आपका-अख्तर खान

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23 जनवरी 2011

काँटों से घिरे हे फूल


अकेलेपन में
अपनी
फूटी किस्मत मानकर
यूँ रोने वाले
उठ जरा
बाग़ में चल
खिलते हुए
फूलों को देख
चारों तरफ
काँटों से
घिरकर भी
केसे मुस्कुरा
रहे हें ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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