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27 अगस्त 2015

सरकार ने बताए स्मार्ट सिटी बनने वाले 98 शहरों के नाम, जानिए कैसे होंगे ये शहर

नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने गुरुवार को उन 98 शहरों के नाम जारी कर दिए, जिन्‍हें स्मार्ट सिटी के रूप में डेवलप किया जाएगा। यूपी ने 13 शहरों के नाम भेजे थे, लेकिन 12 को ही चुना गया। सबसे ज्‍यादा शहर इसी राज्‍य से हैं। जम्मू कश्मीर सरकार ने अपने शहरों के नाम तय करने के लिए कुछ और समय मांगा है। इसलिए राज्‍य के दो शहरों के नाम गुरुवार को अनाउंस नहीं किए जा सके। दिल्ली में केंद्रीय शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू ने यह भी बताया कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट पर 48 हजार करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। दिल्ली सहित सभी केंद्र शासित प्रदेशों को इस लिस्ट में शामिल किया गया है।
किस राज्य के कितने शहर
राज्य का नाम शहरों की संख्या
उत्तर प्रदेश 12
तमिलनाडू 12
महाराष्ट्र 10
मध्य प्रदेश 07
गुजरात 06
कर्नाटक 06
पश्चिम बंगाल 04
राजस्थान 04
बिहार 03
आंध्र प्रदेश 03
छत्तीसगढ़ 02
हरियाणा 02
तेलंगाना 02
ओडिशा 02
पंजाब 03
अंडमान निकोबार, अरुणाचल प्रदेश, असम, चंडीगढ़, दमन एंड दीव, दादरा और नागर हवेली, दिल्ली, गोवा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, केरल, लक्षद्वीप, त्रिपुरा, उत्तराखंड, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, पुड्डुचेरी और सिक्किम। 01

