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28 सितंबर 2015

मुझे आज भी याद आते हो

तुम बेवफा तो हो
तुम झूंठे और फरेबी भी हो
तुम मतलबी भी हो
लेकिन यह भी सच है
तुम्हारी अदाएं
तुम्हारी तीखी निगाहें
तुम्हारे गुलाबी होंठ
तुम्हारा सांवला सलोना चेहरा
तुम्हारा खूबसूरत चाँद सा चेहरा
तुम्हारे साथ गुज़ारे हुए लम्हे
खासकर वोह लम्हा जिसे तुमने
यह कहकर भुला दिया बस करो बस करो
वोह लम्हे और तुम
मुझे आज भी याद आते हो
बस मेरे बस की बात नहीं
सिद्धांतो की बात है
इसीलिए में अपना क़दम
तुम्हारी तरफ नहीं बढ़ा पाता हूँ ,,,अख्तर

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