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06 जनवरी 2016

#Pathankot: क्यों बताया जा रहा है 30 साल का सबसे खराब ऑपरेशन

फाइल फोटो: पोजीशन लिए हुए जवान।
फाइल फोटो: पोजीशन लिए हुए जवान।
नई दिल्ली. छह आतंकवादियों के मारे जाने के बाद पठानकोट एयरबेस में ऑपरेशन खत्म हो गया है। 4 दिनों तक चले इस सबसे लंबे ऑपरेशन पर सवाल उठ रहे हैं। एक्सपर्ट के मुताबिक कमांड और कंट्रोल को लेकर ऑपरेशन में कई कमियां रहीं। यही नहीं, सरकार के लेवल पर भी कई खामियां नजर आईं।
किसने बताया 30 साल का सबसे खराब ऑपरेशन...

1. फोर्स में नहीं दिखा को-ऑर्डिनेशन
- आर्मी के पूर्व डायरेक्टर जनरल (इन्फैंट्री), लेफ्टिनेंट जनरल शंकर प्रसाद के मुताबिक, ऑपरेशन की नजदीक से निगरानी करने वाले एक सीनियर आर्मी अफसर ने मुझे बताया, 'प्लानिंग के नजरिए से यह पिछले 30 सालों का सबसे खराब ऑपरेशन रहा।'
- इंटेलिजेंस इनपुट मिलने के पहले 12 घंटों तक पंजाब पुलिस, डीएससी और एयरबेस की सिक्युरिटी टीम के बीच एयरबेस की सिक्युरिटी बढ़ाने को लेकर को-ऑर्डिनेशन की कमी सामने आई।
- आर्मी को भेजे जाने के साथ ही बीएसएफ, पंजाब पुलिस भी वहां मौजूद थी। अटैक से पहले 160 NSG जवानों को भी वहां तैनात किया गया।
- आर्मी की दो यूनिट (60 जवान) तैनात की गई। डीएससी की बटालियन को मूव करने का फैसला ले लिया गया।
- सारे डिसीजन NSA अजीत डोभाल ले रहे थे।
2. ऑपरेशन की कमांड को लेकर कन्फ्यूजन

- मल्टीपल फोर्सेज को तैनात किए जाने से कन्फ्यूजन बढ़ा।
- सभी फोर्सेज के अफसर अलग-अलग इन्फॉर्मेशन शेयर कर रहे थे।
- कन्फ्यूजन यह था कि ऑपरेशन को कमांड कौन कर रहा है? कमान्डिंग इन चीफ कौन है?
- इसे लेकर यह कन्फ्यूजन बना रहा कि ऑपरेशन का एक्चुअल इंचार्ज कौन है?
- फोर्सेज मिक्स्ड मैसेजिंग कर रहीं थी। कुछ डिफेंस मिनिस्ट्री को रिपोर्ट कर रहे थे तो कुछ होम मिनिस्ट्री को।
3. तीन बार बदली गई कमांडिंग पोजिशन

- 1 जनवरी को होम सेक्रेटरी राजीव महर्षि ने साफ किया कि पूरा ऑपरेशन NSA अजीत डोभाल की देखरेख में चल रहा है।
- कमांडिंग पोजिशन NSG को सौंपने का फैसला 1-2 जनवरी की रात को किया गया।
- एयरफोर्स सिक्युरिटी फोर्स ने ड्रोन से टेररिस्ट की लोकेशन फाइंड हुई। इसके बाद आर्मी को कमांड दी गई।
- टेररिस्ट अटैक की इन्फॉर्मेशन पर आर्मी के ब्रिगेडियर अनुपिंदर सिंह बल्वी कमांड संभाल रहे थे। ब्रिगेडियर 1 जनवरी को ही अपने ट्रूप के साथ एयरबेस पर पहुंच चुके थे। 90 मिनट बाद ही कमांड में पहला चेंज हुआ।
- एयरफोर्स के गरुड़ कमांडो गुरसेवक सिंह के शहीद होने के बाद NSG के मेजर जरनल दुष्यंत सिंह को कमांड सौंपी गई। यह कमांड में दूसरा चेंज था। दुष्यंत अपने 160 कमांडोज के साथ मानेसर से वहां पहुंचे थे।

