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20 अप्रैल 2016

सच तुम मुझे

सच तुम मुझे
बहुत याद करोगे ,,
मेरा मुस्कुराना
तुम पर
मेरा हक़ जताना ,,
मेरा रूठ जाना
यूँ ही थोड़ी सी मुस्कुराहट में
मान जाना ,,
सच तुम मुझे
बहुत याद करोगे ,,
तुम्हे यूँ ही बाहों में भर लेना
यूँ ही तुम्हारे आंसुओं को पोंछकर
तुम्हे हंसा देना ,,
सच तुम मुझे
बहुत याद करोगे ,,
तुमसे यूँ ही ज़िद करना
एक बच्चे की तरह से मचल जाना
अपनी ज़िद पूरी करवाकर
यूँ ही इतराना
सच तुम मुझे
बहुत याद करोगे ,,अख्तर

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