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21 अक्तूबर 2015

,मेरा सीना छप्पन इंच का हो गया है क्योंकि,,,,,,,,,,,,,,,

देश  के विख्यात साहित्यकारों द्वारा उन्हें मिले  पुरस्कार  वापस लौटाकर सरकार को वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के प्रति जाग्रत करने  ,,,वाक् एव अभिवक्ति की स्वतंत्रता को राष्ट्रनिर्माण की सोच के तहत इस्तेमाल की आज़ादी देने को लेकर जो अभियान चलाया गया था उसे कल मेरे हाड़ोती के लालों का बयांन पढ़कर धक्का सा लगा था ,,लेकिन आज में गौरवान्वित हूँ ,,,मेरा सीना छप्पन इंच का हो गया है क्योंकि मेरे भ्राता प्रसिद्ध साहित्यकार अम्बिकादत्त चतुर्वेदी ने एक चिंतन ,,मनन के बाद अपने विचारो को दृढ़ रखते हुए देश के साहित्यकारों की मुहीम की मदद का हिस्सा बनते हुए अपना पुरस्कार और एक लाख रुपए नक़द राशि भी लौटाने की घोषणा कर दी ,,,दोस्तों साहित्यकारों को समझना आम आदमी के बस की बात नहीं है ,,पत्रकार और साहित्यकार दोनों में ज़मीन आसमान का फ़र्क़ होता है ,, पत्रकार अव्वल तो किसी चैनल ,,किसी अख़बार में काम करता है जो मालिको की सोच से बंधा होता है और जो कुछ रजतशर्मा की तरह से होते है उनकी कहानिया तो आपको पता ही है ,,सोशल मिडिया एक्टिविस्ट पर भी ग्रूप बनाकर गुलामो या फिर  तनखय्यों का क़ब्ज़ा है ,,गुलाम सोच से आगे उनकी सोच है ही नहीं ,,कोई मोदी भक्त है ,,तो कोई मोदी के खिलाफ नफरत भड़काने वाला है ,,कोई आर एस एस भक्त है ,,हिंदूवादी है तो कोई मुस्लिम्वादि है ,,कुछ एक निरपेक्ष लेखक है जिन्हे यह तनखय्ये सोशल मिडिया एक्टिविस्ट ,,ग्रूप बनाकर नौकरी करने वाले एक्टिविस्ट ,,पार्टियो के गुलाम ,,,नौकरी करने वाले पत्रकार ,,,घेर कर झूंठा साबित करने में लगे रहते है ,,कोई ऐसे लोगों पर कालिख पोत देता है तो कोई ऐसे लोगों की हत्या कर देता है ,,कुल मिलाकर विपरीत हवा या फिर यूँ कहिये राष्ट्रिय सोच वाले हवा में बहने वाले लेखको का जीना दुश्वार है ऐसे लोग इन गुलाम मानसिकता वाले लोगों की निगाह में गद्दार हो गए है ,,,गुलाम मानसिकता वाले लोग ऐसे लोगों के खिलाफ माहोल तय्यार कर रहे है ,,,दूसरी तरफ साहित्यकार है जो अपनी मौलिक सोच रखता है ,,खुद लिखता है ,,,,,,समाज का चित्रण करता है ,,सच लिखता है उसे किसी की नौकरी नहीं करना ,,उसकी  लेखनी किसी की हाँ ना की मोहताज नहीं ,,बस इसीलिए भाई अम्बिकादत्त चतुर्वेदी ने कल कहा था के वाक् अभिव्यक्ति की  स्वतंत्रता तो सोशल मिडिया पर आज भी बरक़रार है ,,लेकिन एक चिंतन के बाद उन्होंने अपना यह फैसला बदला ,,विचार तो आज भी उनके वही है लेकिन ,,देश के साहित्कारों की इस लड़ाई में वोह भी शामिल हुए और हाड़ोती का सर गर्व से ऊँचा कर दिया ,,वोह अपने पुरस्कार में मिले एक लाख  रूपये ज़रिये चेक लोटा देंगे ,,,उन्होंने लिखा है ,,,,,,,,,,,,,मैं आत्मग्लानि से भर गया हूं ।
मेरे लिए अब यह संभव नहीं है कि मैं अपने लेखक समाज से विलग होकर रह सकूं ।
मेरे लिए अपने रचनाकार साथियों के संघर्ष के समय उनसे अलग खड़ा होने के क्षोभ को जीवन में कभी भी विस्मृत कर पाना संभव नहीं होगा ।
