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19 जुलाई 2015

ईद का असल पैगाम ….

ईद का असल पैगाम ….
रमज़ान के पूरे महीने में भूक और प्यास को बर्दाश्त करने के बाद ईद की ख़ुशी इस बाद की मिसाल है कि ज़िन्दगी की मुसीबतों पर सब्र करने के बाद कभी ना कम होने वाली जन्नत की खुशियाँ हैं.
*हदीसों से पता चलता है कि जन्नत में जाने के बाद लोग एक दुसरे से बहुत मुहब्बत करने लगेंगे और अगर किसी से दुनियां में मन मुटाव था तो वो भी ख़त्म कर के एक दुसरे की खताओं को माफ़ कर देंगे.
💎 ईद का भी यही पैगाम है….
ईद कोई हाल्ला मचाने का त्यौहार नहीं है,
*यह आपसी रंजिशों को मिटा कर एक दुसरे को खुशियाँ बाँटने का मौका है,
*एक दुसरे की गलतियों और अपने हक़ को माफ़ कर सब को गले लगाने का त्यौहार है,
*आप हमसे यह ना कहना कि लोग बुरे हैं….
*अगर वे अच्छे होते तो फिर आप की क्या जिम्मेदारी थी ???
... इसलिए सब पिछली बातें भूल जाइये और सब मुस्लिम गैर मुस्लिम जिनसे भी मन मुटाव चल रहा है उनकी तरफ दोस्ती का हाथ बढाइये इसी अमल से अल्लाह के यहाँ यह साबित होगा कि आप ने रमज़ान में सब्र करना सीख लिया था...
🌿 इसी गुज़ारिश के साथ हम सब की तरफ से सभी भाई और उनके परिवारों को यह ईद बहुत बहुत मुबारक हो.

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