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07 August 2010

में आराम ही तो कर रहा हूँ


दिन रात अपनी नींदें हराम कर
अरबों रूपये कमाने वाले एक सेठ जी
अपनी लाखों की गाडी में
जंगल से गुजर रहे थे
बीच जंगल में एक ठंडी चट्टान पर
लेटे एक अधेड़ को देख
सेठ जी रुक गये
नोजवान को यूँ चट्टान पर आराम कर
ठंडी हवा खाते देख
सेठ जी बोल पढ़े
ऐ नोजवान तुम फालतू क्यूँ लेटे हो
कुच्छ काम क्यूँ नहीं करते
उठो चलो काम धंधा करो
मेरी तरह दिन रात एक करो
नोजवान बोला सेठ जी काम करने से क्या होगा
सेठ जी ने कहा मेहनत करोगे तो रूपये कमाओगे
नोजवान ने कहा फिर क्या होगा
सेठ जी बोले मेरी तरह बनेगा
गाड़ियों में घूमेगा मजे करेगा
मुझे देख मेंने कई साल अपनी जिंदिगी के बिगाड़ेंगे
कई वर्षों तक आराम हराम किया हे
तब जाकर इस मुकाम पर पहुंचा हूँ
नो जवान ने फिर कहा के किस मुकाम पर पहुंचे हो
सेठ जी ने कहा बेवकूफ देख आज में आराम कर रहा हूँ
नोजवान ने सेठ जी को देखा मुस्कुराया
उसने सेठ जी से सवाल किया
बोला सेठ जी बताओ बेवकूफ कोन
वर्षों अपनी दिन रात की नींद खराब कर
आराम की तलाश में भटकने वाला
करोड़ों खर्च थोड़ा आराम करने वाला
या फिर बिना कुछ करे
सुकून से बेठ कर आराम करने वाला
सेठ जी ने कहा बेवकूफ में समझा नहीं
मुझे थोड़ा ठीक से समझाओ
नोजवान बोला सेठ जी आपने जितना कुछ
आराम करने के लियें किया हे
उसके बाद भी आप आराम के लियें भटक रहे हें
और देखो एक में हूँ जो बिना कुछ करे
बीच जगल की ठंडी हवाओं में
ठंडी इस चट्टान पर आराम कर रहा हूँ
नोजवान बोला सेठ जी
आराम की बात हे और आराम हर किसी के नसीब में नहीं होता
आप करोड़ पति अरब पति होंगे
लेकिन देखो अआरम के लियें तरस रहे हो
एक में हूँ जो आराम से लेटा हूँ आराम कर रहा हूँ
बताओ कोन बेवकूफ हे और कोन आराम से हे
सेठजी ने शुगर,ब्लडप्रेशर की गोलिया लीं
और नोजवान की बात सुन
पाँव ज़मीं पर पटकते चले गये
बताओं सेठ और नोजवान में से कोन आराम से हे।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

कोटा में पुलिस की लाख सख्ती के बाद भी लगातार गोलीबारी

देश भर में उद्ध्योग,शिक्षा,अपराध में महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले कोटा जिले में पुलिस की लाख सख्ती के बाद भी आये दिन लुट,मारपीट गोलीबारी की घटनाओं से शहर दुखी हे कोटा पुलिस अपराध नियन्त्रण मामले में उससे जो भी बन पढ़ रहा हे वोह सभी सख्त कार्यवाहियां.नाकेब्न्दियाँ,अपराध पूर्व निरिक्षण और अपराधियों को पूर्व निगरानी में रख कर उनके विरुद्ध अग्रिम कार्यवाही करने में भी पुलिस पीछे नही हे लेकिन इन सब के बाद भी कोटा में नियमित प्रतिदिन फायरिंग,लुट,ठगी,बलात्कार,अंधी गुत्थी वाली हत्याएं, चेन स्नेचिंग की घटनाएँ आम बात हे , कोटा पुलिस अब आर्म्स एक्ट का टास्क अभियान यानी आर्गेट अभियान चला रही हे , कोटा के इन अपराधों से अब तो जनता दुखी हो चली हे जानकारों का कहना हे के कोटा में जब भी पुलिस की निगरानी टार्गेट मुकदमों पर रही हे और टास्क चला कर कार्यवाही हुई हे तब तब पुलिस अपराध नियन्त्रण में नाकाम रही हे होता यह हे के पुलिस नामजद आरोपियों को निगरानी में रखती हे और दुसरे नये कुकुर मुत्ते अपराधियों से वोह गाफिल हो जाते हें नतीजा यह होता हे के नये लोग अपराध कर निकल जाते हें ओ पुलिस लकीर पिट्टी रहती हे जानकारों का कहना हे के कोटा में पुलिस पुराने अपराधियों को घर से उठा कर उन्हें पाबन्द करवाने या मुकदमों एन फंसा कर जेल भेजने की मशक्कत से बाज़ आ जाए तो उनका पूरा ह्यां अपने इलाके की बीट प्रणाली पर होगा और नतीजा बाहर से आने जाने वाले छोटे ओते या फिर नये अपराधियों के बारे में पुलिस को अपराध पूर्व जानकारी मिलने में आसानी रहेगी क्यूंकि कोटा में इन दिनों मुखबिर सिस्टम गडबडा गया हे टार्गेट के नाम पर एक दुसरे के मुखबिरों को ही गिरफ्तार किया जा रहा हे नतीजन मुखबिर भी अब पुलिस से नाराज़ होर सूचनाएं पुलिस अधिकारियों को देने से कतरा रहे हें और अपराध निरंतर बढ़ रहे हें इसीलियें लोगों का कहना हे के पुलिस या तो कोटा में बढ़ रहे अपराध और नियन्त्रण प्रणाली मामले में सर्वे करा कर रिसर्च करवाए और फिर इस रिपोर्ट के आधार पर कार्यवाही करे तब कहीं जाकर यह मामला शांत हो सकेगा। अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

ऐ दोस्त दुश्मन

ऐ दुश्मन
कल तक तू था दोस्त
तो मुझे
हर लम्हा
जन्नत लगता था
ऐ दोस्त
आज बन गया हे
तू दुश्मन मेरा
तो भी देख मुझे
हर लम्हा
जन्नत लगता हे ,
तुने कहा था
काँप उठेगी दुश्मनी
दोस्ती जब फरेब देगी
लेकिन देख ले तू भी
तेरी दुश्मनी को
तेरी दोस्ती से भी बहतर
लुत्फ़ ले ले कर
जिए जा रहा हूँ में ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

कोटा मेले दशेरे में इस बार राहत इन्दोरी का इन्तिज़ार

कोटा मेले धेरे में इस बार कोंग्रेस महापोर के नेत्रत्व में पहली बार मेला भराया जा रहा हे ओता में पिछले १५ वर्षों से भाजपा का नगर निगम बोर्ड होने से मेले दशहरे में भाजपा का बोलबाला था और कवि सम्मेलन में भी भाजपा के प्रचारक कवियों का ही बोलबाला था यकीन मानिये मुशायरे में १५ वर्षों में कोटा में घांस काटी गयी हे और उबाऊ मुशायरे में कवियों को शायर बना कर गजलें पढवाई गयी हें , यहाँ मेल द्शेहरे में प्रसिद्ध फनकार गजलकार शायर डोक्टर राहत इन्दोरी ने देश के हालातों पर राजनीति मामले में भाजपा के रोल की पोल खोलते हुए जब एक गजल पढ़ी तो भाजपाई बोखला गये और उन्होंने राहत इन्दोरी शायर को ब्लेक लिस्टेड घोषित कर कोटा मेले में मुशायरे में बुलवाना बंद कर दिया , लेकिन अब कोटा निगम बोर पर कोंग्रेस का कब्जा हे सरकार कोंग्रेस की हे और महापोर कोंग्रेस की हें तो अब लोगों की मांग उठने लगी हे के मेले में मुशायरे को दर्जा देने के लियें कमसे कम शायर राहत इन्दोरी को इस बार जरुर बुलवाया जाना चाहिए इस मामले में मेने कोटा के रहने वाले गृह मंत्री शान्तिकुमार धारीवाल को भी लिखा हे जबकि महापोर रत्ना जी जेन से भी सिफारिश की हे कोटा मेले द्शेहरे के आयोजन की बैठक में भी इस बात को उठाया गया हे अब देखना यह हे के कोटा मुशायरों के हीरो कहे जाने वाले राहत इन्दोरी को कोटा कोंग्रेस बुलाती हे या नहीं लेकिन कोटा की जनता ओ इनका बेसब्री से इन्तिज़ार हे। अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

