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04 दिसंबर 2015

,,,,राष्ट्र गान पर,,,,, एक परिवार के खड़े नहीं होने पर ,,,उस परिवार को सिनेमाघर से बाहर निकाला गया ,,,वोह ,,,इसी लायक थे

हाल ही में ,,,,राष्ट्र गान पर,,,,, एक परिवार के खड़े नहीं होने पर ,,,उस परिवार को सिनेमाघर से बाहर निकाला गया ,,,वोह ,,,इसी लायक थे ,,एक तो ,,,मुस्लिम और फिर फिल्म देखने चले गए ,,फिर ,,,अपनी मनमानी करते है ,,वोह इसी लायक थे ,,उनके साथ ऐसा ही सुलूक होना चाहिए ,,लेकिन देश की अदालत का क्या करे ,,जिसने स्वीकारित रूप से राष्ट्रगान की,,,, अनिवार्यता को नहीं माना ,,इसकी क़ानूनी बाध्यता से,,,, इंकार किया ,,,अब देश में क़ानून है ,,देश में इस क़ानून की ,,,व्याख्या करने के लिए ,,,सुप्रीम कोर्ट है ,,,लेकिन किसी भक्त ने ,,,सुप्रीम कोर्ट के जज के इस फैसले के खिलाफ ,,,उन पर हमला नहीं किया ,,उनके खिलाफ,,, कोई प्रदर्शन नहीं किया ,,,कोई बात नहीं ,,,अदालत थी ,,,लेकिन जो लोग ,,,जन गण मन को,,, राष्ट्रिय गान नहीं बनने देना चाहते थे ,,आज वोह ,,,इस पर राजनीति कर रहे है ,,,भक्त जनो को,,, यह भी नहीं पता ,,,के इस राष्ट्रगान को जिसे देश की संसद ने ,,देश के संविधान ने ,,राष्ट्रगान का दर्जा दिया है ,,उसे भक्तजन के कुछ लोग अंग्रेजी हुकूमत के सम्मान में समर्पणीय गीत कहते है ,,सोशल मीडिया या कहीं भी ,,,जार्ज पंचम के सम्मान में,,, लिखा गीत कहते है ,,,एक तरफ तो भक्त जन ,,,इस जनगणमन को राष्ट्रिय गायन का दर्जा नहीं दिलवाना चाहते थे ,,दूसरी तरफ खुद अपने समारोह में इस गीत को नहीं गाते है ,,लेकिन मुद्दा मिल गया वोह भी सिनेमाघर का तो बस इसे भुनायेंगे तो सही ,,,,अगर सच में यह ,,राष्ट्रभक्त थे ,,,तो जो लोग राष्ट्रगान के सम्मान में ,,,नहीं उठे ,,उन के खिलाफ ,,,प्रिवेंशन ऑफ़ नेशनल ओर एक्ट,,, के प्रावधान के तहत ,,,मुक़दमा दर्ज करवाते ,,या फिर ,,,,अब तो भक्त जनो की सरकार है ,,, इस क़ानून में ,,,राष्ट्रगान का अपमान करने की परिभाषा और ऐसे अपमान करने वालों को,,, कठोर दंड दिलवाने का प्रावधान भी करे ,,,अगर नियत साफ़ है,, तो सरकार में बहुमत भी है ,,,,आज ही ओर्डीनेंस निकाले ,,लागू करे,, और फिर ,,,इसे संसद का सत्र बुलाकर ,,,क़ानून बना दे ,,दोषियों को सजा दे ,,,बात साफ़ हो जायेगी ,,यह राष्ट्रगान का सम्मान चाहते है ,,या फिर इसके नाम पर,,, सिर्फ नफरत की सियासत ,,हुड़दंग चाहते है ,,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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