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27 अक्टूबर 2011

लीबिया में मिला ऐटमी और रासायनिक हथियारों का जखीरा, भगोड़े सैफ ने मांगा विमान

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त्रिपोली. लीबिया में गद्दाफी का राज तो खत्म हो गया है लेकिन उसके दौर के खतरनाक हथियार अब भी मौजूद हैं। लीबिया में सरकार चला रही नेशनल ट्रांजिशनल काउंसिल (एनटीसी) ने बुधवार को बड़ी मात्रा में गद्दाफी युग के खतरनाक रासायनिक और ऐटमी हथियार मिलने की घोषणा की। एनटीसी ने इन हथियारों को अपने कब्जे में ले लिया है।

एनटीसी से जुड़े एक अधिकारी ने इस संबंध में कहा, हथियार गद्दाफी युग के हैं और उन्हें यूएन को सौंपे जाने तक एनटीसी उनकी सुरक्षा कर रही है। गौरतलब है कि लीबिया के परमाणु, रसायनिक और अन्य हथियारों को विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय संगठन अपने कब्जे में लेने के प्रयास कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र इन प्रयासों में मदद कर रहा है। लीबिया में काम कर रहे संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष अधिकारी इयान मार्टिन ने कहा, गद्दाफी ने लीबिया की दौलत को अपार हथियार और गोला बारूद जुटाने में खर्च किया। इससे लीबिया तो बर्बाद हुआ लेकिन चंद हथियार बेचने वालों को फायदा पहुंचा। मार्टिन ने यह भी कहा कि मौजूदा हालात में ज्यादातर हथियार एनटीसी के कब्जे में हैं लेकिन इनकी केंद्रीकृत कमांड और कंट्रोल अभी भी चिंता का विषय है। यह भी स्पष्ट हो रहा है कि लीबिया सरकार के पहले से घोषित हथियारों के ठिकानों के अतिरिक्त और भी ठिकाने सामने आएंगे। सरकार इनकी जल्द घोषणा कर देगी। हथियार निर्माण न करने वाले देशों में कंधे पर रखकर छोड़े जाने वाली एंटी एयरक्रॉफ्ट मिसाइल का सबसे बड़ा भंडार लीबिया ने ही जमा किया था। नाटो के मिशन में ऐसी हजारों मिसाइलों को नष्ट कर दिया गया। मार्टिन का कहना है कि सबसे बड़ी चिंता इस बात की है कि कहीं यह हथियार अब आम लोगों में न फैल जाएं।

गौरतलब है कि लीबिया के तानाशाह रहे मुअम्मर गद्दाफी को पिछले हफ्ते विद्रोहियों ने मौत के घाट उतार दिया था। उनका बेटा मुतस्सिम गद्दाफी भी मारा गया था। लेकिन गद्दाफी का बड़ा बेटा सैफ अल इस्लाम अब भी फरार है। ऐसी खबरें आ रही हैं कि सैफ खुद को अंतर्राष्ट्रीय युद्ध अपराध कोर्ट के समझ पेश करना चाहता है। गुरुवार को एनटीसी के अधिकारियों ने कहा कि लीबिया के पूर्वी रेगिस्तान में छुपा सैफ अल इस्लाम हैग इंटरेनशल वार क्राइम कोर्ट के समक्ष पेश होना चाहता है। इसके लिए उसनी किसी तीसरे मुल्क, संभवतः ट्यूनिशिया या अल्जीरिया, के हस्तक्षेप और एक विमान की मांग की है।

गौरतलब है कि जिस वक्त गद्दाफी विद्रोहियों के हाथों मारे गए उसी दौरान सैफ अल इस्लाम रेगिस्तान में जाकर छिप गया। वो सैटेलाइट फोन के जरिए लगातार अपने पिता के साथ संपर्क में था। सैफ के पूर्व खुफिया सचिव अब्दुल्लाह अल सनूसी ने समाचार एजेंसियों को बताया है कि सैफ आत्मसमर्पण करना चाहता है।

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