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25 जून 2015

हर धर्म की कुछ विशिष्टताएं या ख़ासियतें

प्रत्येक  धर्मो मे सृष्टि रचना और मानव विकास के बारे में पृथक-पृथक उल्लेख मिलता है, और इन्हें पढऩे वाले पृथक से कुछ नहीं सोचते किन्तु यदि समग्र रूप से विचार किया जाए, तो हमारी संस्कृति, सभ्यता और धर्म में काफ़ी समानता मिलती है।
पृथ्वी पर सैकड़ों या उससे भी ज़्यादा धर्म हैं। हर धर्म की कुछ विशिष्टताएं या ख़ासियतें होती है। हिन्दुओं में ऊँ, स्वास्तिक और कार्य के प्रारंभ में श्री गणेशाय नम: का विशेष महत्व माना जाता है। सिक्खों मे अरदास, गुरुवाणी, सत श्रीअकाल और पगड़ी का ख़ास महत्व होता है। वहीं ईसाई धर्म के मानने वालों का जीजस का्रइस्ट, क्रास का चिह्न, माता मरियम और बाइबिल आदि के प्रति बड़ा आत्मीय सम्मान होता है।
इस्लाम धर्म में 786
जिस तरह किसी भी नए या शुभ कार्य की शुरुआत करने से पूर्व हिन्दुओं में गणेश को पूजा जाता है, क्योंकि गणेश को विघ्नहर्ता और सद्बुद्धि का देवता माना जाता है। उसी प्रकार इस्लाम धर्म में अंक - 786 को शुभ अंक या शुभ प्रतीक माना जाता है। आमतौर पर अधिकांश मुस्लिम इस संख्या से किसी न किसी तरह जुड़े रहना चाहते हैं।
अरबी भाषा में
अरबी भाषा में 786
अरब से जन्में इस्लाम धर्म में अंक - 786 का बड़ा ही धार्मिक महत्व माना गया है। प्राचीन काल में अंक ज्योतिष और नक्षत्र ज्योतिष दोनों एक भविष्य विज्ञान के ही अंग थे। प्राचीन समय में अंक ज्योतिष के क्षेत्र में अरब देशों में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई थी। अरब देशों में ही इस्लाम का जन्म और प्रारंभिक संस्कारीकरण हुआ है। अंक - 786 को अरबी ज्योतिष में बड़ा ही शुभकारक अंक माना गया है।
एक अरबी भाषा का शब्द है "अबजद" जिसका एक मतलब होता हैं किसी विद्या को सीखने की सब से पहली स्तिथि यानि अलिफ़, बे, ते (A.B.C.D.) क ख ग घ सीखना।
किसी भी शब्द के नंबर निकालना ये अरबी की विद्या है। अरबी भाषा में अरबी के हर अक्षर को एक गिनती दी हुई है। किसी शब्द मे जो जो अक्षर प्रयोग होते हैं उन को गिन कर जोड़ कर जो योग निकलता है वही उस शब्द के अंक होते है।
इसी हिसाब से - पवित्र कुरआन की शुरुआत एक आयत से होती है बिसमिल्लाह हिर्रहमान निर्रहीम ('बिस्मिलाह-उर रहमान-उर रहीम) जिसके अर्थ होते हैं मै अल्लाह के नाम से शुरू करता हूँ जो बेहद रहम वाला और महा कृपालु है। अगर इस पुरे वाक्य "बिस्मिलाह-उर रहमान-उर रहीम" को अरबी लिपि में (अंक (नंबर) अबजद से निकालें) लिखने पर यदि इसके सभी अक्षरों से संबंधित अंकों का योग किया जाय तो 786 की संख्या मिलती है। इसीलिए मुस्लिम्स में इसको लकी माना जाता है बहुत से लोग इसको नहीं भी मानते।
अरबी के सभी अक्षरों के नम्बर इस प्रकार हैं
इस प्रणाली में अक्षरों को अंक विशेष पद्यति से दिये जाते हैं --
अलिफ़=1, बे=2, जीम=3, दाल=4, हे=5, वाओ=6, ज़े=7, बड़ी हे=8, तूए=9, ये=10
छोटा काफ=20, लाम=30, मीम=40, नून के=50, सीन=60, ऐन=70, फे=80, स्वाद=90,
बड़े काफ=100, रे=200, शीन=300, ते=400, से=500, खे=600, जाल=700, जवाद=800, जोए=900, गैन=1000,
