पहला बहाना दिसंबर 2010 से अरब देशों में संकट शुरू हुआ था तो तेल कंपनियों ने जनवरी 2011 में पेट्रोल 3 रुपए महंगा कर दिया। लेकिन जब यह संकट खत्म हुआ यानी 3 महीने बाद तो कीमतों में कोई कमी नहीं की। बहाना बनाया हमारा घाटा आज भी बहुत है।
दूसरा बहाना अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ गए हैं। तत्काल कीमतें बढ़ाना जरूरी हैं। 5 राज्यों में चुनाव की वजह से मामला टलता रहा था। परिणाम आते ही 15 मई को 5 रुपए कीमत बढ़ा दी गई। अगस्त के पहले सप्ताह में कच्चे तेल के दामों में गिरावट आई।
बावजूद इसके पेट्रोल सस्ता नहीं हुआ। तीसरा बहाना सितंबर में तेल कंपनियों ने डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होने का बहाना बताया। यानी विदेशों से कच्चा तेल खरीदना (आयात) महंगा होगा। इसलिए पेट्रोल महंगा करना पड़ रहा है। और इस बार अक्टूबर में एक बार फिर तेल कंपनियों ने डॉलर के मुकाबले रुपए की कमजोरी को बहाना बनाया है और अपने घाटे को जनता की जेब से वसूलने की तैयारी कर रही है।
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