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26 जुलाई 2015

कुछ सुनहरे जुमले

☆ नॉन-मुस्लिम भाइयो द्वारा इस्तेमाल किये जाने वाले कुछ सुनहरे जुमले ….
अक्सर देखा जाता है की कई गैर-मुस्लिम मुस्लिमो द्वारा इस्तेमाल किये जाने वाले आम शब्द जैसे माशाअल्लाह, सुभानल्लाह, इंशाल्लाह इत्यादि का मतलब नहीं पता होता. नीचे इनका मतलब और इन्हें कहाँ इस्तेमाल किया जाता है इसकी जानकारी दी गयी है. अगर कोई शब्द ऐसा है जो यहाँ न लिखा हो लेकिन आप उसका मतलब जानना चाहते हों तो इस पोस्ट के कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हैं. :
1. बिस्मिल्लाही रहमानीर्रहीम (Bismillah-Hirrahman-Nirrahim) :
» अल्लाह के नाम से शुरू जो बड़ा कृपालु और अत्यन्त दयावान हैं.
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2. अस्सलामो अलैकुम (Asalamo Alaikum) :
» यह मुस्लिमो का सबसे आम अभिवादन (Greeting) है जो वह एक दुसरे से मिलने पर कहते हैं. इसका मतलब होता है ‘अल्लाह तुमपर सलामती(peace) अता फरमाए’.
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3. वालैकुम अस-सलाम (Walaikum As-Salaam) :
» यह सलाम के जवाब में कहा जाता है. इसका मतलब होता है ‘अल्लाह तुमपर भी सलामती(peace) अता फरमाए’.
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4. अल्हम्दुल्लिलाह (Alahmdulillah) :
» इसका मतलब होता है “समस्त प्रशंसाएं केवल अल्लाह ही के लिए है (सारी तारीफे सिर्फ अल्लाह ही के लिए है और शुक्र है अल्लाह का)”.
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5. माशाअल्लाह (MashaAllah) :
» यह शब्द मुस्लिम अपनी ख़ुशी, उत्साह या कोई बेहतरीन चीज़ को देखकर बोलते हैं. इसका मतलब होता है “जो भी अल्लाह चाहे..” या “अल्लाह जो भी देना चाहता है, देता है”. यानि की अल्लाह जिसको चाहता है उसे कोई अच्छी चीज़, ख़ुशी, भलाई या कामयाबी देता है. ऐसा होने पर मुसलिम माशाल्लाह कहते हैं.
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6. इन्शा’अल्लाह (Insha’Allah) :
» जब कोई शख्स भविष्य में कोई कार्य करना चाहता है, या उसका इरादा करता है या भविष्य में कुछ होने की आशंका व्यक्त करता है या कोई वादा करता है या कोई शपथ लेता है तो इस शब्द का उपयोग करता है. ऐसा करने का हुक्म कुरान में है. इंशाल्लाह का मतलब होता है ‘अगर अल्लाह ने चाहा’
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7. सुबहान’अल्लाह (SubhanAllah) :
» इसका मतलब होता है ‘पाकी(Glory)है अल्लाह के लिए’. एक मुस्लिम अल्लाह की किसी विशेषता, उपकार, चमत्कार इत्यादि को देखकर अपने उत्साह की अभिव्यक्ति के लिए करता है.
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8. अल्लाहु-अकबर (AllahuAkbar) :
» इसका मतलब होता है ‘अल्लाह सबसे बड़ा(महान) है’.
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9. जज़ाकल्लाह (JazakAllah) :
» इसका मतलब होता है अल्लाह तुम्हे इसका बेहतरीन बदला दे. जब एक मुसलिम किसी दुसरे मुसलिम की मदद या उपकार करता है तो अपनी कृतज्ञता दिखाने के लिए एक मुसलिम दुसरे मुसलिम से यह कहता है.
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10. अल्लाह हाफिज़ (Allah Hafiz) :
» अकसर कई मुस्लिम एक दुसरे से विदा लेते वक़्त इसका इस्तेमाल करते हैं. इसका मतलब होता है ‘अल्लाह हिफाज़त करने वाला (हाफिज़) है’. इसके पीछे भावना यही होती है की ‘अल्लाह तुम्हारी हिफाज़त करे’
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11. ला हौल वाला कुवत इल्ला बिल्ला हिल अली इल अज़ीम :
(La Houla Wala Quwa’ta Illa Billah Hil Ali Yel Azeem)
» अल्लाह के सिवा कोई कुव्वत नहीं (मुसिबतो से) बचाने वाली जो के अज़ीम-तर है.
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12. सल्ललाहो अलैहि वसल्लम (Sallallahu Alaihay Wasallam) :
» यह शब्द अल्लाह के आखरी पैगम्बर और रसूल मुहम्मद (सल्लाहो अलैहि वसल्लम) का नाम लेने या उनका ज़िक्र होने पर इस्तेमाल किया जाता है. यह इज्ज़त देने और आप (सल्लाहो अलैहि वसल्लम) पर सलामती भेजने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. इसका मतलब होता है ‘आप पर अल्लाह की कृपा और सलामती हो’.

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