रामगढ़ की पहाड़ी पर प्राचीन मंदिर और भित्तिचित्र मिलते हैं। इस स्थान पर प्राचीन भारतीय संस्कृति का परिचय मिलता है।
यहां स्थित कंदराओं में भगवान श्रीराम के चरण पड़े थे और सीता माता ने
निवास किया था। कहा जाता है कि महाकवि कालिदास ने यहीं मेघदूत की रचना की
थी। यहीं सुतनुका देवदासी और रुपदक्ष श्रेष्ठि देवदीन का प्रेम हुआ था।

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