कोटा प्रेस क्लब भवन का सपना पूरा हुआ

कोटा प्रेस क्लब का अपना भवन तो बन गया था लेकिन होल बहुत छोटा था जो अब मीटिंग के लियें बन कर तय्यार हे कोटा में १९७० में जननायक के संस्थापाक भंवर शर्मा अटल , मुनीश जोशी और पुर केन्द्रीय मंत्री भुवनेश जी चतुर्वेदी ने प्रेस कल्प कोटा का गठन किया था जिसके भवन के लियें नगर विकास न्यास कोटा से इन लोगों ने भूमि का आवंटन करवा लिया लेकिन अपरिहार्य कारणों से काफी लम्बे वक्त तक प्रेस क्लब कागज़ी क्लब बन कर रह गया फिर हाल के जननायक के मालिक और पत्रकार प्रद्युम्न शर्मा के हाथों प्रेस क्लब की कमान सोंपी गयी जिन्होंने लोगों और सदस्यों को तय्यार कर प्रेस क्लब की भूमि की रजिस्ट्री क्लब के नाम करवाकर मालिकाना हक प्राप्त किया और जन सहयोग तथा नेताओं के सहयोग से प्रेस क्लब का भवन केनाल रोड प्रेस क्लब गुमानपुरा कोटा में तय्यार करवाया , एक प्रेस वार्ताए मीट द प्रेस के कार्यक्रम होते रहे यहाँ प्रेस क्लब के लोकतान्त्रिक तरीके कई चुनाव हुए उसमें लगातार प्रद्युम्न शर्मा जीतते रहे और काम करते रहे अब प्रद्युम्न शर्मा ने उने खिलाड़ी धीरज गुप्ता को अध्यक्ष और हरी मोहन शर्मा को महासचिव बनाया हे इस टीम ने फिर नये सिरे से काम शुरू किया और वसुंधरा सिंधिया, भवानी सिंह राजावत,नगर विकास न्यास नगर निगम ललित चतुर्वेदी सांसद कोष से मदद से अब नया होल बनकर तय्यार हे कोटा प्रेस क्लब के निर्माण में प्रद्युम्न शर्मा , धीरज तेज हरिमोहन शर्मा और साथियों की जो भूमिका रही हे उसमें के एल जेन भी महत्वपूर्ण हें अब प्रेस क्लब भवन नया बनने पर सभी साथियों को बधाई । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

06 August 2010

देश के फतवे बाजों को जेल भेजने का कानून बने

दोस्तों आज देश में मुसलमान और देश फ्त्वेबाज़ मोलानाओं के फतवों से परेशान हे देश में हर कभी फतवे देकर अपना वुजूद साबित करने का प्रयास करने वाले फ्तेबाज़ कभी भी किसी भी मुद्दे पर अपनी धार्मिक राय प्रकट करते हें और वोह हास्यास्पद होती हे, सब जानते हें और पुरे देश नें इन फ्त्वेबाज़ों में से कुछ को टी वी पर खुलेआम रिश्वत लेकर मन मर्जी के धार्मिक फतवे देते देखा हे जब मोलाना मजहब को खेल बना लें पेट कमाने और एश इशरत के साधन खरीदने का जरिया बना लें तो फिर देश की स्थिति क्या होगी इस्लाम का पहला हुक्म हे काम करना लेकिन बिना काम करे धर्म के नाम पर जो पेट पाले क्या वोह हराम की कमाई नहीं हे और जो सिर्फ और सिर्फ धर्म को ही रोज़गा बना कर बेठे हें उन अधर्मियों को धर्म की बात करने का क्या हक हे फ्त्वेबाज़ पहले खुद गिरेबान एन झांके वोह देखें के क्या वोह तकवे पर हल रहे हें खुद सोचें या फिर किसी तीसरे से खुद के आचरण के बारे में राय लें तब पता चलेगा के धर्म की आड़ में पेट पालने वाले इन लोगों के बारे में कुरान की रौशनी में आम मुसलमान किया समझता हे ।
फतवा देने से बहना चाहिए फतवा शर पैदा करता हे सब जानते हें और फिर फतवा कोण देगा क्या फतवा देने वालों की डिग्री की किसी ने जांच की हे उनकी देनिक जिंदगी इस्लाम के कानून के तहत तकवे पर चल रही हे अगर नहीं तो फिर उन्हें पहले खुद और खुद के लोगों को संभालना चाहिए तब कहीं उन्हें फतवों की राजनीति में पढना चाहिए , धर्म का खिलवाड़ और धर्म के नाम पर ब्लेकमेल करने वाले इन फतवे बाजों की नाक में नकेल डलना जरूरी हे अव्वल तो सभी फ्त्वेबाज़ों का स्र्त्कारी पंजीयन ज्रुरुई हो और फिर वहां फतवा को दे रहा हे उसका पहले पुलिस वेरिफिकेशन हो और उनकी जो डिग्री हो उसकी जांच एक समिति गठित कर करवाई जाये ऐसा कानून बने के जो इस्लाम कुरान का शुद्ध जानकार हो और इस्लाम के कानून पर शत प्रतिशत चलता हो बस फतवे देना का लाइसेंस उन्हें ही दिया जाए एनी लगों को ऐसे फतवे देने पर जेल भेजने का प्रावधान हो , आज देश में राजनितिक मोलानाओं की कमी नहीं हे कोई भाजपा तो कोई कोंग्रेस तो कोई किसी दुरी पार्टी के तलवे सिर्फ इसलियें चाट रहे हें के उन्हें या तो राज्यसभा में ले लिया जाये या फिर मुफ्त का चन्दन घिस मेरे नन्दन की तरह कोई सरारी पद दे दिया जाए बस इसी तर्ज़ पर यह फतवेबा राजनीके नाम पर गंदगी फेला रहे हें जिससे रोकना जरूरी हे।
अभी राजस्थान के उदयपुर के सराडा में मुसलमानों को आदिवासियों के साथ झगड़े के बाद गिन गिन कर मारा गया उनके मकान जला दिए गये प्रशासन ने उनकी मदद नही की उदयपुर के मुसलमान सरकार और मुख्यमंत्री से नाराज़ हो गये तो मुख्यमंत्रीजी ने इस वक उनके कोटा के एक चमचे और जोधपुर के चमचे मोलाना को याद किया यह जनाब उदयपुर सराडा गये मुसलमानों को वहां इन्साफ तो नहीं मिला लेकिन उन्हें उलटी सुलटी पट्टी पढाकर मामला जो सच था उसे बिना जांच के अखबारबाजी के दाब दिया गया अब यह फ्त्वेबाज़ सरकारी मोलाना सरकार से सोदेबाज़ी के तहत कही ना कहीं कोई सरकारी पद प्राप्त करने के इन्तिज़ार में बेठे हें । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

संसद के खाने में मिलावट

दोस्तों देश में मिलावट चरम सीमा पर हे लोग इस मिलावट से तरह तरह की बीमारियों के शिकार हे कई लोगों की इसी मिलावट के कर्ण मोतें हो रही हें लेकिन सरकार चुप्पी साधे बेठी हे कहने को सरकार कागजों में इस मामले में अरबों रूपये का अतिरिक्त खर्च बताकर कुछ भी आंकडा बता रही हो लेकिन नतीजा जनता के सामने हे।
आदरणीय प्रधानमन्त्री मनमोहन जी के कानपुर खाने की प्लेट में जब मिलावट का खाना आया तो देश में एक सवाल पैदा हुआ के प्रधानमन्त्री जी तो बच जायेंगे लेकिन आम जनता का क्या होगा ,जांच हुई दोषी लोगों को दंडित किया गया लेकिन प्रधानमन्त्री जी इस देश के हजारों लोग आज मिलावट से प्रतिदिन बीमार हो रहे हे बे मोत मर रहे हें , अब लोकसभा की केंटिन में मिलावट का खाना खाकर सांसद बीमार हे केंटिन में खाने में मिलावट की जांच के आदेश हुए लेकिन सांसदों और प्र्धान्मन्त्रीजी की सेल्फिश्नेस यानी मतलब परस्ती देखो के उन्होंने खुद को मिलावट का खाना मिलने पर सिर्फ और सिर्फ खुद के मामले में ही मिलावट की जांच करवाई हे आज तक उन्होंने जन हित में इस मामले में देश भर में मिलावट के खिलाफ अभियान छेड़ने निति बनाने और सरकारी महकमे की कार्यवाही पर निगरानी रख कर तुरंत कार्यवाही करवाने के लियें कोई आवाज़ नहीं उठायी हे बात साफ़ हे प्रधानमन्त्री जी हों चाहे सांसद जी उन्हें जनता से किया उन्हें तो बस खुद की जान बहाने की पढ़ी हे जनता जाए भाद में । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

पंचायत मंत्री के इलाके के सरपंच सडकों पर

राजस्थान के पंचायत मंत्री भरत सिंह के इलाके के सरपंच उनके अधिकार छिनने के मामले में सरकार से खफा हें उन्होंने कल उनके नरेगा सहित अन्य योजनाओं में अधिकार बहाल करने की मांग को लेकर कोटा सम्भागीय आयुक्त के यहा बढा जंगी प्रदर्शन किया , सरपंचों का कहना हे के नरेगा योजना गाँव की हे फिर उन्हें इस्ससे दूर क्यूँ रखा गया हे सरकार ने तो एक तरफ इसीकी निगरानी के लियें अब तक कोई विधिक सदस्यों की नियुक्ति नहीं की हे दूसरी तरफ सरपंचों को बदनाम और बे इज्जत करने के लियें उनके अधिकार छीने जा रहे हें , ध्यान रहे के सरपंचों को राजिव गांधी ने विशेष अधिकार पंचायत राज अधिनियम के तहत दिए थे और संविधान में भी संशोधन किया था लेकिन सरकार ने विधि विरुद्ध तरीके से सरपंचों के अधिकार चीन लिए हें और आरोप हे के सरपंच बेईमान होते हें कोटा के सरपंचों का कहना हे के पुराने सरपंचों ने क्या लिया इससे हमें मतलब नहीं और अगर उन्होंने घोटाले किये हें तो उनके खिलाफ विधि सम्मत कार्यवाही की जाए इस मामले में नये स्स्रप्न्कों के अधिकारों में कटोती संविधान के संशोधन का उल्न्न्घन हे और आदरणीय राजिव गाँधी के निर्देशों का उलंग्घन भी हे , इसमें तुरंत सुधार होना चाहिए। अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

