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18 फ़रवरी 2016

ओडिशा: पति के अंतिम संस्कार के लिए नहीं थे रुपए, दो बेटों को रखना पड़ा गिरवी

आपबीती सुनाती सावित्री।
आपबीती सुनाती सावित्री।
चम्पुआ (ओडिशा)/रांची. झारखंड की राजधानी से 215 किमी दूर जैंतगढ़ (गोधूली गांव) में गरीबी के चलते पति का क्रियाकर्म करने के लिए एक महिला द्वारा अपने दो बेटों को गिरवी रखने का मामला सामने आया है। गरीबी के चलते सावित्री नाम की महिला ने महज 4 हजार रुपए में अपने दोनों बेटों को गिरवी रख दिया। क्या है पूरा मामला...
- सावित्री, रईबु नायक की पत्नी है। उसके चार बेटे व एक बिटिया (सबसे छोटी) हैं।
- इनका परिवार झारखंड-ओडिशा की सीमा पर एक दूर-दराज गांव में रहता है।
- इनके पास थोड़ी जमीन थी, जिस पर खेती-बारी कर रईबु परिवार चला रहा था।
- बीमार पति का पांच साल तक इलाज चला, इसमें उनकी सारी जमा पूंजी निकल गई।
- घर, जमीन-जायदाद सब गिरवी रखना पड़ा। मंगलवार को रईबु की मौत हो गई।
अंतिम संस्कार के लिए भी नहीं थे पैसे
- पति की मौत के बाद सावित्री के पास अंतिम संस्कार के लिए भी पैसे नहीं थे।
- किसी रिश्तेदार और गांव वालों ने मदद नहीं की। फिर उसने बेटों को गिरवी रखने का फैसला किया।
- उसने चार में से दो बड़े बेटों को पड़ोसी के पास दो-दो हजार रुपए में गिरवी रख दिया।
- फिर जो पैसा मिला, उससे पति का अंतिम संस्कार किया।
सावित्री की आपबीती सुनने के बाद क्या हुआ?
- गिरवी रखने की बात जब प्रशासन तक पहुंची, तो सावित्री ने उन्हें आपबीती बताई।
- उसे तत्काल 22 हजार रुपए की मदद दी गई। एक पक्का मकान और पांचों बच्चों को आश्रम स्कूल में दाखिला भी दिलाया गया।
- सावित्री के पास सिर छिपाने के लिए छोटा सा घर है, जिसका एक हिस्सा गिर चुका है।
- पांच साल से अकेली सावित्री परिवार का बोझ उठाते-उठाते थक चुकी हैं।
- सावित्री ने बताया कि पति स्वस्थ थे, तो खेती-बारी कर परिवार चला रहे थे।
- लेकिन अचानक सबकुछ बदल। पति रईबु के पैर में घाव हुआ, जो ठीक ही नहीं हुआ।
- घाव की वजह से वह ऐसा बीमार पड़ा कि फिर ठीक ही नहीं हुआ।
- हकीम से लेकर बड़े डॉक्टरों से इलाज कराया। जमा पूंजी खत्म हुई, तो जमीन-जायदाद भी गिरवी रखनी पड़ी, पति भी नहीं बच पाया।
बच्चों की परवरिश की भी चिंता
- सावित्री ने बताया कि उसे इस बात की चिंता है कि वह अपने पांच बच्चों की परवरिश कैसे करेंगी।
- पांच संतानों में मुकेश नायक (13 वर्ष), सुकेश (11 वर्ष), किल्लरू (8 वर्ष), आकाश (6 वर्ष) और एक बिटिया (4 वर्ष) की है।
- हालांकि, हालात जानने के बाद लोकल एडमिनिस्ट्रेशन मदद को आगे आया है।

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