आपका-अख्तर खान

हमें चाहने वाले मित्र

13 अप्रैल 2011

मेरे जनाज़े को कितना प्यार मिला है .........

जिंदगी गुज़र गयी 
लेकिन 
कोई भी 
मेरे पास 
दो मिनट रूककर ना बेठा ................
देखो 
आज सभी 
मेरे पास 
बेठे जा रहे हैं ............
जिंदगी भर 
कोई तोहफा न मिला 
मुझे जिनसे 
आज वाही लोग देखो 
मुझे फूल 
दिए जा रहे हैं ................
तरस गये थे हम 
जिनके हाथ से 
दिए एक कपड़े के 
रुमाल को 
आज देखो 
वही मुझे 
नये कपड़े उढ़ा रहे हैं ..............
कल कोई दो कदम 
साथ ना चलने को 
तय्यार नहीं था 
आज देखो 
मेरे पीछे 
वही 
काफिला बनाकर आ रहे हैं .............
आज पता चला 
के 
मोत कितनी हसीं होती है 
हम तो पागल थे 
उनके प्यार में 
बस यूँ ही 
जिए जा रहे थे ...........
मरने के बाद 
मेरे जनाज़े को 
इतना प्यार मिला है 
बस यही सोचकर 
कभी हम रोते थे 
तो कभी 
मुकुराए जा रहे थे .................. 
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान 

6 टिप्‍पणियां:

  1. मोत कितनी हसीं होती है
    हम तो पागल थे
    उनके प्यार में
    बस यूँ ही
    जिए जा रहे थे ...........

    सुन्दर प्रस्तुति धन्यवाद |

    एक अच्छी कविता के लिए मेरे ब्लॉग पे आप आमंत्रित हैं |
    www.akahsingh307.blogspot.com

    जवाब देंहटाएं
  2. मोत कितनी हसीं होती है
    हम तो पागल थे
    achhi lagi rachna ,badhai

    जवाब देंहटाएं
  3. जब तक जिंदा रहते हैं तब तक कोई कद्र नहीं मरने के बाद ही अच्छाईयां दिखाई देती हैं ...

    जवाब देंहटाएं
  4. बहुत खूब !! अख्तर भाई...बहुत खूब ...

    साँसों की कैद से आज़ाद तो होना है,
    कुछ पाना है मेरा और तुम्हारा खोना है!
    मौत तो सिर्फ इक नाम है हसरत,
    जागना है रूह का और जिस्म का सोना है!!
    तुम्हारी खुशियाँ तुम्हे मुबारक दोस्तों, जहां
    में लाख दर्द हैं dhone को जिन्द्दगी फक्त रोना है!
    ये तो किस्से है किताबों के निखालिश
    की वो काटना है हमने जो बोना है !
    साँसों की कैद............................

    जवाब देंहटाएं
  5. अख्तर जी आज तो निशब्द कर दिया……………सच्चाई को बडी बेबाकी से बयाँ कर दिया

    जवाब देंहटाएं

दोस्तों, कुछ गिले-शिकवे और कुछ सुझाव भी देते जाओ. जनाब! मेरा यह ब्लॉग आप सभी भाईयों का अपना ब्लॉग है. इसमें आपका स्वागत है. इसकी गलतियों (दोषों व कमियों) को सुधारने के लिए मेहरबानी करके मुझे सुझाव दें. मैं आपका आभारी रहूँगा. अख्तर खान "अकेला" कोटा(राजस्थान)

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...