इ टी वी मुसलमानों की गलत अधूरी तस्वीर पेश कर रहा हे इसे रोको

इ टी वी इन दिनों अधूरे ख़्वाब के नाम से देश भर में यहाँ के मुसलमानों की गलत एकतरफा तस्वीर पेश कर देश और देश के लोगों को गुमराह कर रहा हे प्रति रविवार योनाबद्ध तरीके से देश के मुसलमानों की गरीबी भुख्मी और अशिक्षा पर इ टी वी अधूरे ख़्वाब के नाम से एक रिपोर्ट प्रसारित करता हे इसके पीछे उसकी क्या राजनीति क्या षड्यंत्र हे यह तो में नहीं कह सकता लेकिन एक सच हे के यह रिपोर्टिंग ना तो पत्रकारिता के सिद्धांतों के अनुरूप हे ना ही देश के संविधान कानून में ऐसी एकतरफा भ्रामक भडकाऊ रिपोर्टें प्रकाशित करने की इजाजत हे , इस इ टी वी में अब तक की सब रिपोर्टों में आज़ादी के बाद से आज तक मुसलमानों को दीन हीन गरीब कुपोषण का शिकार भुखमरे अशिक्षित बताया गया हे , अजीब बात हे के देश में आज मुसलमान शिक्षा,विज्ञान,तकनीक,उह्योग सभी मामलों में देश की मुख्य धारा से जुड़े हें और यही वजह हे के देश में मुसलमानों ने ऐ पी जे अबू कलाम दिया ऐसे कई लोग हें जी पर देश को गर्व हे लेकिन इ टी वी हे के एक मुहीम के तहत इस अधूरे ख़्वाब कार्यक्रम में देश भर के प्त्र्येक जिले में मुसलमानों को दरिद्र,अन्पड,गंवार गंदगी में रहने वाले साबित करने पर तुला हे जबकि आज साक्षरता में मुस्लिमों का प्रतिशत अन्य जातियों की अपेक्षाक्रत बढा हे मुस्लिम उद्योगपति हें , महंगे आलिशान मकान उनके पासे हें फिर भी मुस्लिमों की यह तस्वीर वोह भी एक तरफा आपत्तिजनक हे इसे रोकना चाहिए ।
आज देश में मुसलमान डोक्टर,इंजीनियर,बनने की लाइन में हें वोह बिना किसी आरक्षण के सेलेक्ट हो रहे हें लेकिन उनी फ़ीस जमा नहीं होने से कई लोग पिछड़ रहे हें उन्हें १९५० से संविधान की भावनाओं के विपरीत जातिह्ग्त आधार पर आरक्षण से अलग रखा गया हे इस मामले में इ टी वी की रिपोर्ट खामोश हे इससे स्पष्ट हे के इ टी वी अपने प्रसारण का दुरूपयोग किसी को राजनितिक फायदा पहुँचाने और देश में मुस्लिमों को जिल्लत मिल रही हे ऐसा प्रदर्शित कर देश की धर्मनिरपेक्षता की तस्वीर बिगाड़ने का प्रयास कर रहा हे इससे मुसलमानों को सरकार के खिलाफ भडकाया भी जा रहा हे अगर इस प्रसारण को नहीं रोका गया तो यह वातावरण में जहर घोल देगा इसलियें इस कार्यक्रम को या तो रुकवाना या फिर बहुपक्षीय रिपोर्टिंग की तरह निष्पक्ष तय्यार करवा कर प्रसारित करने की हिदायत देना जरूरी हो गया हे आप भी इस मामले में कार्यक्रम रविवार को देखे और इ टी वी को सही काम करने की सलाह दें। अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

मेरे दिल को यह क्या हुआ


वोह जिसके मिलन को
कल दिल मेरा
तडपता था ,
आज उसका नाम आते ही
मुझे जहर
क्यूँ लगता हे ,
मेरे दिल को
यह क्या हुआ
जिसकी यादें थी साँसों में मेरी
जिससे मिलन की आस थी मेरी
खुशबु से जिसकी महकता था में
आज देखो
नफरत की गर्मी से उसी की
दहकता हूँ में ,
सोचता हूँ मेरे दिल को
अचानक यह क्या हुआ
फिर सोचता हूँ
प्यार,वादे,मिलन की आस
कहने को तो अच्छी बात हे
लेकिन इसे पाने के लियें
जमीर अपना बिक जाए अगर
तो कितनी बुरी बात हे,
सोचता हम मरता था जिन पर कल में
आज मिलने भर के उनके ख्याल से
डरा सहमा क्यूँ बेठा हूँ में ।
इलाही तू ही बता में क्या करूं
जो नहं थी मेरी
क्यूँकर में उसे याद करूं
सोचता हूँ मी दिल को यह क्या हुआ
आज फिर जागा हे जमीर
सारी शर्तें उनसे मिलने पर
सबको छोड़ने की जो थीं
आज उन्हें में तोड़ता हूँ
यह मेरे दिल को या हुआ
जिसके लियें छोड़ी थी दुनिया कल
आज उसे ही दुनिया के लियें
छोड़ा क्यूँ हे ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

यूँ आसमान पर पेबन्द ना लगा


ऐ ज़मीं
के टुकड़े तोड़ने वालों
यूँ आसमां पर
ज़मीं के पेबन्द ना लगाओ ,
फटे हुए आसमां को
बचाना चाहते हो अगर
तो बस
हर घर के बाहर
एक पेड़ जरुर लगाओ ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

अमन का कारवा के लोग मुझ से हुए नाराज़

दोस्तों आज मेने घर आये मेहमान का अनादर नहीं करने की परम्परा तोड़ कर अपराध किया हे मेने पाकिस्तान से भारत में अमन का पैगाम लेकर आये पाक अमन कारवाँ के लोगों को नाराज़ कर खरी खोटी सूना दी हे वोह लोग आज मुझ से नाराज़ हो गये लेकिन न जाने क्यूँ इतना बढा अपराध करने के बाद भी आज पहली बार मेरा मन अपराध बोध से ग्रस्त नहीं हे और में पहली बार ऐसा अपराध कर शर्मिंदा नहीं हुआ हूँ , आज पाकिस्तान के यात्रियों की एक बस जिसमें करीब ५० यात्री महिला पुरुष बच्चे शामिल थे कोटा आई उनका मकसद भारत और पाकिस्तान के बीच में दोस्ती के सम्बन्ध बनाना और अमन का पैगाम देना था इसीलियें उन्होंने इस बस का नाम अमन का कारवाँ रखा यह सभी लोग मेरे वकालत के दफ्तर वाली होटल में ठहरे जहां उनका स्वागत हुआ, मुझे भी उनसे मिलाया गया कारवां में आये एक जनाब सिख सरदार भाई ने मुझ से पूंछ लिया के वकील साहब आप हमारे इस मिशन के बारे में किया टिप्पणी करते हें उन्होंने अपना मूवी कमरा निकाला और खड़े हो गये मेने उनसे मना किया मेरी प्रार्थना थी की में कव्वा कहलाता हूँ जब बोलूंगा कांव कांव बोलूंगा मेहरबानी करके किसी और से यह सवाल पूंछ लो लेकिन थोड़ी देर में हिन्दू,मुस्लिम,सिख भाई और बहने आ गये और वोह इस सवाल का जवाब मुझ से लेने को उत्सुक हो गये मेने उनसे कहा के हमारे देश में आपका दिल से स्वागत हे यहाँ आप की महमान नवाजी में कोई कसर नहीं रहेगी फिर सरदार भाई ने कहा के वकील साहब यहा प्लीज़ वकालत ना करो हमारी बात का सीधा सीधा जवाब दो तो ठीक रहेगा, बस फिर किया था मेरी भी जुबां सच की तरफ फ़ीस गयी मेने ख ही दिया के भाई आप जिस काम के इयें निकले हें वोह आपके देश पाक की नापाक हरकतों के चलते ना मुमकिन हे लेकिन खुदा से दुआ करेंगे के खुदा इसे मुमकिन बना दे बस फिर क्या था कारवा वाले भडक गये कहने लगे भाई हम दोस्ती का हाथ बढाने आये हें और आप हें के जहर फेला रहे हें , मेने फिर जवाब दिया केसी दोस्ती केसा हाथ जब जब भी आपके देश ने दोस्ती का हाथ बढाया हमारे डी देह में मुसीबत खड़ी हुई हे आपके देश ने हमेशा हमारे देश की पीठ पर छुरा घोंपा हे इस पर अमन कारवा खामोश हो गया और बस नाराजगी की नजर से मुझे देखने लगा में थोड़ी देर रुका उन्हें जय सियाराम,सत्सिरी अकाल , आदाब अर्ज़ किया और वापस अपने दफ्तर आ गया में सोचता रहा के मेने घर आये मेहमान को नाराज़ कर कहीं पाप तो नहीं कर दिया लेकिन मुझे अब तक इस बात पर अफ़सोस नहीं हुआ हे इसलियें समझता हूँ के मेने अपनी बात कहकर कोई पाप नहीं किया। अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

05 August 2010

फिर सुबह हो गयी


ओह देखो
फिर सुबह हो गयी
रात गयी ,करवटें गयी,याद गयी
ओह देखो
फिर सुबह हो गयी ।
रात थी तो बात थी
रात थी तो नींद में उनकी याद थी
ओह देखो
फिर सुबह हो गयी ,
अब सुबह से शाम तक
बताओ में क्या करूं
इन उजालों में
केसे उन्हें या करूं
ओह देखो
फिर सुबह हो गयी ,
फिर से बजने लगी घंटियां
फिर से होने लगी अज़ान
मुर्गा बोले कुकड़ू कुं
चिड़िया बोले चू चूं ।
ओह देखो
फिर सुबह हो गयी
अन्ध्रेरा जो पसंद था मुझे
उसे रौशनी खा गयी
फिर देखो सुबह हो गयी
ना जाने कब
अब फिर शाम होगी
उसकी यादें मेरी
सांसों में आम होंगी
ओह देखो
फिर सुबह हो गयी ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