- 2 जनवरी को सुबह 10 बजे वेस्टर्न एयर कमांड के एयर मार्शल एसबी देव वहां पहुंचे। उनकी रैंक लेफ्टिनेंट जनरल की होती है जो मेजर जनरल से ऊंची रैंक है।
4. NSG और आर्मी के बीच कन्फ्यूजन
- NSG के ऑफिसर दुष्यंत सिंह ने ब्रिगेडियर अनुपिंदर से उन्हें कमांड देने को कहा।
- अनुपिंदर सिंह ने कहा- हमें सरकार की तरफ से ऐसा कोई ऑर्डर नहीं मिला है।
- जिसके बाद ब्रिगेडियर को कहा गया कि ऑपरेशन को NSG कमांड करेगी और आर्मी उसे सपोर्ट करेगी। इसके बाद आर्मी से एनएसजी को सपोर्ट करने को कहा गया।
सरकार के लेवल पर हुई चूक
1. चार दिन में एक बार भी नहीं हुई CCS की मीटिंग

- CCS (कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्युरिटी) मुश्किल हालात में कलेक्टिव डिसीजन लेने वाली सरकार की सबसे ताकतवर कमिटी है।
- लेकिन 4 दिन तक चले पठानकोट ऑपरेशन के दौरान CCS की एक भी मीटिंग नहीं हुई।
- कमिटी के ज्वॉइंट चीफ ऑफ स्टाफ को किसी भी तरह की स्ट्रैटजी बनाने के लिए इंस्ट्रक्ट नहीं किया गया।
- जुलाई, 2015 में गुरुदासपुर के दीनानगर पुलिस स्टेशन में हुए अटैक के बाद भी CCS की कोई मीटिंग नहीं बुलाई गई।
- सीनियर जर्नलिस्ट शेखर गुप्ता के मुताबिक कारगिल अटैक के दौरान पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी ने CCS की कई मीटिंग्स बुलाई थी।
2. पीएम ने आर्मी ऑफिसर्स के साथ नहीं की मीटिंग

- पीएम मोदी ने पठानकोट अटैक को लेकर दो हाई लेवल सिक्युरिटी मीटिंग्स की।
- पहली मीटिंग में NSA, IB और होम मिनिस्ट्री के अफसर तो मौजूद थे। लेकिन आर्मी और एयरफोर्स के अफसर शामिल नहीं थे।
- दूसरी मीटिंग में भी इंटेलिजेंस ऑफिसर्स और NSA ही मौजूद थे।
3. सरकार के लेवल पर हुई बयानबाजी से भी कन्फ्यूजन

- अटैक के दौरान सरकार के मंत्री अपने स्टाफ के साथ मीटिंग्स लेते रहे और अलग-अलग बयान देते रहे।
- ऑपरेशन शुरू होने के 18 घंटे बाद ही होम मिनिस्टर राजनाथ सिंह ने ट्वीट कर ऑपरेशन को सक्सेसफुल बता दिया।
- फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली ने 3 जनवरी को अपनी पीसी में कहा- हमारी सिक्युरिटी फोर्स बेस के भीतर मौजूद स्ट्रैटेजिक असॉल्ट को बचाने में पूरी तरह कामयाब रही है। ऑपरेशन को बेस के एक इलाके में सीमित कर लिया गया है।
- 4 जनवरी को होम सेक्रेटरी राजेश महर्षि ने पीसी की और कहा- 4 टेररिस्ट मार दिए गए हैं। जबकि इससे पहले 5 आतंकियों के मारे जाने की जानकारी मिल रही थी।
- आर्मी, एयरफोर्स और पंजाब पुलिस के अफसरों की तरफ से भी प्रेस कॉन्फ्रेंस की गईं। कमांडिंग पोजिशन पर सस्पेंस बना रहा।
- 5 जनवरी को डिफेंस मिनिस्टर ने माना कि ऑपरेशन के दौरान कुछ गलतियां हुई हैं, लेकिन सिक्युरिटी को लेकर कोई कम्प्रोमाइज नहीं किया गया है।
4. मंत्री बयान दे रहे थे, बैटल ग्राउंड पर अलग थे हालात

