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12 सितंबर 2015

लद्दाख में आर्मी ने चीनी वॉच टावर को किया तबाह, बॉर्डर पर बढ़ी टेंशन

फाइल फोटो: लद्दाख में चीनी और भारतीय फौज (दाएं)।
फाइल फोटो: लद्दाख में चीनी और भारतीय फौज (दाएं)।
नई दिल्ली. लद्दाख में भारत और चीन की फौजें एक बार फिर आमने-सामने आ गई हैं। लद्दाख के बुर्तसे इलाके में दोनों देशों के बीच टेंशन तब बढ़ गई जब पैट्रोलिंग लाइन पर चीन की ओर से बनाए गए वॉच टावर को इंडियन आर्मी ने गिरा दिया। इस इलाके में बॉर्डर के दोनों तरफ बीते कुछ दिनों से फौज की तादाद बढ़ रही है।
क्या है मामला?
चीनी सेना ने पैट्रोलिंग लाइन (वह लाइन जिसके भीतर रहकर गश्त लगाई जाती है) के नजदीक वॉच टावर बना लिया था। शुक्रवार को भारतीय सेना और इंडो तिबतन बॉर्डर पुलिस ने मिलकर टावर को उखाड़ फेंका। इसके बाद दोनों तरफ फौज की तादाद बढ़ने लगी।

बुर्तसे में ही अगस्त 2014 और जुलाई 2013 में हुआ था टकराव

अगस्त 2014 : चीनी सैनिक लद्दाख के बुर्तसे क्षेत्र में भारतीय बॉर्डर में 25 किलोमीटर अंदर तक घुस गए थे। इंडियन आर्मी के गश्ती दल ने पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी के अधिकारियों को देखा था। इसके बाद गश्ती दल लौट आया था। अगले दिन जब जवान फिर गश्ती पर निकले, तब भी चीनी सैनिकों की जगह में कोई बदलाव नहीं आया। उन्होंने 'यह चीनी इलाका है, वापस जाओ' लिखा झंडा ले रखा था। भारतीय गश्ती दल के साथ क्विक रिएक्शन टीम भी गई, लेकिन चीनी सैनिकों ने जगह छोड़ने से मना कर दिया था।

सितंबर 2014 : 30 चीनी सैनिक लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल को पार कर भारतीय बॉर्डर में 500 मीटर अंदर घुस गए थे और तंबू गाड़ दिए थे। मामले की खबर मिलते ही इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (आईटीबीपी) के 70 जवानों को इलाके में तैनात किया गया था।

जुलाई 2013 : चीन की आर्मी बुर्तसे में भारतीय चौकियों के दो किलोमीटर पास तक आ गई थी। यह जगह लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल से करीब 30 किलोमीटर दूर है। इसी महीने चुमार सेक्टर में चीन की आर्मी घुस आई थी। उससे पहले 11 जुलाई को उनके हेलीकॉप्टर ने हमारे एयर स्पेस का वॉयलेशन किया था।

अप्रैल 2013 : लद्दाख के दिप्सांग के मैदानों में ही टकराव की स्थिति पैदा हुई थी जब चीनी सेना ने भारत के अंदर 19 किलोमीटर तक अपने खेमे गाड़ दिए थे। कुछ दिन बाद दोनों फौज इस बात पर राजी हुई कि पूरे लद्दाख में 15 अप्रैल से पहले की स्थिति बनाकर रखी जाएगी। इसके बाद ही भारत और चीन की आर्मी पीछे हटी।

चीन ने 2014 में 334 बार की घुसपैठ
चीनी सेना ने 2014 में 334 बार भारतीय इलाके में घुसपैठ की। यह घुसपैठ लद्दाख के आसपास के इलाकों में हुई है। पिछले साल अगस्त में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग जब भारत यात्रा पर थे, तब भी लद्दाख में 10 दिन से ज्यादा समय तक घुसपैठ विवाद के चलते भारत-चीन की आर्मी आमने-सामने थी। हालांकि, नवंबर 2014 में रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने कहा था कि छुटपुट घटनाएं कई क्षेत्रों में होती रहती हैं। इन्हें एक-दो दिन के भीतर ही सुलझा लिया जाता है। इन्हें आप घुसपैठ की बड़ी घटना नहीं कह सकते। चीन से सटे बड़े हिस्से पर बॉर्डर इमेजनरी है। वहां दोनों ओर की आर्मी एक-दूसरे की तरफ चली जाती हैं।

क्या है विवाद?
बता दें कि भारत और चीन के बीच विवादित इलाका 4000 किलोमीटर का है। लेकिन चीन का कहना है कि सीमा विवाद वाला क्षेत्र महज 2000 किलोमीटर का है। इसकी वजह यह है कि पाकिस्तान ने अपने कब्जे वाले कश्मीर में से अक्साई चीन को चीन के ही सुपुर्द कर दिया है। इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच 18 दौर की बातचीत हो चुकी है। लेकिन नतीजा सिफर ही रहा है।

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