कोटा बेंक घोटाले मामले में गिरफ्तार

कोटा में फर्जी चेक तय्यार कर लाखों रूपये फर्जी तरीके से निकालने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश कर पुलिस ने भी कामयाबी हांसिल की हे , कोटा पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल कुमार का कहना हे के भारती स्टेट बेंक का एक बर्खास्त कर्मचारी तारासिंह इनका मास्टर माइंड हे वोह पहले लोगों के खातों और बेंक में जमा रकम चेक संख्या और हस्ताखर के बारे में रेकी करता था और फिर नकली आगे के नम्बर को चेक छाप कर बेंक में जमा रकम के हिसाब से चेक तय्यार करता था , बाद में अपने दुसरे साथियों के साथ मिलकर वोह बेंक से रकम निकलवा लेता था कोटा पुलिस का कहना हे के इस गिरोह ने कोटा सहित अन्य जिलों और राज्यों में करोड़ों रूपये के घोटाले किये हें और अभी मुख्य अभियुक्त तारा सिंह के पकड़े जाने पर और भी महत्वपूर्ण जानकारियाँ मिलेंगी , देश भर में फर्जी चेक छाप कर फिर हस्ताक्षर कर ठगी का यह शायद पहला मामला हे जिए कोटा पुलिस ने पकड़ कर यह साबित कर दिया हे की वोह भी किसी से कम नहीं हे । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

कोमन वेल्थ गेम पर कालिख पुती

देश में कोमन वेल्थ गेम में त्यारियों में भ्रष्टाचार को लेकर हंगामा खड़ा हे और देखते ही देखते केन्द्रीय मंत्री मणि शंकर अय्यर की दुआ खेल बर्बाद होने के मामले में पूरी होने लगी हे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इस तय्यारी में देश बदनाम हो गया हे पहले केन्द्रीय मंत्री और कलमाड़ी के झगड़े फिर दिल्ली मुख्यमंत्री शिला दीक्षित का गुस्सा कुल मिलाकर कोम्न्वेल्थ गेम में मजाक के अलावा कुछ नहीं हो रहा हे संकेत हें के दस जनपथ के नजदीकी केन्द्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर ने जब कोमन वेल्थ गेम की खिल्ली उढ़ाई और इसे बर्बाद होने की दुआएं मांगीं तो दस जनपथ ने भी चुप्पी साध ली मनमोहन जो पहले नर्सिंघ्घा राव के नजदीकी थे और कलमाड़ी को इसीलियें इतनी ताकत दे रखी हे वोह भी खामोश रहे तब एक बात तो समझ में आ गयी थी के दस जनपथ भी इस आयोजन से बहुत ज्यादा खुश नहीं हे। अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

गरीबी में देश फिर आगे

विश्व स्तर पर गरीबी के आंकड़ों में हमारा देश का जो नम्बर आया हे उससे हमारे नेताओं को चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिए , देश में मध्यप्रदेश गरीबी कुपोषण में नम्बर वन हे और गरीबी की सूची में मेरा राजस्थान भी प्रमुख हे यह मेरा देश हे जहां हमारे पास कपड़े हे लेकिन गरीबो को देने के लियें नहीं हमारे पास अनाज हे लेकिन गोदामों में सड़ाने के लियें हे गरीबों को देने के लियें नहीं हमारे पास शिक्षा गारंटी कानून हे लेकिन गरीबों को पढाने के लियें नहीं हमारे पास गरीब उन्मूलन योजनायें हें लेकिन गरीबों पर खर्च करने के लएँ नहीं आज जब विश्व स्तर की यह रिपोर्ट प्रकाशित हो रही थी तो मेरा सर शर्म से नीचा झुका जा रहा था , मेरे देश में गरीबी उन्मूलन के लियें करोड़ों नेता अरबों बार भाषण देते हें और खरबों रूपये इस योजना को क्रियान्वित करने पर खर्च करते हें विदेशों में सोना गिरवी रख कर ऋण लेते हें फिर भी दोस्तों मेरे गांधी नेहरु के इस देश में गरीबी का यही आलम हे क्यूंकि मेरा देश आज भी महान हे । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

भाईजान हमारे धर्म के मोलानाओं की तरह क्या आपके धर्म में भी मक्कार हें

दोस्तों आज में बहुत दुखी हूँ क्यूंकि एक सच मेरे सामने हें के विश्व के सभी धार्मिक पंडितों मोलानाओं में मेरे मुस्लिम धर्म के मोलाना सबसे ज्यादा मक्कार हें इस्लाम का पहला सिद्धांत हे के कोई भी धर्म की शिक्षा धर्म और खुदा की आयतों को रोज़गार का जरिया न बनाये लेकिन कुछ लोग कुछ मोलाना हें जो मेरे देश और खासकर कोटा में सिर्फ और सिर्फ धर्म को ही रोज़गार बना कर लाखों करोड़ों कमा रहे हें उनके पास चंदे करने ,विधि विरुद्ध निकाह की डायरियां छपवा कर निकाह के नाम पर अवेध वसूली करने , कुरान कहानी,मस्जिदों में नमाज़ पढाने और तन्त्र मन्त्र के अलावा फतवे वगेरा देने के अलावा कोई दुरा काम नहीं हें यह मोलाना लोग इस काम में इतना कुछ कमा रहे हें के काफी कुछ हिस्सा उसमे से राजनीति में लगा कर कोंगरे या भाजपा में अपना मुकाम बनाये हुए हें और सरकार में कोई ना कोई पद पाना चाहते हें मजेदार बात यह हे के इन्हें ऐसे गेर इस्लामिक तरीके से लोगों को लुटने से रोकें तो यह लोग एक ग्रुप बना कर हमले करते हें और अलग अलग मस्लाकों के नाम पर एक दुसरे को बदनाम करते हें , अभी कोटा में शेहर काजी को ऐसी शिकायतें मिलने पर उन्होंने ऐसे गेर इस्लामिक कामों को रोकने की हिदायत दी थी बस क्या था धर्म के नाम पर लोगों को बेवकूफ बनाकर पेट पालने और राजनीति करने वालों को बुरा लग गया और वोह एक गुट बना कर कथित जमातों के नाम पर अपनी अपनी फर्जी डिगरिया खुद के नाम से होना बताकर क़ाज़ी साहब के खिलाफ मैदान में उतर आये खेर कोटा के लोग शहर काजी की बुर्दुबारी और इमानदारी,दीनदारी से वाकिफ हें इसीलियें उन्होंने इन मोलानाओं को मुंह तोड़ जवाब दिया और जब इन्हें आयना दिखाया गया तो यह फर्जी लोग जमीन पर आन गिरे वेसे इनकी कथित डिग्रियों की जांच हो तो आधे तो जेल में जाएँ और इनकी आमदनी खर्च के जरियों की जांच हो तो यह लोग आम जनता में रुसवा हो जाएँ लेकिन फिर भी कोटा में कुछ लोगों ने इन के एक राजनितिक मोलाना जो खुद को राजस्थान के मुख्यमंत्री का नजदीकी बताते हें उनसे एक धार्मिक कार्यक्रम रमजान की आमद र सेमीनार में शहर काजी कोटा के साथ आने को कहा तो इन मोलाना जनाब ने बढ़े खुलूस स हाँ भरी दुबारा फिर कन्फर्म किया फिर हाँ बढ़ी यह मोलाना कोटा काजी के मुकाबले मुंग में सफेदी के बराबर भी नहीं हें फिर भी काजी कोटा ने इसे स्वीकार किया लेकिन जनाब च्न्दाखोर और उनाफाखोर आयतों का मोल कर धर्म को पेट का जरिया बनाने वाले इन जनाब मोलानाओ के ग्रुप मोलाना घबरा गये और उन्होंने इन मोलाना जनाब को इस कार्यक्रम में जो सिर्फ मज़हब से ताल्लुक रखने वाला कार्यक्रम था उसमें जाने से रोक दिया अब बताओ जो मोलान इस्लाम का अनादर करे रमजान की फज़ीलत आम मुसलमानों को बताने गुरेज़ करे और फितना फेला कर मुसमानों को बातें ,धर्म को पेट पालने का साधन बनाये तन्त्र मन्त्र तावीज़ गंडे करे तो क्या यह लोग इज्जत के लायक हें क्या यह लोग धर्म के आलम बरदार हें बस यही सच जानकर आज में सोचता हूँ के यार मेरे मजहब से ज़्यादा मक्कार आज किसी दुसरे मजहब के जानकार पंडित वगेरा नहीं हें क्यूँ भाई हे कोई मजहब जिसमें मेरे मजहब से ज्यादा मक्कार और कोम का खून चूसने वाले धर्म के जानकार हों नहीं ना अगर हे तो प्लीज़ बता कर दिखाओ । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