- डिफेंस मिनिस्टर ने बयान दिया कि सीधे एनकाउंटर में हमारा एक जवान शहीद हुआ है, जिसके बाद हमने फोर्स को ज्यादा रिस्क न लेते हुए ऑपरेशन पूरा करने को कहा है। हमें एयरफोर्स के स्ट्रैटेजिकल वेपन्स, प्लेन और हेलिकॉप्टर और UMV (अनमैन्ड व्हीकल) तक पहुंचने से रोके रखना है।
- फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली ने बयान दिया- सिक्युरिटी फोर्सेज कामयाबी के साथ फाइट कर रही हैं। टेररिस्ट्स को एक छोटे एरिया में घेर लिया गया है।
- बैटल ग्राउंड पर जो हालात थे, वह ये थे कि 6 टेररिस्ट एयरबेस की 10 फीट ऊंची और 2 फीट कंटीली दीवार कूद कर एयरबेस में एंटर हो चुके थे।
- उन्होंने 4 दिन तक सिक्युरिटी फोर्सेज को उलझाए रखा और हमारे 5 डीएससी जवानों के साथ एयरफोर्स का 1 गरुड़ कमांडो और 1 एनएसजी कमांडो शहीद हो चुके थे।
- 5 जवान आतंकियों के पहले अटैक में ही शहीद हुए, जबकि सिर्फ एक जवान सीधे एनकाउंटर में मारा गया। इसके अलावा एनएसजी के कमांडो निरंजन टेररिस्ट की बॉडी में बंधे बम के ब्लास्ट होने से शहीद हुए।
5. सीधी लड़ाई में NSG पर फोकस क्यों?

- एक्सपर्ट उदय भास्कर के मुताबिक पठानकोट में करीब 50 हजार सैनिक हैं। आर्मी मौजूद है। आर्मी को कमांड क्यों नहीं दी गई?
- 160 एनएसजी कमांडो भेजे गए, लेकिन NSG ऐसे ऑपरेशन में ज्यादा कामयाब नहीं होती है।
- उनके मुताबिक NSG की ट्रेनिंग हॉस्टेज (बंधक बनाए जाने) जैसी सिचुएशन और बंधकों को रिहा कराने के लिए होती है।
- NSG सीधी जमीनी लड़ाई में उतनी माहिर नहीं होती, जितनी आर्मी।
- ऐसे में आर्मी से महज 2 यूनिट (60 सैनिक) मांगी गई।
6. डोभाल ने क्यों की क्रेडिट लेने की कोशिश?

- रिटायर्ड कर्नल अजय शुक्ला कहते हैं- यह नहीं कहा जा सकता है कि ऑपरेशन सही दिशा में हैंडल किया गया।
- टेररिस्ट अटैक के दौरान एडवांस इंटेलिजेंस यूनिट को क्यों भेजा गया? जबकि सीधी लड़ाई के दौरान हर एक लाइफ कीमती होती है। एक NSG कमांडो तैया करने में देश का बड़ा खर्चा होता है।
- शुक्ला कहते हैं- NSG पिन प्वॉइंट टारगेट को हिट करती है। मैदानी लड़ाई को नहीं। मुंबई के एक होटल को खाली कराने और 18 किलोमीटर के वॉर फील्ड में ऑपरेट करने में बहुत फर्क है।
- NSG को ऑपरेशन की कमांड देना ऐसा ही है, जैसे एक छोटे घाव को ठीक करने के लिए हार्ट सर्जन का इस्तेमाल करना।
- वहां 50 हजार से ज्यादा ऑर्मी के जवान मौजूद हैं। इसके बावजूद NSA का NSG को ऑपरेशन हैंडल करने को कहने से लगता है जैसे डोभाल खुद इसका क्रेडिट लेना चाहते थे।
- शुक्ला ने कहा- शायद यही डोभाल के काम करने का तरीका है। वे क्रेडिट सीकर हैं।

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