थना से ठीक हुआ। पोप जान पाल-2 ने मान्यता दी।

इस पर सवाल भी उठे :मोनिका के पति ने कहा कि उनकी पत्नी चमत्कार से नहीं डाक्टरों के इलाज से ठीक हुई है। इलाज करने वाले डाक्टर रंजन मुस्तफी ने बताया कि ट्यूमर कैंसर के नहीं, टीबी से बने गांठ थे। दवा से मोनिका ठीक हो गई। पर वेटिकन ने ये आपत्तियां खारिज कर दीं थीं।
- दूसरा ब्राजील के इंजीनियर मार्सिलियो को ब्रेन ट्यूमर था। 17 दिसंबर 2015 को चर्च ने ये मान लिया कि मदर टेरेसा की प्रार्थना करने से उस व्यक्ति का ट्यूमर ठीक हो गया। इसे मौजूदा पोप फ्रांसिस ने मान्यता दी है।
8 साल में भारत से चौथी और तीसरी महिला संत हैं टेरेसा

1. सिस्टर अल्फोंसा(1910- 1946) : 2008 में संत घोषित। पहली भारतीय जिसे कैथोलिक चर्च से संत घोषित किया गया।
2. सिस्टर यूफ्रेशिया (1877-1952) : 2008 में संत घोषित।
3. फादर कुरियाकोस एलियास चवारा (1805-1871) : 2014 में संत घोषित।
(तीनों केरल के सायरो मलाबार चर्च से जुड़े हैं।)

भारत से जुड़े सबसे प्रसिद्ध संत जेवियर

4. संत फ्रांसिस जेवियर (1506-1552) :स्पेन में जन्मे फ्रांसिस जेवियर को 1622 में संत घोषित किया गया था। उनका पवित्र शरीर गोवा के बेलिसिका ऑफ बोम जीसस में रखा है। उन्हें देखने दुनियाभर से लोग गोवा आते हैं।

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