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30 नवंबर 2011

किसी को मिर्गी में जूते क्यों सुंघाते हैं?



कुछ बीमारियां ऐसी हैं जिन्हें पुराने समय में ऊपरी बाधा या भूत या हवा का प्रकोप समझा जाता था। जबकि यह अंधविश्वास का ही एक रूप है। ऐसी बीमारियों में से एक है मिर्गी का दौरा आना।

मिर्गी का दौरा एक ऐसी बीमारी है जिसमें रोगी का मस्तिष्क नियंत्रण से लगभग बाहर हो जाता है, उसे कुछ होश नहीं रहता, मुंह से सफेद झाग निकलने लगते हैं। जब यह दौरा आता है तो व्यक्ति का दिमाग संतुलन से बाहर हो जाता है जिससे शरीर लडख़ड़ाने लगता है। हाथ-पैर झटके खाने लगते हैं, रोगी गिर जाता है, बेहोश हो जाता है।

पुराने समय में जब किसी को मिर्गी का दौरा आता था तो उसे जूते सुंघाते थे। तब ऐसा माना जाता था कि यह किसी हवा का प्रकोप है और चमड़े के जूते और पसीने की बदबू से व्यक्ति ऊपरी बाधा के चंगुल से आजाद हो जाता है। इसी सोच की वजह से प्रभावित व्यक्ति को जूते सुंघाए जाते थे। इसे एक टोटके की भांति समझा जाता था। आज भी कई बुजूर्ग ऐसा ही मानते हैं।

आज के युग में मिर्गी के संबंध ऐसा माना जाता है कि यह एक बीमारी है और इसका इलाज दवाइयों से किया जा सकता है। इसके लिए मरीज को जूते नहीं सुंघाना चाहिए। मिर्गी को अपस्मार के नाम से जाना जाता है। स्वास्थ्य संबंधी लापरवाही के चलते यह बीमारी होने की पूरी संभावनाएं रहती हैं।

जब भी किसी को मिर्गी का दौरा आए तो रोगी को जूता नहीं सुंघाएं इससे संक्रमण फैल सकता है। ऐसी परिस्थिति में रोगी को किसी साफ एवं स्वस्थ स्थान पर लेटा देना चाहिए। सिर के नीचे तकिया लगाएं, रोगी के कपड़े ढीले कर दें। यदि मरीज के मुंह से झाग निकल रहे हैं तो उसे साफ करें। सामान्यत: यह दौरा कुछ समय पर स्वत: ठीक हो जाता है लेकिन इसका उचित उपचार किया जाना चाहिए।

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