कैसे चुने गए शहर

सबसे पहले राज्यों ने अपने शहर चुने। इसके लिए केंद्र की ओर से कुछ गाइडलाइंस तय की गईं थीं। राज्यों से स्मार्ट सिटी के लिए प्रप्रोजल्स के साथ कुछ सुझाव भी मांगे गए थे। सभी राज्यों से दी गई लिस्ट को एक एक्सपर्ट कमिटी के पास भेजा गया। इस कमिटि में देश और विदेश के एक्सपर्ट थे। इनके निर्णय के आधार पर शहरों के नाम फाइनल किए गए।
कैसे होगी प्रोजेक्ट फंडिंग
पहले चरण में 20 और अगले हर दो साल में 40-40 शहरों को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के लिए सिलेक्ट किया जाएगा। हर स्मार्ट सिटी को अगले पांच साल तक केंद्र सरकार हर साल 100 करोड़ रुपए देगी।
स्मार्ट सिटीज़ बनाने पर फोकस क्यों?
शहरी विकास मंत्रालय के कॉन्सेप्ट नोट के मुताबिक, देश में अभी शहरी आबादी 31 फीसदी है, लेकिन इसकी भारत के जीडीपी में हिस्सेदारी 60 फीसदी से ज्यादा है। अनुमान है कि अगले 15 साल में शहरी आबादी की जीडीपी में हिस्सेदारी 75 फीसदी होगी। इस वजह से 100 स्मार्ट सिटीज़ बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
क्या हैं स्मार्ट सिटी के बुनियादी सिद्धांत?
सरकार ने स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट को तीन सिद्धांताें पर तैयार किया है।
1. क्वालिटी ऑफ लाइफ
स्मार्ट सिटी में रहने वाले हर व्यक्ति को क्वालिटी लाइफ मिले। यानी किफायती घर हो, हर तरह का इन्फ्रास्ट्रक्चर हो। पानी और बिजली चौबीसों घंटे मिले। एजुकेशन के ऑप्शंस हों। सुरक्षा हो। एंटरटेनमेंट और स्पोर्ट्स के साधन हों। आसपास के इलाकों से अच्छी और तेज कनेक्टिविटी हो। अच्छे स्कूल और अस्पताल भी मौजूद हों।
2. इन्वेस्टमेंट
स्मार्ट सिटी में वहां मौजूद ह्यूमन रिसोर्स और नेचुरल रिसोर्स के मुताबिक पूरा इन्वेस्टमेंट भी आए। बड़ी कंपनियों को वहां अपनी इंडस्ट्री लगाने के लिए सुविधाएं और सहूलियत मिले। उन पर टैक्स का ज्यादा बोझ न हो।
3. रोजगार
स्मार्ट सिटी में इन्वेस्टमेंट ऐसा आए जिससे वहां या आसपास रहने वाले लोगों को रोजगार के पूरे मौके मिलें। स्मार्ट सिटी के अंदर रहने वालों को अपनी आमदनी के लिए उस इलाके से ज्यादा दूर नहीं जाना पड़े।
जो सुविधाएं आजादी के बाद से अब तक आपको नहीं मिलीं, वे स्मार्ट सिटी में दिलाने के दावे
स्मार्ट सिटी में ट्रांसपोर्ट, रेजिडेंशियल, बिजली-पानी, हेल्थ और एजुकेशन की सुविधाएं देने के लिए कुछ मानक तय किए गए हैं।
1. ट्रांसपोर्ट
- स्मार्ट सिटी के अंदर एक स्थान से दूसरे स्थान जाने का ट्रैवल टाइम 45 मिनट से ज्यादा न हो।
- कम से कम 2 मीटर चौड़े फुटपाथ हों।
- रिहाइशी इलाकों से 800 मीटर की दूरी या 10 मिनट वॉक पर बस या मेट्रो की सुविधा हो।
2. रिहाइश
- 95 फीसदी रिहाइशी इलाके ऐसे हों जहां 400 मीटर से भी कम दूरी पर स्कूल, पार्क और रीक्रिएशन पार्क मौजूद हों।
- 20 फीसदी मकान आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए हों।
- कम से कम 30 फीसदी रिहाइशी और कमर्शियल इलाके बस या मेट्रो स्टेशन से 800 मीटर की दूरी के दायरे में ही हों।
3. बिजली और पानी
- स्मार्ट सिटी में 24*7 पानी और बिजली सप्लाई हो।
- 100 फीसदी घरों में बिजली कनेक्शन हों। सारे कनेक्शनों में मीटर लगा हो।
- लागत में नुकसान न हो। यानी कोई बिजली-पानी चोरी न कर पाए।
- प्रति व्यक्ति कम से कम 135 लीटर पानी दिया जाए।
4. वाईफाई कनेक्टिविटी
- 100 फीसदी घरों तक वाईफाई कनेक्टिविटी हो।
- 100 एमबीपीसी की स्पीड पर वाईफाई पर मिले।
5. हेल्थ
- स्मार्ट सिटी में इमरजेंसी रिस्पॉन्स टाइम 30 मिनट से ज्यादा न हो।
- हर 15 हजार लोगों पर एक डिस्पेंसरी हो।
- एक लाख की आबादी पर 30 बिस्तरों वाला छोटा अस्पताल, 80 बिस्तरों वाला मीडियम अस्पताल और 200 बिस्तरों वाला बड़ा अस्पताल हो।
- हर 50 हजार लोगों पर एक डायग्नोस्टिक सेंटर हो।
5. एजुकेशन
- 15 फीसदी इलाका एजुकेशनल इंस्टीट्यूट्स के लिए हो।
- हर 2500 लाेगों पर एक प्री-प्राइमरी, हर 5000 लोगों पर एक प्राइमरी, हर 7500 लोगों पर एक सीनियर सेकंडरी और हर एक लाख की आबादी पर पहली से 12वीं क्लास तक का एक इंटिग्रेटेड स्कूल हो।
- सवा लाख की आबादी पर एक कॉलेज हो।
- 10 लाख की आबादी पर एक यूनिवर्सिटी, एक इंजीनियरिंग कॉलेज, एक मेडिकल कॉलेज, एक प्रोफेशनल कॉलेज और एक पैरामेडिकल कॉलेज हाे।

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