मेरे जीवन में अपनी रचनाकार बिरादरी की स्वस्ति से अधिक मूल्यवान कुछ भी नहीं है ।
मैं अपनी स्वयं की आश्वस्ति के लिए इससे बेहतर कोई दूसरा विकल्प नहीं पाता कि मैं मुझे सन्. 2013 में मिला केन्द्रीय साहित्य अकादमी का पुरस्कार प्राप्त राशि सहित लौटाने की घोषणा करता हूं ।
अम्बिकादत्त ।,,,अम्बिकादत्त चतुर्वेदी की यह संवेदनाये एक तस्वीर बताने के लिए काफी है ,,राजस्थान की छोटी काशी कही जाने वाली बूंदी नगरी में जन्मे कोटा चंबल तट पर पले बढे इस हाड़ोती के लाल पर मुझे गर्व है ,,,,,,,,,,,,,,,,अम्बिकादत्त चतुर्वेदी जिन्होंने ,,,,,, सभी प्रशासनिक सभी व्यस्तताओं के बावजूद ,,,,पांच महत्वपूर्ण साह्तियिक पुस्तको का लेखन और प्रकाशन किया ,,,दुनिया के ज्ज्बात अपनी लेखनी से उकेर कर पुस्तकों और रचनाओं में समेटने वाले यह शख्स ,,,राजस्थान प्रशासनिक सेवा में वरिष्ठ पद पर है यह अपनी साहितियिक प्रतिभा के कारण ,,,मीरा साहित्य पुरस्कार और साहित्य पुरस्कार से सम्मानित हो चुके है ....आप अम्बिका दत्त जी वेसे तो कोटा में प्रशासनिक अधिकारी के रूप में निष्पक्ष निर्भीक होकर अपने प्रशासनिक कार्यों को जनहित में विधि अनुसार अंजाम दे रहे है,,, इनकी कार्यकुशलता और सेवाभावी कर्तव्यनिष्ठ सरकारी अधिकारी के रूप में निष्पक्ष और ईमानदार सेवा से कोटा ही नहीं हाडोती ही नहीं पूरा राजस्थान अभिभूत है . अम्बिका दत्त जी छात्र जीवन से ही साहित्य से जुड़े रहे है और प्रशासनिक सेवा में कार्यरत व्यस्तताओं के बाद भी ,,,,भाई अम्बिका दत्त चतुर्वेदी ने अपनी कलम की ताकत .विचारों का जोहर और अल्फाजों की आदाकारी से जो साहित्य रस पैदा किया है ,,,उससे सभी को तृप्त कर दिया है ..,,,गागर में सागर भर देने वाले विचार ..मन को तृप्त कर ,,विचलित दिमाग को शांत कर देने वाले अलफ़ाज़ और समाज को नई दिशा नई सीख देने वाली सोच,,, इनके साहित्य में कूट कूट कर भरी है ,,आप की अभी तक हजारों रचनाये और पांच किताबे प्रकाशित हो चुकी है ,,,आप की जीवन शेली ,,,यानि उठने बेठने ,,,चलने फिरने और बोलने से लेकर प्रत्येक कार्यशेली में साहित्य का सृजन नज़र आता है आप अम्बिका दत्त जेसा नाम वेसा काम ,,आपने पारिवारिक और राजकीय कर्तव्यों के निर्वहन के साथ साथ साहित्य क्षेत्र में अपनी रचनाओं का परचम बुलंद कर देने वाले भाई अम्बिका दत्त चतुर्वेदी को सलाम ... आपका मक़सद है हिंदी राष्ट्रीय भाषा को पुनर्जीवन देना ,,क्षेत्रीय भाषाओं खासकर राजस्थानी हाड़ोती को नई पहचान देना क्योंकि भाषा और संस्कृति का सामजस्य ही एक ऐसा योग है जो संस्कार देता है ,,,,,अभी अम्बिकादत्त चतुर्वेदी की एक नई किताब का प्रकाशन चल रहा है जो जल्द ही साहित्य की गहराई और सच्चाई को लेकर आपके सामने होगी ,,अम्बिका दत्त सर को उनके लिखने की कलाकारी को लेकर   और एक जीवंत सोच ,,,गुलामी से मुक्ति  मुक्ती वाली आज़ादी की सोच और साहसिक क़दम के लिए ,,,मुबारकबाद बधाई ,,...अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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