कोटा पुलिस का अपराधियों को पकड़ने का बंधक फार्मूला

कोटा में इन दिनों अपराधियों की पो बारह हे लेकिन अपराधियों के परिजनों की शामत आ गयी हे यहाँ हाल यह हे के पुलिस की कड़ी चोकसी रोज़ गश्त और निरोधात्मक कार्यवाहियों के कार्यवाहियों के बाद भी रोज़ मर्रा लुट,डकेती,गोलीबारी की घटनाएँ आम हें इधर अपराधी घटना करते हें और उधर फरार हो जाते हें बस इसी मामले में पुलिस तंग और परेशान हे पुलिस अपराधियों को पकड़ने के लियें अब सीधे फरार अपराधियों के घर पर छापा मार रही हे और घर के बालिग़ नाबालिग महिला पुरुष को बिना किसी वजह के पूंछ तांछ के नाम पर नाजायज़ हिरासत में रख र परेशान कर रहे हें गुस्से में घरों में घुस कर तोड़ फोड़ कर रहे हें इस मामले में कल नयापुरा पुलिस के खिलाफ एक महिला ने अदालत के जरिये मुकदमा दर्ज करवाया हे , पुलिस अपराधियों को पकड़ने के लियें आधुनिक फार्मूले और निगरानी के तरीके तो नहीं अपना रही लेकिन घरों में घुसकर निर्दोष परिजनों पर ज़ुल्म ढाने की घटनाओं से अब कोटा के लोग दुखी होने गे हें और कोटा पुलिस निरंतर बदनाम होने लगी हे जिससे अधिकारीयों का भी मनोबल गिर रहा हे लेकिन इस मामले में अधिकारियों ने अधिनस्थों को कोई निर्देश जारी नहीं किये हें । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

कोटा में भी अनाज की बोरियां सड़ने लगी

देश भर में अनाज बिना किसी कारण के सढ रहा हे अब इस कड़ी में कोटा के गोदाम का नाम भी जुड़ गया हे हालात यह हें के कोटा के केंद्र सरकार के गोदाम में पंजाब से मंगवाया गया २५ हजार बोरी गेंहू खराब हो गया हे , कोटा के गोदाम में गेंहू रखने की पर्याप्त जगह तो हे लेकिन कुप्रबंध के चलते यहाँ गेहूं की बोरिया सढ गयी हें और इस मामले में कोटा प्रशासन या केंद्र सरकार के सम्बन्धित विभागों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशो की अब तक पालना नहीं की हे । कोटा में एक तरफ तो बी पी एल कार्ड धारक सस्ते गेंहूँ के लियें लगातार चक्कर काट रहे हें और दूसरी तरफ इस तरह कुप्रबंध के चलते गेंहूँ सड़ने से यहाँ की जनता दुखी हे , देखते हें इस मामले की जाच के बाद दोषी लोगों को दंडित किया जाता हे या फिर जांच ठंडे बसते में बंद कर दी जाती हे । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

राजस्थान में बिना अनुमति धार्मिक स्थलों का निर्माण नहीं होगा

राजथान में अब बिना पूर्व अनुमति के कोई भी व्यक्ति या समुदाय बिना पूर्व अनुमति के किसी भी तरह के धार्मिक स्थल का निर्माण नहीं कर सकेगा इसके लियें सरकार ने सरपंच से लेकर उच्च स्तर के लोगों को ज़िम्मेदार बनाया हे विदित रहे की राजस्थान में किसी भी धार्मिक स्थल के निर्माण के पूर्व जिला कलेक्टर से विधि अनुसार स्वीक्रति लेना जरूरी हे जिसमें धार्मिक स्थल की प्रस्तावित जमीन के मालिकाना हक वाले कागजातों , नक्शे और ट्रेफिक व्यवस्था के साथ साथ कानून व्यवस्था पर पढने वाले असर की भी जांच की जाती हे और इन सब जांचों के बाद ही धार्मिक स्थल के निर्माण की अनुमति दी जाती हे याद रहे के सुप्रीम कोर्ट ने बिना अनुमति के मनमाने स्थानों पार्कों ,सडकों तालाबों में धार्मिक स्थल के निर्माणों पर नाराजगी जताते हुए इसका सर्वे करवाकर राज्यों से शपथ पत्र के साथ रिपोर्ट देने को कहा हे , राजस्थान के मंत्रियों ने कल इस मामले में बैठक में निर्णय लेकर सभी अधिकारियों को इससे अवगत करा दिया हे देखते हें इन निर्णयों का अब किया होता हे । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

04 August 2010

महंगाई से केंद्र ने पल्ला झाड़ा

दोस्तों आज़ादी से आज तक किया आपने इतनी बेशर्म ,बेहया, सरकार देखी हे जो अपने किये पर पछताने के बदले दूसरों को दोषी ठहराती फिरे लेकिन यह बदनसीबी हमारे नसीब में थी हमने ऐसी मुख पर कालिख पुती सरकार देखी हे जो सारे पाप करने के बाद भी खुद को साफ़ सुथरा समझती हे, महंगाई के मामले में बहस के दोरान केंद्र सरकार ने महंगाई क्यूँ भी इसके पीछे मूल कर्ण किया हें इसे कम करने और रोकने के लियें किया कदम उठाना चाहियें इस पर तो बहस नहीं की इस पर अपना निर्णय नहीं दिया लेकिन सीधे बस एक बात के महंगाई का केंद्र सरकार से किया लेना देना यह तो राज्यसरकारों की भी ज़िम्मेदारी हे अजीब हास्यास्पद जवाब हे दोस्तों लगता हे केंद्र सरकार के जानकारों ने देश का संविधान नहीं पढ़ा हे और यही वजह रही हे के वोह संसद में शपथ लेकर जनता को गुमराह करने वाली कार्यवाही कर रहे हें जो देश के संविधान और शपथ अधिनियम का कहा उल्न्न्घन हे लेकिन जब सरकार सेटिंग की हो और विरोधियों की सरकार के साथ मिली जुली कुश्ती हो तो फिर इस देश और देश के गरीबों का क्या हो सकता हे । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

वित्तीय संस्थानों से वित्तन्त्री भी दुखी

देश में सरकार ने वित्तीय संस्थाओं को इतना सर चढा लिया हे के यह संस्थाएं लोगों को ठगने के लियें अपने लुभावने जाल फेलाने से बाज़ नहीं आ रही हें अब तो इनकी हिम्मत इतनी हे के वित्तमंत्री प्रणव मुखर्जी को चलती हुई संसद में फोन करके होम लोन देने की बात करते हें देश के सबसे अमीर आदमी अम्बानी को होम लोन देने की बात करते हें , वित्तमंत्री को फोन पर संसद में लोन देने की इस घटना ने देश का शर्म सर से झुका दिया हे पहली बात तो संसद में जब महत्वपूर्ण बहस हो रही हे तो फिर मोबाइल फोन वहां नहीं होना चाहिए दूसरी बात अगर किसी का फोन वहां आया भी था तो महत्वपूर्ण बहस छोड़ कर वित्तमंत्री प्रणव मुखर्जी को फोन अटेंड नहीं करना चाहिए था , और फोन अटेंड कर लिया था तो जिस कपनी से फोन आया हे उस कम्पनी के खिलाफ संसद में कार्यवाही की घोषणा करना चाहिए थी , दोस्तों आज सरकार द्वारा छुट देने पर ही वित्त कम्पनिया लुट खसोट कर रही हें और आम आदमी अआतं हत्या के दोर से गुजर रहा हे । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

शाह मामले में सी बी आई को गुजरात की पटखनी

गुजरात के पूर्व गृह मंत्री और सोहराबुद्दीन मामले में अभियुक्त बनाये गये शाह को सी बी आई रिमांड नहीं मिलने पर सी बी आई ने मुंह की खायी हे सी बी आई प्रकरण को गुजरात से बाहर सुनवाई के लियें ले जाना चाहती थी लेकिन गुजरात के दबाव में सी बी आई घबरा गयी हे क्योंकि पिछले इनों एक माओवादी की सुनवाई मणिपुर से दिल्ली सी बी आई ने माननीय सुप्रीमकोर्ट से आदेश लेकर करवाई हे तो फिर इस मामले में उसे क्या दिक्कत थी , सी बी आई की गिरफ्तारी के बाद गुजरात पुलिस का सी बी आई को नॉन कोपरेशन को भी गम्भीरता से नहीं लिया गया हे इतना ही नही सी बी आई ने शाह को जानत मिल जाये इस लियें रिमांड नहीं लिया और फिर जब शाह की जमानत की अर्जी लगी तब दिखावा मात्र करते हुए रिमांड माँगा गया सी बी ई और गुजरात सरकार इस मामले में कुछ भी खे लेकिन यह पब्लिक हे सब जानती हे । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

सोहराबुद्दीन के बाद अब दारासिंह

राजस्थान में फर्जी मुठभेड़ मामले में सोहराबुद्दीन के बाद अब दारासिंह उर्फ़ दारिया की फर्जी मुठभेड़ का जिन भाजपा नेता और भाजपा नेताओं के चमचे पुलिस अधिकारियों को सताने लगा हे राजस्थान पुलिस फर्जी सोहराबुदीन मुठभेड़ में लोगों से रूपये लेकर सोहराबुद्दीन की हत्या करने के मामले में जेल में हें कुछ ऐसा ही मामला सी बी आई को जयपुर दारा सिंह मुठभेड़ में देखने को मिला हे वेसे अभी सी बी आई ने दारिया जहां का रहने वाला था और जहां जयपुर में उसकी मुटभेड हुई हे उन लोगों के ही ब्यान लिए हें और इन बयानों से कहीं ना कहीं डाल में काला नजर आ रहा हे सब जानते हें के इस मुठभेड़ के बाद जो अधिकारी या सी आई इसमें शामिल थे या गवाह थे उन्हें सरकार ने ख़ास जगह पर पोस्टिंग देकर और अतिरिक्त सुविधाएँ देकर नवाज़ा हे खेर राजस्थान के वर्तमान मुख्यमंत्री जी ने तो इस मामले में तो पहले ही जांच का आश्वासन दिया था वेसे राजनितिक ह्त्क्षेप के बाद लोगों को झुन्था फसाने की घटनाएँ तो आम हें लेकिन अब मुठभेड़ें राजस्थान पुलिस और खादी को दागदार कर रही हें। अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

