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04 मई 2013

साइकिल की दुकान चलाने वाले के पीओ बेटे ने पास की आईएएस की परीक्षा

नई दिल्ली/जोधपुर। भारत-पाकिस्‍तान और चीन में तनातनी, सीरिया पर इजरायली हमलों के बीच सिविल सर्विस परीक्षा-2012 के नतीजे शुक्रवार को घोषित कर दिए गए। केरल की हरीथा वी. कुमार टॉपर हुई हैं। यानी लगातार तीसरे साल भी महिला ने ही बाजी मारी। ऑल इंडिया मेरिट लिस्ट में दूसरे नंबर पर केरल के ही वी. श्रीराम हैं।
 
जोधपुर की बेटी स्तुति चारण को तीसरा स्थान मिला है। स्तुति ने लाचू कॉलेज से बीएससी की। तीसरे प्रयास में चयनित स्तुति के पिता रामकरणसिंह जयपुर में राजस्थान स्टेट वेयर हाउस कॉपरेरेशन में डिप्टी डायरेक्टर और मां सुमन स्कूल लेक्चरर हैं।
 
उनकी छोटी बहन नीति डॉक्टर हैं। स्तुति का तीन माह पहले ही यूको बैंक में प्रोबेशनरी ऑफिसर के पद पर चयन हो गया था। वे अभी अहमदाबाद में ट्रेनिंग कर रही हैं। केंद्रीय लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की 2010 की परीक्षा में दिव्यदर्शी अग्रवाल और 2011 में शीना अग्रवाल टॉपर रही थीं।
 
इस साल तो एक और रिकॉर्ड बना। सामान्य के अलावा एससी और एसटी वर्गो में भी महिलाएं ही अव्वल रहीं। इस बार की टॉपर हरीथा 2011 बैच की आईआरएस प्रोबेशनर हैं। वह इस वक्त नेशनल एकेडमी ऑफ कस्टम एक्साइज एंड नारकोटिक्स में ट्रेनिंग ले रहीं हैं। उन्होंने केरल युनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग में डिग्री ली है। यह कामयाबी उन्हें चौथे प्रयास में मिली।
 
बिहार में सुपौल के सुब्रत कुमार सेन ने 93वां स्थान हासिल किया है। सुब्रत के पिता सुपौल के सिंगराही में साइकिल की दुकान चलाते हैं। दिल्ली के भीमराव आंबेडकर कॉलेज से स्नातक करने के बाद सुब्रत फिलहाल मध्यप्रदेश में बैंक ऑफ इंडिया में पीओ हैं।
 
एमबीए होकर भी स्तुति ने चुने एग्रीकल्चर व बॉटनी सब्जेक्ट
 
आईएएस परीक्षा में तीसरी रैंक हासिल करने वाली जोधपुर की स्तुति चारण (बारहठ) ने प्री एग्जाम से लेकर मुख्य परीक्षा तक खुद ही तैयारी की। स्तुति ने बॉटनी, जूलॉजी व बायोटेक में बीएससी किया। वे एचआर और मार्केटिंग में एमबीए (आईआईपीएम दिल्ली से) भी हैं।
 
खास बात यह रही कि स्तुति ने आईएएस परीक्षा में बॉटनी के साथ एग्रीकल्चर विषय चुना। आमतौर पर आईएएस परीक्षा में टॉप रैंक पर इंजीनियरिंग या आर्ट्स विषय के अभ्यर्थी रहते हैं, लेकिन स्तुति गैर परंपरागत विषयों के साथ टॉप थ्री में जगह बनाने में सफल रहीं।
 
 
स्तुति अभी भी अहमदाबाद में हैं। अपनी सफलता के बारे में भास्कर के साथ बातचीत में उन्होंने बताया कि उनके मन में हमेशा ऐसे विषयों के साथ आईएएस परीक्षा में सफलता हासिल करने की इच्छा थी, जो बहुत कम लोग चुनते हैं। एग्रीकल्चर विषय चुनने के पीछे उनकी भावना यह थी कि हमारे देश में आधी आबादी का जीवन इसी से चलता है, जबकि जीडीपी में योगदान महज 3.3 प्रतिशत है। वे इस क्षेत्र में कुछ करना चाहती हैं। स्तुति का कहना है कि सफलता इस बात पर निर्भर नहीं करती कि विषय क्या है, सफलता तब मिलती है जब हम उस विषय को गंभीरता से लेते हैं।
इसलिए गैर परंपरागत विषयों के साथ भी उन्हें कोई परेशानी नहीं हुई।
 
कविताएं भी करती हैं स्तुति
 
पढ़ने के अलावा उनका शौक कविताएं लिखना भी है। स्तुति अपने पिता    को अपना आदर्श मानती हैं। वे अपनी सफलता का श्रेय पिता के अलावा मां व बहन को देती हैं।

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