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25 अक्तूबर 2015

तुम कहते थे ,,

तुम कहते थे ,,,,हम तुम्हारी ज़िंदगी हो ,,,,झूंठ कहते थे ,,तुमने ना तो हमारी ख्वाहिश पूरी की ,,,ना हमारी चाहत पूरी की ,,,,,बस यूँ ही ही तड़पने के लिए छोड़ दिया ,,,,मेने भी कहा था ,,तुम ने ठुकरा दिया तो किया में तुम्हारे बगैर रह लूंगा ,,लेकिन सच यही है में तुम्हारे बिना सिसक रहा हूँ ,,तड़प रहा हूँ ,,ज़िंदगी की डोर हाथ से छूट रही है ,,,,तुम ने मुझे ज़िंदगी कहा और छोड़ दिया तुम भी झूंठे ,,मेने तुम्हारे बगैर खुश रहने का दावा किया नहीं रह सका ,,में भी झूंठा तुम भी झूंठे बस फ़र्क़ है तुम्हारी और मेरी झूंठ में ,,मेरी झूंठ में प्यार ,,चाहत है ,,तुम्हारी झूंठ में मुझ से पीछा छुड़ाने के बाद की खुशियां ,,आज़ादी शामिल है ,,बधाई हो मुबारक हो ,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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