78692 शुभ अंक का उपयोग अनिष्ट से बचने के लिए
पिथौरा के हाफिज मौलाना जनाब असगर अली के अनुसार अंक 786 - फालनामा (वह किताब जिसमे फाल देखा जाता है।) के अनुसार बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहीम का फाल (सगुन शकुन) देखकर यह महत्वपुर्ण नंबर निकाला गया है। हर लफज का अर्थ होता है। 786 संख्या क़ुरआन (मुसलमानो का धर्म गंन्थ जो उनके मतानुसार आस्मानी किताब है जिसमे तीस पारे छोटी बडी एक सौ चौदह सूरते 6640 आयते और 540 रूकुअ है) से ली गई है क़ुरआन की आयत के आधार पर किसी भी व्यक्ति विशेष के नाम का अंक निकाला जा सकता है। इसी तरह से एक और पवित्र अंक होता है। 92 आउजो बिल्लाहे मिनिस शैतानीर्रजीम शब्द विस्तार का अद्रद होता है 92 इसे बिस्मिल्लाह से पहले पढते है। यह भी एक आयत है जिसक अर्थ होता है मै शैतानी फंदो से बचने के लिए अपने आपको अल्लाह के हवाले करता हुं। अत: 78692 शुभ अंक का उपयोग अनिष्ट से बचने के लिए किसी धर्म के लोग कर सकते है।
हिन्दू सम्प्रदाय में 786
तीन उच्च महाश्क्तियां - 7 (सात) सृष्टि के निर्माता ब्रम्हा। 8 (आठ) पालनहार विष्णु है। 6 (छ:) महेश संहारक है। ओम के तीन शब्द अ-ऊ-म अर्थात 786। तीनों लोक स्वर्गलोग, पृथ्वीलोक और पाताल लोक अर्थात 786 है। तीन काल भूतकाल, वर्तमानकाल और भविष्यकाल 786 है। अब पृथक-पृथक अंकों के हिन्दूशास्त्रों मे अर्थ निम्रानुसार है।
7 (सात)
7 सप्तश्लोकी दुर्गा के सात श्लोक। दुर्गासप्तशति के सात सौ श्लोक (गीताजी के सात सौ श्लोक)। हिन्दू पद्धति से विवाह संस्कार में सात जन्मों तक साथ निभाने के लिए अग्नि के सात फेरे। सात समुन्द्र यथा ह्दि महासागर, प्रशान्त महासागर, बंगाल की खाड़ी, अरब सागर, नील सागर, अटलांटिक सागर। सात आसमान, सात ऋषि यथा ब्रह्मा के सात मानस पुत्र-मरीची, अत्रि, पुलह, पुलस्त्य, क्रतु, अंगिरा, वशिष्ठ। सात नाड़ी चक्र। संगीत के सात स्वर यशा सा रे गा म प थ नि। सप्तग्रही एक ही राशि में सात ग्रहों का एकत्रित होना, काली, कराली, मनोजवा, सुलोहिता, सुधूम्रवर्णा, उग्र, प्रदीप्ता आदि सप्तग्रही। पृथ्वी पर उपस्थित सात विदप यथा जम्बू, कुश प्लक्ष, शाल्मलि, क्रौच, पुष्कर तथा शाक। शरीर की सात धातुएं यथा रस, रक्त, मांस वसा, अस्थि, मज्जा तथा शुक्र। सप्तकाल यथा अतल, वितल, सुतल रसातल, तलातल, महातल और पाताल। भारत में स्थित हिन्दुओं की सात पुरियां यथा काशी, कांची, उज्जयिनी, हरिद्वार, अयोध्या, मथुरा और द्वारका आदि। सात शक्तियां जिनका पूजादि शुभ कर्मो में उपयोग होता है ब्राम्ही, माहेश्वरी, कौमारी, वैष्णवी, वाराही, ऐन्द्री तथा चामुण्डा आदि। सात दिन का सप्ताह आदि।
8 (आठ)
