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10 अगस्त 2015

नफरत ,,,नफरत

नफरत ,,,नफरत
नफरत ,,नफरत
हाँ सिर्फ नफरत
यही सिर्फ यही
दिया है तुमने
मेरी मोहब्बत का सिला
शक ,,झूंठ ,फरेब ,,झांसे ,,दिखावा
सिर्फ और सिर्फ नफरत ,,
हाँ नफरत
यही तो सब कुछ दिया है तुमने
मुझे मेरी मोहब्त का सिला ,,
फिर भी
तुम्हारी सीफ्त नफरत है अगर
तो में क्या करूँ
मेरी सीफ्त तो मोहब्बत है ,,मोहब्बत है
हाँ में कहता हूँ
तुम्हारी नफरत ही सही
मुझे तुमसे मोहब्बत है ,,मोहब्बत है ,,,,,,,,अख्तर

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