आज सुबह सवेरे


आज सुबह सवेरे
चिड़ियें चहकाती हें
हवाएं बर्फाती हें
हसीन वादियों में देखों
आज फिर उनकी याद सताती हे
आज सुबह सवेरे
फिर याद उनकी आती हे ,
वोह गर्म साँसें ,वोह नर्म होंट
वोह कटीली अदाएं ,
हम पर मर मिटने का उनका शोक
आज फिर देखों
याद उनकी आती हे
काश पहले की तरह
आज सुबह सवेरे
मुझे फिर वोह मिल जाएँ
आयें और सीने से मेरे
हमेशां की तरह लिपट जाएँ
बस आज सुबह सवेरे
याद उनकी फिर आती हे
जब वोह नहीं आते
तो दिल मेरा
सूरज की तरह
डूब जाता हे आँखें मेरी नम हो जाती हें
लेकिन ,
राज़ उनसे मेरे बिछड़ने का
ज़ाहिर ना हो लोगों पर
इसीलियें अपने आंसुओं को
हम लहू समझ कर पी जाते हें ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

खुदा सा लगा


झालावाड राजस्थान के जनाब राजेन्द्र तिवारी जी ने
अपनी रचना खुदा सा लगा में कहा हे .........
वोह समन्दर पाकर भी प्यासा लगा
दुनिया में बढा ही रुआंसा लगा ।
मुद्दतों में जिस शोहरत को हांसिल किया
वक्त खोने में उसको जरा सा लगा।
मोसम सा आलम बदल सा गया
दरमियाँ दिलों के कुन्हासा सा लगा ।
मुसीबत में वोह गुदगुदा के गया
आदमी सीरत में खड़ा सा लगा
अपनों ने जख्मों के तोहफे दिए
बेगानों से मिलके मजा सा लगा ।
सजदे में उसके थीं नुरानियां
दुआओं में असर भी खुदा सा लगा
गर्दिशों में जो हमसाया लगा
खुशियों में मेरी क्यूँ खफा सा लगा ।

प्रस्तुत करता अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

बहुत हें ऐसे लोग


बहुत हें ऐसे लोग
जो बस
खुद के दुखों के
गीत गाते हें ।
ईद हो
होली हो चाहे दिवाली
हमेशां
बस और बस
मातम हे मनाते हें ।
कह दो उनसे
आज दुनिया उन्हीं के
इशारे पर नाचती देखी
जो परवाह
किसी की नहीं करते
और वक्त आने पर
जलती चिताओं पर भी बेठ कर
वीणा हें बजाते ।
कह दो उनसे आज
दुनिया उन्हीं की हे
जो मोत के आगोश में भी
खुशियों की फोलादी
सेज हें सजाते ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

इस जहां में .....


इस जहां में
खुलूस और प्यार से
पुकारे एक दुसरे को कोई
बस
ऐसे लोगों की
अब मुझे तलाश हे ।
राह का पत्थर
समझ कर ठुकराए
कोई मुझे
आज बस मुझे
ऐसे आदमी की
तलाश हे ।
गुमसुम लोगों को
हंसाये
रोते हुए लोगों
के आंसू जो पोंछे
बस आज भी
मुझे
ऐसे लोगों की तलाश हे ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

जिंदगी होसले वालों के साथ आ

जिंदगी
उधर किया देखती हे
पस्त होसले वाले तुझे
किया जियेंगे ।
इधर आ
हम होसले वाले हें
तुझे हम गुजारेंगे ..............
दोस्तों यह निराशावादी लोग जो पल भर की परेशानी को जिंदगी भर की परेशानी समझ कर आत्महत्या करने लगते हें उन से प्रेरित होकर लिखा गया हे । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

पोलीथिन चलेगा केरी बेग नहीं

राजस्थान में पोलीथिन बंद का कानून लागू किया गया हे चार दिन से पुरे राजस्थान का प्रशासनिक अमला यहाँ पोलीथिन का उपयोग बन करने में अपनी शक्ति लगाये हुए हें उलन्न्घन पर कठोर दंड और जुर्माने का प्रावधान रखा गया हे , लेकिन यहाँ के व्यापारियों ने भी सरकारी आदेशों को धता बता कर कान इधर से पकड़ो या उधर से बात एक ही हे वाली कहावत चरितार्थ कर दी हे राजस्थान में पोलीथिन केरी बेग पर पाबंदी लगाई गयी हे तो व्यापारियों ने पोलीथिन से हेंडिल और पकड़ने का पोलीथिन हिस्सा निकल दिया हे अब जब पकड़ने वाला हिस्सा यानी केरी करने वाला हिस्सा ही नहीं रहेगा तो फिर यह पोलीथिन केरी बेग नहीं कहलायेगा और इसे डोरे से बांध कर देने पर कोई कानून का उल्न्न्घन नहीं हे हे ना मजेदार बात चीज़ वही हेंडिल हे तो पाबंदी हेंडल हटा दिया तो पाबंदी खत्म क्या आपको यह कानून व्यवहारिक लगता हे या फिर कोई तुगलक की जिद का तुगलकी कानून क्रप्या आपकी राय का इन्तिज़ार करूंगा । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

भोपाल जेसे सागर के लियें कोटा की टीम अहमदाबाद रवाना

दोस्तों एक अजीब खबर हे कोटा में एक किशोर सागर हे जिसे सा करने के लियें १९७५ से आज तक कई हजार अर्ब रूपये खर्च हो चुके हें लेकिन बेचारा किशोर आगर कुमुदनी और गंदगी से पहले जेसा ही भरा हे , अब इस बार नगर विकास न्यास ने शहर के बीचोंबीच बने इस किशोर सागर की सुध ली हे और इसके बीच में बने जग मन्दिर का लुत्फ़ भी जनता तक पहुँचाने की कोशिश करना शुरू की हे कोटा के सारे अधिकारियों ने एक साथ मिलकर यह निर्णय लिया की किशोरसागर को भोपाल के टाल की तरह सुंदर बनाया जाएगा जब यह प्रस्ताव पास हुआ तो यह भी तय किया गया के भोपाल की तरह किशोर सागर को केसे बनाएं इसके लियें कुछ अधिकारी इस का अध्ययन करेंगे , लेकिन दोस्तों मजेदार बात यह हे के भोपाल जेसा ताल किशोर सागर को बनाने के लियें कोटा के अधिकारी भोपाल नहीं गये हें कोटा के अधिकारी भोपाल जेसे ताल को बनाने के लियें भोपाल नहीं गये वोह तो सरकारी खर्च पर केवल अहमदाबाद गये हें हे ना मजेदार बात भोपाल की जानकारी लेने के लियें कोटा के अधिकारी भोपाल नहीं अहमदाबाद जाकर जानकारी लेंगे इसके पहले भी निगम के अधिकारी कोटा की सुरत बदलने सुरत गये थे कुल मिला कर योजना कही की भी हो कोटा के अधिकारियों को गुजरात से प्यार हो गया हे इसीलियें वोह बार बार किसी न किसी बहाने गुजरात जा रहे हें । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

तालेडा बूंदी नदी और १५ सिसकती जानें

कोटा संभाग के बूंदी जिले के तालेडा कस्बे में नदी में अचानक उफान आ जाने से नदी के बीचो बीच बने मन्दिर पर दर्शन करने गये १५ लोगों की जान आफत में आ गयी वहां श्रद्धालु पहले तो खूब आराम से रास्ते चलकर गये लेकिन थोड़ी देर में जेसे ही पानी का बहाव बढा तो मन्दिर के छाओं तरफ पानी ही पाने हो गया और चारों तरफ समुन्द्र की तरह ल्ह्र्हाता पानी देख कर यह लोग सकते में आ गये आखिर खबर मीडिया के पास पहुची और फिर खबर जिला प्रशासन के पास पहुंची इस मामले में बूंदी प्रशासन आपदा राहत कार्यों में सुस्त नजर आया और पानी कम करने का इन्तिज़ार करता रहा इस बीच में यदि मन्दिर का भवन क्ष्तिक्र्स्त हो जाता तो वहां फंसे लोगों की जान जा सकती थी पुलिस को वहां आपदा राहत के तहत मोटर बोट, नावें और हेइकोप्त्र की तत्काल व्यवस्था कर उनकी जान बचाना चाहिए थी लेकिन केवल भाग्य भरोसे उन्हें छोड़ देना पशासन के लियें अच्छी बात नहीं रही वोह तो इश्वर ने १५ लोगों और उनके परिजनों की सुन ली जो कुछ देर बाद पाने कम हुआ और वोह लोग सुरक्षित निकल आये वरना इन सभी लोगों को तो मोत नजदीक से दिख रही थी । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

