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08 सितंबर 2011

लोकसभा में 104 घंटे तीन मिनट हुआ काम, 51 घंटे 6 मिनट चढ़े हंगामे की भेंट


नई दिल्ली.मानसून सत्न के दौरान कई दिन प्रश्नकाल भी नहीं चलने से खिन्न लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने गुरुवार को उम्मीद जताई कि सदन भविष्य में ऐसा नहीं होने देगा।

कुमार ने सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा करने से पूर्व कहा कि सत्न के दौरान 500 प्रश्न मौखिक रूप से पूछे जाने के लिए सूचीबद्ध थे जिनमें से 51 प्रश्नों का ही जवाब हो पाया। उन्होंने कहा कि इस तरह प्रतिदिन औसतन 1.96 प्रश्नों को ही लिया जा सका।

कुमार ने उम्मीद जताई कि भविष्य में सदन प्रश्नकाल बाधित या स्थगित नहीं होने देगा क्योंकि इसकी भरपाई नही हो सकती।

उन्होंने बताया कि मानसून सत्न के दोरान 5749 अतारांकित प्रश्नों के लिखित जवाब सदन के पटल पर रखे गए। एक अगस्त को शुरू हुए सत्न के दौरान सदन की 26 बैठके हुईं और 104 घंटे तीन मिनट कामकाज हुआ जबकि शोर-शराबे के कारण व्यवधान और स्थगन की वजह से 51 घंटे 6 मिनट बेकार हुए।

अन्ना प्रकरण और गुजरात के लोकायुक्त मामले से प्रभावित रहा लोकसभा का मानसून सत्न गुरुवार को संपन्न हो गया जिसमें लोकपाल और भूमि अधिग्रहण जैसे बहुप्रतीक्षित एवं महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए गए।

इस सत्न में सदन की 26 बैठकें हुईं जिनमें 104 घंटे तीन मिनट कामकाज हुआ लेकिन 51 घंटे छह मिनट हंगामे की भेंट चढ़ गए। यद्यपि 18 घंटे 25 मिनट अतिरिक्त समय भी काम किया गया।
एक अगस्त से शुर शुरू हुए इस सत्न में 11 विधेयक पेश किए गए तथा 14 पारित किए गए।

पेश किए गए विधेयकों में भ्रष्टाचार नियंत्नित करने के उद्देश्य से लाया गया लोकपाल विधेयक तथा किसानों और अन्य भू-स्वामियों को भूमि का उचित मुआवजा दिलाने के मकसद से लाया गया भूमि अधिग्रहण एवं पुनर्वास विधेयक शामिल है।

पारित किए गए विधेयकों में मानव अंग प्रत्यारोपण संशोधन विधेयक (2009),भारतीय चिकित्सा परिषद संशोधन विधेयक(2011) तथा राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान संशोधन विधेयक 2010 शामिल है।

समाजसेवी अन्ना हजारे के अनशन का मामला सदन में 16 अगस्त को उनकी गिरफ्तारी के दिन से ही गूंजता रहा और अनशन समाप्त करने के लिए लोकपाल विधेयक से संबंधित उनकी तीन मांगों पर विशेष चर्चा की गयी और उनसे सहमति जताई।

गुजरात में लोकायुक्त की नियुक्ति के मामले को भारतीय जनता पार्टी नीत राष्ट्रीय जनतांत्निक गठबंधन ने जोर शोर से उठाया और इसके कारण पिछले चार-पांच दिन सदन की कार्यवाही बाधित रही।

सदन ने महंगाई के मुद्दे पर नियम 184 के तहत चर्चा की इसके अलावा लोकपाल के मुद्दे पर प्रधानमंत्नी के वक्तव्य तथा भ्रष्टाचार से उत्पन्न स्थिति तथा कुछ अन्य मुद्दों पर नियम 193 के तहत संक्षिप्त चर्चा हुई

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