आपका-अख्तर खान

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23 जनवरी 2011

ऐ शमा में भी तुझ सा हूँ

ऐ शमा
में जनता हूँ
यूँ जलने के
बाद
रात भर
जलते रहने की
ज़िम्मेदारी से
तू उदास हे
लेकिन
मुझे तो देख
मुझे भी तो
साथ तेरे
यूँ ही
अपने गमों में
तडपते हुए
रात गुजारना हे ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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