सास के इलाज के लियें रूपये मांगे तो रुपयों के साथ जल गयी

राजस्थान में एक बहु जो जयपुर में रहती थीं उस सुमन कंवर से पति किशोर सिंह ने सास के इलाज के लियें पांच सो रूपये क्या मांग लिए पुरे परिवार पर आफत आ गयी ,कल जब किशोर सिंह ने अपनी पत्नी सुमन कंवर से मान के इलाज के लियें रूपये मांगे तो बात बात में बात इतनी बढ़ गयी के बहु सुमन कंवर ने सम्पत्ति के कागजात जो उसके खुद के नाम थे और करीब पांच लाख रूपये नकद बिस्तर पर बिछाए और उस पर लेट कर खुद के आग लगा ली सूरज कंवर की रुप्येओं के साथ आत्म डाह का यह अनूठा मामला देख कर पुलिस और आम जनता भोचक्की हे फिलहाल जयपुर पुलिस ने इस अनूठे मामले में मुकदमा दर्ज कर कार्यवाही शुरू कर दी हे लेकिन इस अजीब आत्मदाह के पीछे क्या सच हे इस मामले में पुलिस क्या कुछ कर पाती हे यह तो वक्त ही बताएगा। अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

03 August 2010

कमी क्यूँ हे

कोटा के जनाब अहमद सिराज फारुकी की गजल पेश हे
बढ़ी हे मुल्क में दोलत तो मुफलिसी क्यूँ हे
हमारे घर में हर इक चीज़ की कमी क्यूँ हे
मिला कहीं जो समुन्द्र तो उससे पूछुंगा
मेरे नसीब में आखिर यह तश्नगी क्यूँ हे
इसीलियें तो खफा हे यह चाँद जुगनू से
की इसके हिस्से में आखिर यह रौशनी क्यूँ हे
यह एक रात में क्या हो गया हे बस्ती को
कोई बताये यहाँ इतनी खामुशी क्यूँ हे
किसी को इतनी भी फुर्सत नहीं के देख तो ले
यह लाश किसकी हे कल से यहीं पढ़ी क्यूँ हे
जला के खुद को जो देता हे रौशनी सब को
उसी चिराग की किस्मत मन तीरगी क्यूँ हे
हर एक राह यही पूंछती हे हम से सिराज
सफर की धुल मुकद्दर में आज भी क्यूँ हे ।
तो जनाब यह गजल जनाब अहमद सिराज फारुकी द्द्वादा कोटा जंक्शन में रहने वालों की हें इनके मोबाइल नम्बर ०९९२८५८५०५१ हे ।
अख्तर खाना अकेला कोटा राजस्थान

जस्टिस शिवकुमार केन्द्रीय विधि आयोग में सदस्य

कोटा के निवासित और राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व न्यायधीश विख्यात साहित्यकार लेखक शिवकुमार शर्मा को केंद्र सरकार ने कल एक आदेश जारी कर केन्द्रीय विधि आयोग का सदस्य नियुक्त किया हे जस्टिस शिवकुमार ने अपना कार्यभार भी ग्रहण कर लिया हे , कोटा में वकालत के बाद राजस्थान हाईकोर्ट में न्यायधीश के पद पर रहे जस्टिस शिवकुमार प्रख्यात साहित्यकार हें और उन्होंने उनके जज कार्यकाल में कई ऐतिहासिक फेसले दियें हें उनकी कानून पर पकड़ इसे व्यवहारिक रूप से लागू करने की क्षमता ने उन्हें कोटा से जयपुर और फिर दिल्ली पहुचा दिया हे कोटा के लोगों में उनकी नियुक्ति से खुशी की लहर दोड़ गयी हें , साहित्यकारों को भी इस मामले में जो ख़ुशी हुई हे उसे वोह साहित्यिक शब्दों में बयान नहीं कर पा रहे हें शिवकुमार दलित , गरीब शोषित उत्पीड़ितों को सस्ता सुलभ न्याय दिलवाने और मुफ्त विधिक सहायता गरीबों तथा आम आदमी तक पहुँचाने के अलावा नाबालिक बच्चों को उनका हक दिलाने के लियें स्न्घर्श्र्त रहे हें और निश्चित तोर पर इस वर्ग के लोगों के हक में बनने वाले कानूनों के मामले में जस्टिस शिवकुमार जी की विशेष रचनात्मक सिफारिशें होंगी। अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

02 August 2010

सुरत बदल गयी ....

कोटा फ्रेंड शिप हेल्प लाइन के साहित्यिक मित्र केशवपुरा कोटा निवासी मशुर साहित्यकार पुरुशात्तं यकीन की घजल पेश हे उनका मोबाइल नम्बर ०९४१४९३९५७४ हे। घजल पेश हे ।
जंजीर खुल के पावों की,गर्दन में डल गयी।
सचमुच ही कल से आज की, सुरत बदल गयी ।
सो की नहीं तो दोस्तों,दस की सही मगर।
आखिर कहीं तो देह में , हालत सम्भल गयी।
और क्या सबूत लीजिये, सच्चे स्वराज का
गांधी की शक्ल देश के सिक्कों में ढल गयी।
आधा तो क्या वोह देश को पूरा ही बेच दें
मुख्तार वोह हे फिर तेरी क्यूँ जान जल गयी।
होते हें कत्ल अब तो सरे-आम देश में
क्या कह दिया अरे रे जुबां फिर फिसल गयी ।
आज़ादियाँ नहीं हें तो फिर किया हे ये यकीन
हर सिम्त टूट मार की आंधी तो चल गयी ।
तो जनाब यह थे पुरुषोत्तम यकीन जो कोटा के मशहूर साहित्यकार हें । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

मिटा दो तो जानें

दोस्तों यह रचना कोटा में निवासित कवयित्री जो टिपता कोटा में निवास्त हें उनका मोबाइल नम्बर ०९६३६९२२६०४ हे यह हिंदी की विवान हें और इन्हें डोक्टर इला मोदी के नाम से जाना जाता हे इनकी रचना मिटा दो तो जाने आपके अवलोकनार्थ पेश हे .......
लिखा लिख का तुम मिटा दो तो जाने
हमें अपने दिल से भुला तो जानें ।
सभी के दिलों को सदा तुमने तोडा
अगर एक दिल भी मिला दो तो जाने ।
सदा कच्चे चिट्ठे उघाड़े सभी के ,
मुखोटा जो खुद का हटा दो तो जाने ।
बहुत आस हे तुमको मेरे वतन से
निराशा में आशा जगा दो तो जानें।
सजाते रहे हो सदा जिनकी मंडी
उन्हें मंडपों में बिठा दो तो जाने
डगर में सदा तुमने बोयें हें कांटें
कभी फूल पथ में बिछा दो तो जानें ।
कसक बन गयी याद लीला किसी की
किसी तोर उसको भुला दो तो जानें ।
दोस्तों भाइयों बहनों आपकों डोक्टर लीला जी की यह रचना केसी लगी बताएं । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

फ्रेंड्स हेल्प लाइन कोटा का द्रष्टिकोण

मेरे ब्लोगर भाइयों कोटा में जनाब नरेंद्र कुमार चक्रवर्ती ने फ्रेंड्स हेल्प लाइन के नाम पर कोटा से द्रष्टिकोण पत्रिका का प्रकाशन शुरू किया हे उसके प्रवेशांक में कोटा सहित देश के सभी प्रमुख शहरों के रचनाकारों की रचनाएँ प्रकाशित हें इन रचनाओं में से कुछ रचनाएँ ऐसी हें जिन्हें किसी भी हालत में आप तक पहुंचाना जरूरी हे बस इसी लियें इस पुस्तक में प्रकाशित कुछ रचनाएँ में आप तक मेरे ब्लॉग के माध्यम से पहुंचाउंगा शायद आपको पसंद आये शायद आप बोर हों में कह नहीं सकता लेकिन यह द्रष्टिकोण हे देखते हें इसे पढकर आपका द्रष्टिकोण किया कहता हे । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

फ्रेंड्स हेल्प लाइन कोटा का द्रष्टिकोण

मेरे ब्लोगर दोस्तों भाइयों आदाब कोटा में फ्रेंड्स हेल्प लाइन कोटा के नरेंद्र कुमार चक्रवर्ती जी ने द्रष्टिकोण के नाम से मित्र साहित्यकारों में

