आपका-अख्तर खान

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21 नवंबर 2010

जो बुझ गये .....

जो बुझ गये
चिराग
उन चिरागों को
में जलाऊं
केसे
मेरे इस
बिखरे हुए
चमन को
फिर से
सजाऊं केसे
जो
खुशनुमा
यादें थी मेरी
उन्हें
फिर से
बुलाऊं
केसे
आज फिर
रोता हे
याद में
उनकी
दिल मेरा
बताओ
खुद को
में
समझाऊं केसे ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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