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31 दिसंबर 2015

पतंगों का ज़माना है ,,,या यूँ कहे लोगों के गले ,,लोगों के हाथ ,,पैर कटने और परिंदो के मरजाने का ज़माना है

पतंगों का ज़माना है ,,,या यूँ कहे लोगों के गले ,,लोगों के हाथ ,,पैर कटने और परिंदो के मरजाने का ज़माना है ,,,,जी हाँ दोस्तों ,,एक वक़्त था हम और आप ,,कांच पीसा करते थे ,,,सरेस ,,आटे की लुगदी में ,,,कांच,,, रंग ,,मिलाकर ,,सादी डोरी को मांझा बनाकर ,,,पतंग उढ़ाकर नाचते थे ,,गाते थे ,,यह उड़ी ,,यह काटा ,,हल्लगे का शोर मचाते थे ,,कोई दुर्घटना नहीं ,,मांझे से किसी का गला नहीं कटता था ,,कोई मवेशी कोई परिंदा घायल नहीं होता था ,,,जो मांझा जलता था वोह पर्यावरण में ज़हर नहीं फैलाता था ,,लेकिन अफ़सोस आज हम प्रशासनिक कमज़ोरी ,,अखबारी खामोशी ,,,मीडिया की चुप्पी की वजह से करोडो करोड़ रुपया इस त्यौहार पर स्वदेशी होते हुए भी चाइना के नाम कर घरो में मोत बाँट रहे है ,,,ज़िलों के कलेक्टर मूकदर्शक है ,,अख़बार ,,इलेक्ट्रॉनिक मिडिया चुप है ,,पॉलीथीन ,,ग्लास के नाम पर तो जागरूकता आंदोलन होते है ,,देखा चाइना मांझा हटाओ के नाम पर भी आंदोलन हो जाए ,,अख़बार इसमें आगे आ जाए ,,शायद आये ,,शायद न आये ,,लेकिन दोस्तों हमारे देश की सुप्रीम कोर्ट ,,राजस्थान की हाईकोर्ट ने ऐसे मांझे को बेचने से रोकने ,,बेचने वाले और इस्तेमाल करने वाले को गिरफ्तार कर कार्यवाही का हुक्म ज़िलों के कलेक्टरों को ज़िम्मेदार बताते हुए दे रखा है ,,,अभी नगर निगम ने कोटा में कुछ चाइना मांझा पकड़ा है ,,अच्छा लगा ,,लेकिन इसमें आम जनता ,,आम जनप्रतिनिधि ,,,अख़बार ,,,इलेक्ट्रॉनिक मिडिया ,,प्रशासन को संयुक्त अभियान चलाने की ज़रूरत है ,,पर्यावरण क़ानून में सज़ा का प्रावधान है ,,कलेक्टर्स को दण्डप्रक्रिया संहिता में इसे रोकने का आदेश देने का अधिकार है ,,फिर ऐसा करके हम करोडो करोड रूपये इस जानलेवा मांझे के रूप में क्यों चायना भेजना चाहते है ,,इस मामले में तो आर एस एस के सेवकों को भी आगे बढ़चढ़ कर हिस्सा लेना चाहिए ,,,सो कोल्ड राष्ट्रभक्त संगठनो को भी आगे आना चाहिए ,,क्या कांग्रेस ,,क्या भाजपा सभी दलों के कार्यकर्ताओें को ,,आने वाली संभावित दुर्घटनाओ को रोकने के लिए अभियान चलाना चाहिए ,,अगर जागरूकता कार्यक्रम नहीं चलाया ,,इस जानलेवा चाइना मांझे को कारोबारियों और फिर बच्चो तक पहुंचने से नहीं रोका तो सच ,,हमारी सड़के एक बार फिर इस मांझे के कारण लहू लुहान होंगी ,,किसी की गर्दन कटेगी ,,किसी का हाथ तो किसी की ऊँगली कटेगी ,,,गांय सहित दूसरे मवेशी ,,पक्षी मरेंगे ,,घायल होंगे ,,,,यह मांझा जब जलाया जाएगा तो लोगों की साँसों में ज़हर घुलेगा और फिर क्या होगा सभी जानते है ,,तो जनाब सब लग जाओ इस मामले में पहले प्रशासन ,,कलेक्टर्स पर दबाव बनाओ आदेश निकाले ,,अख़बार जागरूकता कार्यक्रम चलाये ,,सियासी दल ,स्वम सेवक संघ इस मामले में हादसों से अपने शहर ,,अपने बच्चो को बचाने की कोशिशो में अभी से लग जाए ,,,,,,, अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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