हेप्पी बर्थ डे टी रवि कान्त कोटा कलेक्टर जी

कोटा कलेक्टर टी रविकांत जी ३ अगस्त को आपका जन्म दिन हे बहुत बहुत मुबारक हो कोटा कलेक्टर टी रविकांत ने कोटा में कार्यभार ग्रहण के बाद जनहित में काफी कुछ काम किये हें एक कोटा कलेक्ट्रेट को आम आदमी की पहुंच से दूर करने का निर्णय अगर भूल जाएँ तो बाक़ी मामलों में कोटा कलेक्टर जनहित के कामों में अव्वल हे । सभी दफ्तरों में कर्मचारी उपस्थित रहें सजग सतर्क रहें सरकारी काम काज पर ध्यान दें इसी उद्देश्य से प्रति दिन कहीं ना कहीं किसी ना किसी विभाग में अचानक कर्मचारियों की उपस्थिति के निरिक्षण से निकम्मे और लेट लतीफ कर्मचारियों में हडकम्प मचा हे , कलेक्ट्रेट में धुम्रपान फेला कर गंदगी फेलाने वालों को रोकने के लियें कोटा कलेक्टर नें गांधीगिरी के माध्यम से पान जर्दा गुटका चबाने वालों को समझायश कर पीक दान में थूकने के लियें तय्यार किया कलेक्ट्रेट के कमरों में परिसर में घुसते ही आम दरवाज़े पर किस कमरे में कोनसा दफ्तर हे और कमरा नम्बर क्या हे उसका मानचित्र लगवाया हे ताकि लोगों को उससे मदद मिल सके , कोटा कलेक्टर ने अभियान चला कर अस्पताल,सार्वजनिक स्थान,स्कुल,कोलेज,अदालत,कलेक्ट्री इलाके में जर्दा पान गुटके की बिक्री पर पाबंदी लगवा दी और इसका सख्ती से पालन हो रहा हे , कोटा के समाचा पत्र निम् विरुद्ध सेक्सी दवाओं के विज्ञापन प्रकाशित करते रहे हें जिसका कानूनी अध्ययन कर कोटा कलेक्टर ने सख्ती से ऐसे विज्ञापन रोकने के लियें कोटा पुलिस अधीक्षक को निर्देश दियें इतना ही नहीं आर्म्स एक्ट के सम्बंद्ध में पुलिस की फर्जकारी रोकने के लियें भी कोटा कलेक्टर सख्त रहे, कोटा में शिक्ष्ण संस्थाओं पर इनका शिकंजा रहा जबकि पटवारियों और सम्बंधित रेवेन्यु अधिकारीयों ने जब प्रोपर्टी डीलरों से मिलकर उलटा सुलटा रेवेन्यु रिकोर्ड तय्यार किया तो इस पर कलेक्टर सख्त हो गये और उन्होंने जांच करवा कर पटवारियों और सम्बन्धित अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्यवाही कर इस बन्दरबांट को रुकवाने की फल की , उन्होंने कब्र्स्तानों और श्मशानों की समस्याए दूर करने की योजना भी तय्यार कर यु आई टी के माध्यम से बजट पारित करवाया हे जबकि जिन बस्तियों में जो लोग वषों से बसे थे और उन्हें उन बस्तियों जेसे द्वारका बस्ती , नेहरूनगर स्टेशन से बिना खूनखराबे के किसी भी सुरत में हटा पाना सम्भव नहीं था कोटा कलेक्टर ने उन लोगों को समझायश कर बिना लाठी बिना गोली और बिना तोड़फोड़ के उन्हें उनकी इच्छा से हटने के लियें तय्यार कर पुनर्वासित क्या इतना ही नहीं निराशा की जिंदगी जी रहे कोटा के लोग जब आत्महत्या के नतीजे तक पहुंच जाते हें और अधिकतम लोग आत्महत्या कर लेते हें उस पीड़ा का कोटा कलेक्टर ने अध्ययन किया और आज देखो कोटा में ऐसे पीड़ित लोगो के लियें मदद केंद्र स्थापित किया गया हे जहां लोगों को रोज़ फायदा मिल रहा हे तो जनाब यह तो कुछ भी नहीं मामूली सी बानगी हे कोटा कलेक्टर के जनहित के कारनामों की और बस उनकी इसी अदाकारी के चलते जीवन में पहली बार मेने जो हमेशा अधिकारीयों और नेताओं के खिलाफ कलम चलाने के लियें बदनाम रहा हूँ आज कोटा कलेक्टर टी रविकांत को उनके जन्म दिन पर नमन करता हूँ और कामना करता हूँ की इश्वर उनसे कोटा में आम जनहित के और ऐसे कई कार्य करवाए जिससे कोटा स्वर्ग सा लगने लगे इसके साथ ही मेरी यह भी दुआ हे के कोटा कलेक्टर टी रविकांत जिए हजारों साल और जहां जाए तरक्की करें इनका प्रताप हमेशां बना रहे बस एक बार फिर हेप्पी बर्थ डे टी रविकांत जी जन्म दिन मुबारक हो टी रविकांत जी । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

01 August 2010

चूहे की नेकर और हाथी


एक तालाब में
हाथी डूब पानी में
नहा रहा था
अचानक एक चूहा
गुस्से में
चिल्लाता हुआ आया
बोला , हाथी के बच्चे
नहाता क्या हे
बाहर निकल
हाथी चूहे के इस रवय्ये को देख
अचम्भित हुआ
वोह बोला क्या बात हे
चूहे ने फिर गुस्से में कहा
पहले बाहर आ फिर बताउंगा
हाथी बेचारा डूब पानी से बाहर आने लगा
कमर तक डूब पानी में आया
तो चूहे ने फिर कहा
और बाहर निकल
हाथी जब घुटनों तक पानी में बाहर आया
तो चूहा बोला चल चल जा कोई बात नहीं
चूहे की इस बात पर हाथी चिल्लाया
पूंछा , जब कोई बात नहं थी
तो फिर पानी से बहर क्यूँ निकाला
चूहा बोला
मेरी नेकर खो गयी हें
मेने सोचा कहीं तू मेरी नेकर
पहन कर तो नहीं नहा रहा
अब बाहर निकलने पर
भरोसा हो गया हे
तुने मेरी नेकर नहीं पहन रखी हे
इसलियें बस अब जा वापस नहा
मजे कर कोई बात नहीं
मेरा गुस्सा ठंडा हो गया हे ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

मुंशी प्रेम चंद

दोस्तों में जिस मुंशी जी की बात कर रहा हूँ वोह किसी दफ्तर में या वकील के यहाँ मुंशी का काम करने वाले नहीं थे वोह तो समाज का लेखा जोखा लिखने वाले जीवंत लेखक मुंशी थे , मुंशी प्रेमचन्द जिन्होंने साहित्य को नई विधा दी साहित्य में समाज की बुराइयों का विश्लेष्ण कर उसे समाज के सामने रखा और बुराइयों के खिलाफ एक ऐसा आन्दोलन छेड़ा जो एक समाजवाद का आन्दोलन कहलाया , समाज में छुपी बुराइयां जिनके खिलाफ किसी ने आवाज़ उठाने का साहस नहीं किया उस का चित्रं मुंशी प्रेमचन्द ने अपनी कहानियों में निर्भीकता से किया और इसी कारण उस डोर में अनेक जागीरदार लोग मुंशी प्रेमचन्द से घबरा गये थे , एक ऐसे जीवंत लेखक गरीबी की आवाज़ कुरीतियों में सुधार जिनकी धडकन थी आज चाहे हमारे बीच नहीं हो लेकिन उनकी लेखनी उनके विचार आज भी हमे चरों तरफ हें उन्होए बरसों पहले जो लिखा वोह आज भी समाज में कहीं ना कहीं प्रभावशाली तरीके से दिख रहा हे ऐसा लगता हे के प्रेमचन्द ने सब कुछ आज ही आज के हालातों की अक्कासी की हे , दोस्तों आज हम ऐसे जीवंत लेखक को जब तलाशने निकलते हें तो ना जाने क्यूँ कोसों लम्बा सफर करने के बाद भी ऐसी शख्सियत नहीं मिल पाती हे । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

कोमन वेल्थ में जग हंसाई

कोमन वेल्थ गेम की त्य्यारियों के मामले में मणि शंकर अय्यर केन्द्रीय मंत्री की दुआएं काम आ रही हें और खेल की त्य्यारियां अव्यवस्था,घोटाले और निरंकुशता की भेंट चढ़ रही हें , खेल की तय्यारी में ८० करोड़ रूपये खर्च कर जो स्टेडियम बनाया गया वोह हल्की बारिश में ही चुने लगा वहां पानी भर गया और लोगों का कहना हे के देश के ८० करोड़ रूपये पानी में भ गये , खेल के निर्माण की गुणवत्ता के प्रमाणपत्र जो लिए वोह फर्जी पाए गये इतना ही नहीं वहां फ़िज़ूल खर्ची की तो हद ही हो गयी इस मामले में जब दिल्ली की मुख्यमंत्री जी से सवाल किया तो वोह पत्रकारों पर बिफर पढ़ीं और प्रेस कोंफ्रेस बिना किसी सवाल का जवाब दिए छोड़ कर चली गयीं अब खेकी त्य्यारियों में ही जब करोड़ों के घोटाले हें तो आयोजन का घोटाला तो अरबों मन पहुंचेगा और फिर मणि शंकर अय्यर की बात श साबित होती दिख रही हे अभी तक इस मामले में ना तो किसी को निलम्बित किया गया हे और ना ही भ्रष्ट आचरण के लियें कार्यवाही कर उसे गिरफ्तार कर जेल भेज कर कोई अनूठा उदाहरन पेश किया गया हे । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

महिला पर पुलिस थप्पड़ की गूंज

कोटा के महावीर नगर थाने के सी आई रणविजय सिंह ने फरियाद लेकर गयी एक महिला शिमला मेहरा के गाल पर जमकर थप्पड़ जड दिया बस फिर किया था महिला भी सी आई के खिलाफ कार्यवाही की मांग को लेकर त्रिया हट पर अड़ गयी वोह चाहती थी के सी आई या तो माफ़ी मांगे या फिर वोह भी उस सी आई के थप्पड़ मारेगी महिला के समर्थन में अनेक महिलाएं आ खड़ी हुईं पहले तो पुलस के वरिष्ट अधिकारियों ने मामला दबाने की कोशिश की फिर जब पुलिस के खिलाफ विरोध बढने लगा तो महिला से सी आई के खिलाफ लिखित शिकायत ली गयी और जांच का नाटक किया जा रहा हे वेसे जिस ठाणे को सी आई के खिलाफ जांच हे उसे उस थाने से हटाए बगेर अगर जांच होती हे तो जांच प्रभावित होगी सब जानत हें । कोटा में इन दिनों लोगों पर हमल करने और झुंटा फंसाने के मामले बहुत बढ़ गये हें लें अभी फिलहाल ऐसे निरंकुश पुलिसकर्मियों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं होने से उनके होसले और बुलंद हो रहे हें देखते हें इस महिला पर पुलिस थप्पड़ की गूंज कहां तक जाती हे या फिर अबला की आवाज़ बन र दब कर रह जाती हे । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
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