8 देवी देवाताओं की स्तुतिवाले अष्टक स्त्रोत। चतुर्भुज ब्रह्मा के अष्टकर्ण आठ हाथ। हठयोग के अनुसार मूलाधार से ललाट तक भिन्न-भिन्न स्थानों के आठ कमल होते हैं। सर्प के आठ कुल यथा शेष, वासुकि, कम्बल, कर्कोटक पदम, महापदम, शंख तथा कुलिक। श्री कृष्ण की आठ मूर्तियां श्रीनाथ, नवनीतप्रिय, मधुरानाथ, विलनाथ, द्वारकानाथ, गोकुलनाथ, गोकुलचन्द्रमा तथा मदनमोहन (अष्टकोण)। अष्टगंध जो पूजन के कार्य में आता है। हवन में प्रयुक्त आठ प्रकार के द्रव्य यथा अश्वत्थ (पीपल), गूलर, सीकर, वट, तिल, सरसो, खीर तथा घृत। सोना, चाँदी, तांबा, रांका, जस्ता, सीसा, लोहा तथा पारा आदि अष्टधातुएं। अष्टभुजाधारी देवी। आठ प्रकार के मंगल प्रव्य यथा सिंह, हाथी, कलश, चामर, वैजन्ती, भेरी, दीपक तथा वृष। देवाधिदेव की अष्टमूर्तियां - शर्वं, भव, रूद्र, भीम, उग्र, पशुपति, ईशान, महादेव। योग क्रियाओं के आठ योग यथा यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारण, ध्यान तथा समाधि। आठ प्रकार की औषधियों का वर्ग यथा मेदा, महामेदा, ऋद्धि, वृद्धि, जीवक, ऋषभक, काकोली तथा भीरकाकोला। देवताओं और सिद्ध पुरुषों की आठ प्रकार की सिद्धियां यथा अणिमा, महिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व, वशित्व तथा कामावशायिता। अष्टाचक्र नाम के एक महाविद्वान जिन्होंने अष्टावक्रगीता की रचना की।
6 (छ)
6 ब्राम्हणों के छ: प्रकार की कर्म यथा वजन, याजन, अध्ययन, दान और प्रतिग्रह। छ: कोणों की आकृति षटकोण कहलाती है। हठयोग के अनुसार कुंडलियों के ऊपर के छ: चक्र। संगीत के छ: राग यथा भैरव, मल्हार, श्री, हिंडोला, मालकोस तथा दीपक बखेड़ा। वेद के अंगभूत छ: शास्त्र यथा शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरूक्त, ज्योतिष और छंद। कर्मकांड के अनुसार छ: प्रकार की अग्रियां यथा गार्हपत्य। आहवनीय, दक्षिणाग्रि, आपसथ्य, सम्याग्रि और औकासनाग्रि। हिन्दू शास्त्र के अनुसार मनुष्य में छ: गुण पाये जाते हैं. यथा ऐश्वर्य, ज्ञान, यश, श्री वैराग्य और धर्म। हिन्दूशास्त्रों में छ: प्रकार के दर्शनशास्त्र प्रचलित है न्याय, वैशषिक, सांख्य, वेदान्त, मीमांसा और योग। मनुष्य और प्राणीमात्र छ: प्रकार के स्वाद का आनन्द लेते हैं।
श्रीकृष्ण और 786
सच्चिदानन्दघन परब्रम्ह परमात्मा पूर्णवतार में श्रीकृष्ण ने बांसूरी के सात छिद्रों से सात स्वरों के साथ हाथों की तीन-तीन अंगुलियों से यानी छ: अंगुलियों से बांसुरी बजाकर गांवों को मुग्ध कर दिया करते रहे। (7) सात छिद्रों और सात स्वरों वाली बांसुरी को देवकी के आठवें (8) पुत्र प्रिय श्रीकृष्ण ने अपनी (6) अंगुलियों से बजाकर समस्त चराचर को मंत्रमुग्ध कर दिया था। इस तरह श्रीकृष्ण और 786 अंक का महत्व जितना मुस्लिम सम्प्रदाय में है, उतनी ही हमारे हिन्दू धर्म में भी है।
एकता का प्रतीक 786
अंक ज्योतिष के अनुसार 786 को परस्पर में जोड़ते है तो 7+8+6=21 होता है। 21 को भी परस्पर जोड़ा जाय तो 2+1=3 अंक हुआ, जो कि लगभग सभी धर्मों में अत्यंत शुभ एवं पवित्र अंक माना जाता है। तीन उच्च महाश्क्तियां ब्रह्मा, विष्णु और महेश की संख्या तीन, अल्लाह, पैगम्बर और नुमाइंदे की संख्या भी तीन तथा सारी सृष्टि के मूल में समाए प्रमुख गुण - सत् रज व तम भी तीन ही हैं। अर्थात हिन्दू धर्म एवं मुस्लिम धर्म दोनो का परस्पर मधुर मिलन लाजमी है।
इस में हिन्दू मुस्लिम्स एकता का भी एक मन्त्र छुपा है। अगर हम इसी तरह से "हरे रामा हरे कृष्णा" के निकालें तो भी निकलेंगे 786 दोनों के बिलकुल एक समान।

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