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31 दिसंबर 2015

राजस्थान की भाजपा सरकार में जो बोलेगा उसको सबक सिखाएंगे का सिद्धांत लागू हो रहा है

एक दलित परिवार में पल बढ़ कर ,,आई ऐ एस बने ,,कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी को जब उनकी वरिष्ठ्ता के आधार पर राजस्थान सरकार में मुख्यसचिव का पद नहीं दिया गया उलटे सेवानिवृत्त हुए मुख्यसचिव का कार्यकाल बढ़ाकर उनका हक़ खत्म किया गया ,,तो उन्होंने दलितों को इन्साफ दिलाने के लिए एक बढ़ा क़दम उठाते हुए सेवानिवृत्ति के छ माह पूर्व ही स्वेच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली ,,इतना ही नहीं उन्होंने अचानक हिन्दू धर्म त्याग कर इस्लाम धर्म ग्रहण करने की घोषणा की ,,,,धर्म बदलना उनका व्यक्तिगत फैसला हो सकता है ,,,,इसके पीछे क्या कारण है ,,उन्होंने ऐसा क्यों किया अलग बात है ,,में व्यक्तिगत तोर पर उनके धर्म परिवर्तन के फैसले से सहमत नहीं हूँ ,,सरकार ने अगर मुख्यसचिव का कार्यकाल बढ़ाया तो इसके खिलाफ क़ानूनी लड़ाई लड़ी जा सकती थी ,,,,,,जो उन्होंने नहीं लड़ी ,,वोह निराशा में आ गए ,,लेकिन राजस्थान की भाजपा सरकार में जो बोलेगा उसको सबक सिखाएंगे का सिद्धांत लागू हो रहा है ,,,,एक आई पी एस अधिकारी पंकज चौधरी को सिर्फ इसलिए दिल्ली भेजकर ट्रांसफर किया गया के उसने ,,कटटरवादियों को बूंदी ज़िले में दंगा भड़काने से रोक दिया ,,उन्हें सरकार ने इसीलिए चार्जशीट दी के उन्होंने इस सच को उजागर कर दिया ,,,,यह सरकार और अधिकारीयों के अधिकारों की बात है ,,चाशनी खाने वाले अधिकारी सरकार में मज़े करते है ,,,देखिये एक आई ऐ एस अधिकारी खान सचिव के रूप में भारी रिश्वत लेते पकड़े गए ,,,,दूसरे कोटा में एक पुलिस अधीक्षक शर्मसार करने वाले हालातों में सुबूतो के साथ पकड़े गए ,,उनका निलंबन हुआ लेकिन सरकार ने उन्हें फिर से बहाल कर दिया ,,पूर्व आई पी एस ऐ के जेन सहित कई आई पी एस अधिकारीयों पर फ़र्ज़ी एनकाउंटर करने के इल्ज़ामात है ,,लेकिन सरकार उनकी मददगार बनी ,,,कांग्रेस के वफादार अधिकारी चाहे पूर्व स्वायत्त शासन सचिव हो चाहे उप सचिव हो चाहे कोई और हो उनके जेल भेजना ,,मुक़दमे करना ,,,सरकार अपने वफादारों को मलाईदार पोस्टों पर लगाती है ,,लेकिन दूसरे अधिकारियों को ह्युमूलेट नहीं करती ,,,एक वरिष्ठ अधिकारी जो मुख्यसचिव बनाये जाने का हक़ रखते है उन्हें एक छोटे से इदारे परिवहन निगम में चेयरमेन बनाना जहा पहले से ही एक आई ऐ एस यादव काम कर रहे थे ,,वोह क्या करते ,,इन्तिज़ार करते रहे ,,आखिर वरिष्ठ्ता के आधार पर मुख्यसचिव बनने का ख़्वाब देखना उनका हक़ था ,,लेकिन उनका हक़ छीना गया ,,गुस्सा वाजिब था ,,लेकिन उसके इज़हार करने का तरीका गलत है ,,,,इस्तीफा देना अलग बात है ,,लेकिन धर्म बदलना अजीब सा लगता है ,,,फिर पूरा देश और देश के क़ानून के जानकार जानते है के दलितों में एस सी एस टी को तो पारिवारिक मामलों में हिन्दू विधि में हिन्दू तक नहीं माना गया है ,,ऐसा क्यों हुआ ,,अब तक कानूनविदों और नेताओं का इस गलती पर ध्यान क्यों नहीं गया ,,कह नहीं सकते लेकिन अजीब लगता है जब हिन्दू वर्ण ,,हिन्दू धर्म वाले किसी दलित के पारिवारिक मुक़दमे को हिन्दू विधि के तहत गवर्न नहीं किया जाता सिविल प्रक्रिया संहिता में सिविल अधिकारों के तहत मुक़दमे चलाने पढ़ते है ,,खेर उमरावमल सालोदिया के इस्तीफे से सरकार में तो भूचाल आना ही है ,,वरिष्ठ आई ऐ एस ,,आई पी एस अधिकारीयों में वरिष्ठ्ता के अधिकारों को लेकर सजगता ,,सतर्कता भी होना है ,,थोड़ा आक्रोश भी होगा ,,लेकिन सरकार ने इस मामले में सबसे पहले मिडिया मैनेजमेंट किया ,,मिडिया को उमरावमल सालोदिया के इस्तीफे के कारणों का दर्द बताने की जगह ,,उनकी खिल्ली उढ़ाकर ,,उनके धर्म बदलने के निर्णय को फोकस कर आलोचना का माहोल बनाने के लिए कहा ,,और झोली में बैठे मीडिया भाइयों ने सरकार के इस आग्रह को स्वीकार भी किया ,,मिडिया का चिंतन इन कारणों पर होना चाहिए के आखरी एक वरिष्ठ अधिकारी को मुख्यसचिव बनने से रोकने के पीछे क्या मक़सद है ,,क्या सरकार का यह क़दम जायज़ है ,,लेकिन मिडिया इन सवालों से विमुख है ,,बस एकतरफा खबर ,,,,उमराव मल ने ऐसा क्यों किया ,,,ऐसी उनकी हिम्मत क्यों हुई ,,,जो अधिकारीयों में और रोष बढ़ा रहा है ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,अख़्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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