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27 अक्टूबर 2011

दुनिया के लिए बना ऐसा राज जिसे जानना चाहता है हर कोई

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नई दिल्ली। दिल्ली मेट्रो के दरवाजे सिर्फ यात्रियों के लिए ही नहीं खुले हैं। अब इसकी कामयाबी का राज जानने के लिए पूरी दुनिया से प्रबंध स्नातक, इंजीनियर और अफसर यहां आने लगे हैं। वे मेट्रो प्रशासन से बेहतर प्रबंधन के गुर जानना चाहते हैं।


करीब-करीब पूरे साल ही दिल्ली मेट्रो को देखने और जानने के लिए हाईप्रोफाइल लोग और बड़े कॉरपोरेट घरानों से ताल्लुक रखने वाले आते रहते हैं। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले ये लोग प्रमुख रूप से नई तकनीक की मदद से बेहतर ट्रांसपोर्ट सिस्टम बनाने और इसक काम करने के तरीकों को जानना चाहते हैं। विदेश से आने वाले प्रबंध स्नातक छात्र मेट्रो अफसरों से आमतौर पर पूछते हैं कि कौन से तरीकों से निर्धारित समय में प्रोजेक्ट को पूरा किया जाता है और वह भी निर्धारित बजट के अंदर।


अमेरिका की यूनिवर्सिटी येल, स्टैंडफोर्ड, वॉरटोन, पेनसिलवेनिया आदि से प्रबंध स्नातक के छात्रों को प्रबंधन के गुण सीखने के लिए भेजा जाता है। विदेशी स्नातक प्रमुख रूप से अंडरग्राउंड और ओवरग्राउंड स्टेशनों की व्यवस्था और साफ-सफाई के तरीकों को जानना चाहते हैं। मेट्रो के अफसर प्रबंध स्नातकों को एक या दो दिन में पूरी मेट्रो प्रणाली से रूबरू करा देते हैं। इसमें उनको स्टेशनों पर ले जाकर दिखाया जाता है कैसे उनका निर्माण किया गया है और क्या-क्या सुविधाएं यात्रियों को मुहैया कराई जाती हैं।


बाद में विदेशी मेहमानों को मेट्रो के आला अधिकारियों से भी मिलवाया जाता है, जहां पर ये लोग मेट्रो अधिकारियों से सवाल-जवाब भी करते हैं। मेट्रो को जानने के लिए डॉक्टर, राजनीतिक और अन्य क्षेत्रों लोग आते हैं। बीस लाख यात्रियों को प्रतिदिन मंजिल तक पहुंचाने वाली मेट्रो को जानने के लिए लाल बहादुर शास्त्री नेशनल एकेडमी ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन मंसूरी से भी हर साल लोग आते हैं। ये लोग बचाव व आपदा प्रबंधन और आपदा के दौरान दूसरे एहतियाती कदमों के बारे में मेट्रो अफसरों से जानकारी लेते हैं।


दिल्ली आने वाले विदेशी संपादक और पत्रकार अपने काम के अलावा दिल्ली मेट्रो में घूमना भी नहीं भूलते हैं। विदेश मंत्रालय से मेट्रो प्रबंधन को लगातार विदेशी मेहमानों को मेट्रो की सैर कराने और प्रबंधन के गुण सिखाने के लिए पत्र भी आते रहते हैं। हाल ही में चीन और नेपाल की हस्तियों ने मेट्रो का जायजा लिया था।

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