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27 नवंबर 2015

अजीब है ,,,,मेरे इस ,,,कथित,, स्मार्ट सीटी,,,, कोटा शहर के लोग

अजीब है ,,,,मेरे इस ,,,कथित,, स्मार्ट सीटी,,,, कोटा शहर के लोग ,,, जी हाँ अजीब है ,,पिछली कांग्रेस सरकार में ,,,,अकेले शान्ति धारीवाल ने ,,कोटा को चमकाने में ,,, जितने करोड़ रूपये लगाये है ,,,उसका एक प्रतीशत भी,,, इस शहर की स्मार्टनेस बढ़ाने में ,,,,अब तक नहीं लग पाया है ,,कोटा में एयरपोर्ट नहीं बन पाया है ,,कोटा में रोडवेज का आवागमन भी सही नहीं हो पाया है ,,,कोटा में यातायात व्यवस्था बदहाल है ,,,रोज़ जाम लग रहे है ,,,कोटा में कोचिंग माफ़िया की हठधर्मिता से रोज़ आत्महत्याओं का दौर चल रहा है ,,,कोटा कोचिंग नगरी से ,आत्महत्या नगरी बनता जा रहा है ,,,कोटा से आई एल जा रही है ,,कोटा के सभी उद्योगो में अब ठेके के अधिकारी ,,ठेके के कर्मचारी है ,,यहां रोज़गार के अवसर खत्म कर दिए गए है ,,कोटा में राजस्थान की सरकार बार बार आने का कहकर नहीं आ पाई है ,,,कोटा के अख़बार ,,कोटा के समाज सेवी ,,,टी वी चैनल ,,जनप्रतिनिधि ,,कोटा को स्मार्ट सिटी के नाम पर बढ़ी बढ़ी ढींगे हाँक रहे है ,,कोटा का हमदर्द बता रहे है , फिर वोह इस सच को कैसे और क्यों छुपा रहे है ,,,कोटा में विधायक तो है ,,सभी सत्ता पक्ष के भी है ,,लेकिन अधिकारी उनकी सुनते नहीं ,,,विधायकों को राजस्थान सरकार ने नालायक़ समझा है जो आज तक किसी को यहां मंत्री बनाया नहीं ,,,राजस्थान की पावर कोटा के पास नहीं जबकि पुरे हिंदुस्तान को बिजली की पावर कोटा दे रहा है ,,यहां ,,पानी ,,बिजली ,,,सब कुछ है बस नहीं है तो सियासी मज़बूती ,,सियासत की उपेक्षा ने इस शहर को स्मार्ट तो क्या ,,,गांगिया सिटी बना दिया है ,,अफ़सोस होता है जब एयरपोर्ट होने पर भी फ्लाइट नहीं आती ,,अफ़सोस होता है जब जबप्रिय विधायक होने पर भी उन्हें मंत्री नहीं बनाया जाता ,,अफ़सोस होता है जब उद्योग बंद होने की घोषणा होती है ,,अफसॉस होता है जब उद्योग होते हुए भी यहां लोगों को नौकरियां नहीं मिलती ,,अफ़सोस होता है जब कोटा स्मार्ट सिटी के इस कड़वी सच्चाई को कोई अख़बार ,,कोई टी वी अपनी खबरों में जगह नहीं देता ,,अफ़सोस होता है जब बुद्धिजीवी लोग सियासत की विचारधारा की गुलामी से बाहर निकल कर इस कड़वे सच पर विचार विमर्श नहीं करते ,,अफ़सोस होता है इस झुनझुने के नाम पर स्मार्ट सिटी की घोषणा पर ,,अफ़सोस होता है कोटा के नोजवानो पर जो इस तरफ अपनी सोच नहीं बनाते है ,,,अफ़सोस होता है मुख्यमंत्री पर जो कोटा संभाग की है लेकिन इस कोटा की स्मार्टनेस को दागदार कर रही है ,,अफ़सोस होता है जब कोटा नगर विकास न्यास का चेयरमेन अभी तक नहीं बनाया जाता ,,,अफ़सोस होता है जब कोटा को पुलिस कमिश्नरेट नहीं दिया जाता ,,अफ़सोस होता है जब कोटा नगर निगम में अब तक प्रतिपक्ष का नेता नहीं बिठाया जाता अफ़सोस होता है जब कोटा के लोग ,,बुद्धिजीवी इस तरह के आलेख ,, चिंतन को कोरी बकवास समझ कर बिना पढ़े आगे बढ़ जाते है ,,,,,उससे भी ज़्यादा अफसोस होता है ,, प्रतिपक्ष पर जो इस मुद्दे को ना तो विधानसभा में उठा पाया है ना ही इस मुद्दे को प्रतिपक्ष जनता की अदालत में ले जा पाया है ,,अफ़सोस होता है के में इस शहर का हूँ और में इस शहर के लोगों के लिए यह सब लिख रहा हूँ ,,,अफ़सोस होता है जब ,,आम जनसमस्याओ के बारे में आवाज़ उठाने वाले पार्षद मोहम्मद हुसेन को पुलिस हमले के मामले में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया जाता है और शहर ,,शहर के लोग हाथ पर हाथ धर कर बैठे रह जाते है ,,,,,,,,,उससे भी ज़्यादा अफ़सोस होता है जब हमारे इस पूर्ण विकसित स्मार्ट कोटा शहर को राजनितिक वैमनस्यता की वजह से स्मार्ट सूचि में अव्वल होने पर भी सबसे पीछे डाल दिया जाता है ,,अफ़सोस होता है जब दुसरो को इस चिंतन पर अफ़सोस नहीं होता ,,,,,,,,,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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