आतंक और नक्सलियों के खिलाफ तो हम भी लड़ रहे हैं। लेकिन ढुलमुल नीतियों और कमजोर राजनीतिक इच्छाशक्ति के कारण हम आतंकियों और उग्रवादियों को उनके अंजाम तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं।
पिछले दस सालों में गाजा पट्टी और पश्चिमी किनारे पर हुई लड़ाई में इजरायल के सिर्फ २५२ सैनिक मारे गए हैं। वहीं हमने नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई में 2010 में 285 सैनिक गंवा दिए। नक्सली सिर्फ 171 मारे गए।
हजार फलस्तीनियों से ज्यादा कीमती एक इजरायली सैनिक
इजरायल ने अपने अगवा सैनिक के बदले 1027 फलस्तीनी कैदियों को रिहा करने का फैसला किया है। इजराइल के राष्ट्रपति ने फलस्तीनी कैदियों को औपचारिक रूप से माफ करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इन्हें एक इजराइली सैनिक साजेर्ंट गिलाड शालित के बदले रिहा किया जा रहा है। शालित को पांच साल पहले गाजा में आतंकवादियों ने अगवा कर लिया था।
बेकाबू होती नक्सली हिंसा
वर्ष शहीद सैनिक ढेर नक्सली
2005 153 225
2006 157 274
2007 236 141
2008 221 214
2009 317 217
2010 284 171
2011 84 162
इजरायली सेना क्या है?
आईडीएफ का स्वरूप है।
नागरिकों के लिए सेना देश की पहचान।
यहूदी समाज के लिए सेना वर्दी एक राष्ट्र की ही तरह है।
सैनिक के पकड़े जाने पर ऐसा राजनीतिक दबाव अन्य देश में संभव नहीं।
सैनिकों के मामले में इजरायल बड़ी से बड़ी कीमत चुकाने के लिए तैयार रहता है।
इजरायल ने झेला कम नुकसान
2000 19
2001 22
2002 101
2003 39
2004 37
2005 8
2006 4
2007 6
2008 7
2009 6
2010 3
निर्णय पर उठे सवाल
इस निणर्य से इजरायल की कमजोरी और ताकत दोनों सामने आई है:
ताकत: सेना और उनके परिवारवालों को संदेश है कि सैनिक की रिहाई के लिए हर संभव कोशिश होगी।
कमजोरी: भविष्य में किसी भी अपहरणकर्ता को यह संदेश मिला है कि इलरायली सैनिक को पकड़ के वे मन चाही कीमत अपना सकते हैं।

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