आपका-अख्तर खान

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05 मई 2016

टूट गया तो क्या ,,

में खिलौना था
तुम्हारा
खेलते खेलते
टूट गया तो क्या ,,
मेरा क्या क़ुसूर है
अजीब फितरत है
इन खिलोनो से ,,
खेलने वालों की ,,
खेलते है
जी भर जाता है
या फिर खिलौना
टूट जाता है ,
तो टूटे खिलोने को
कबाड़ करते है ,,
इनका क्या
यह तो अमीर है
फिर नया खिलौना लेंगे
मेरे पास तो सिर्फ
एक तुम ही मुझ से
खेलने वाले
तुम्ही मुझे
तोड़ने वाले थे ,,अख्तर

1 टिप्पणी:

  1. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" रविवार 08 मई 2016 को लिंक की जाएगी............... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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