आपका-अख्तर खान

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02 दिसंबर 2011

हकीक़त यही है

सोचता हूँ
आज फिर नई सुबह के साथ
मुझे नई
जिंदगी मिल गयी है
लेकिन
हकीक़त यही है
के यह जिंदगी
बेमानी है तेरे बगेर ॥ अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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