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22 जून 2015

मक्का शहर


दुनिया का सबसे बेहतर सबसे उत्तम और सब
से उन्नत शहर
किसी भी मायने किसी भी नज़रिये से देख लिया
जाये ।
चोरी - नहीं
हत्या - नहीं
बलात्कार - नहीं
शोषण - नहीं
सम्पदा - सबसे अधिक
विदेशी आवागमन - सर्वाधिक
किसी भी प्रकार का टैक्स - बिलकुल नहीं
पेट्रोलियम - फ़िल्टर पानी के भाव
चिकित्सा - निशुल्क
बिजली - निशुल्क
पानी - निशुल्क
ईमानदारी ऐसी की कही ताले नहीं लगाये जाते ।
उपभोग के साधन - दुनिया में सबसे बेहतर
resources - VVIP level
economy - best
infrastructue - top level
Import /export - expert quality
governance - best quality
Management - human interruptable
Law and order - best in case
आखिर क्या कारण है की एक बंजर रेगिस्तान में
बसा शहर आज दुनिया में सबसे उन्नत है जबकि हमारे
प्यारे रसूल के आने से पहले लोग इसे जो होने
और जैसा होने का दावा करते हैं।
क्या ये लोग ऐसा उन्नत और पाक शहर
दुनिया के किसी भी कोने में बना के दिखा सकते
हैं।
कितनी भी दलील दे दो इस्लाम और मुसलमानो के
खिलाफ ये इस्लाम ही है जो इसे दुनिया में सबसे
बेहतर बनाता है।
खुली चुनौती हे तुम्हे मेरे भटके हुए भाइयो । यहाँ
तुम्हारी हर एक दलील खोखली साबित होती है ।
ये शहर किसी चंदे या मज़हब के धंधे से
नहीं बसा है ।
ये वो शहर ऐ जो हज करने का खर्च
भी खुद देता और security amount भी वापस कर
देता है । जिसे हमारी सरकार खा जाती है।
: हिन्दू/मस्लिम सभी भाई इसपर गौर करें..
मैं बात कर रहा हूँ इस्लाम के आख़िरी नबी
हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु°अलयही°वसल्लम°)की..ं
आप (सल्लल्लाहु°अलयही°वसल्लम°)
ने औरतों के हक़ में उस वक़्त आवाज़ उठाई जिस दौर
में
बेटियों को जिंदा दफना दिया जाता था और
विधवाओं को जीने तक का अधिकार न था...
हाँ ये वही मुहम्मद (सल्लल्लाहु°अलयही
°वसल्लम°) हैं
जिन्होंने एक गरीब नीग्रो बिलाल
(रजि अल्लाहू ) को अपने गले से लगाया,
अपने कंधों पर बैठाया, और इस्लाम का पहला
आलिम मुक़र्रर किया....
वही मुहम्मद (सल्लल्लाहु°अलयही°वसल्लम)
जिन्होंने कहा की
मज़दूर का मेहनताना उसका पसीना सूखने से पहले
अदा करो, मज़दूर पर उसकी ताक़त से ज़्यादा बोझ
न डालो, यहाँ तक की काम में मज़दूर का हाथ
बटाओ....
वही मुहम्मद (सल्लल्लाहु°अलयही°वसल्लम
°)
जिन्होंने कहा की वो इंसान मुसलमान नहीं हो
सकता जिसका पड़ोसी भूखा
सोये, चाहे वो किसी भी मज़हब का हो...
वही मुहम्मद (सल्लल्लाहु°अलयही°वसल्लम
°)
जिन्होंने कहा की अगर किसी ग़ैर मुस्लिम पर
किसी ने ज़ुल्म किया तो अल्लाह की अदालत में
वो खुद उस ग़ैर मुस्लिम की वक़ालत करेंगे....
वही मुहम्मद (सल्लल्लाहु°अलयही°वसल्लम
°)
जिन्होंने अपने ऊपर कूड़ा फेंकने वाली बुज़ुर्ग औरत
का जवाब हमेशा मुस्कुरा कर दिया और
उसके बीमार हो जाने पर ख़ुद खैरियत पूछने जाते
हैं....
हाँ वही मुहम्मद (सल्लल्लाहु°अलयही
°वसल्लम°)
जिन्होंने कहा की दूसरे मज़हब का मज़ाक न
बनाओ...
वही मुहम्मद (सल्लल्लाहु°अलयही°वसल्लम
°)
जिन्होंने जंग के भी आदाब तय किये की सिर्फ
अपने बचाव में ही हथियार उठाओ...
बच्चे, बूढों और औरतों पर हमला न करो बल्कि पहले
उन्हें
किसी महफूज़ जगह पहुँचा दो...यहाँ तक
की पेड़ पौधों को भी नुकसान ना पहुचाने की
हिदायत दी...
उसी अज़ीमुश्शान शख्सिअत के बारे में लिखते
लिखते कलम थक जायगी मगर उसकी शान
कभी कम न होगी.
उन पर हमारी जान कुर्बान....
आजकल हिन्दु/गैर-मुस्लिम भाई बहुत परेशान रहते हे
इस्लाम को लेकर.... उनको बताना चाहुंगा कि
अगर कोई इन्सान गलती करता हे तो वो इन्सान
बुरा होता है उसका धर्म/मज़हब नही....
२१ वीं सदी मे बहुत ऐसे लोग हैं जो दुनिया मे इतना
मग्न हो गये है कि जिनको खुद इस्लाम की नोलैज
नही हे तो बो बच्चो को क्या इस्लाम के बारे मै
बताऐंगे..
याद रखो... इस्लाम १००% पाक ओर साफ मज़हब
हे..
किसी के कहने सुनने पर इसे बुरा ना कहो...
और
अब भी अगर आपके दिमाग मे इस्लाम को लेकर
कोई गलतफैमी है तो आप खुद मुहम्मद (सल्लल्लाहु
°अलयही°वसल्लम) की जीवनी(लाइफ हिस्ट्री)
पड़कर देखें... आपको जर्रा (पौइंट) बराबर भी
गलती नजर नही आयेगी..!!!
अगर कोई मुस्लिम गलती/बत्तमीजी करता दिखे
तो आप उससे सिर्फ इतना बौलना की क्या नबी
( मुहम्मद सल्लल्लाहु°अलयही°वसल्लम) ने आपको
यही सिखाया है??? तुमको नबी का ज़रा भी डर
नहीं.????
सच्चा मुसलमान होगा तो शर्म से पानी पानी
होकर तौबा कर लेगा..!!!!

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