आपका-अख्तर खान

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29 जनवरी 2011

फर्क तुझ में और मुझ में

तुझ में
और मुझ में
फर्क
बहुत
बढा हे ,
मुद्दतों
मेने तुम्हें
चाह हे
फिर भी
तुम मेरी
ना हो सकीं
एक में हूँ
तुमने
एक नजर
उठा कर
देखी
और में
हमेशां के लियें
तुम्हारा
हो गया ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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