आपका-अख्तर खान

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13 अक्तूबर 2010

हमारी संस्क्रती भूखों को खाना देने की रही हे

आप सभी जानते हें
भूख लगती हे
तो खाना प्रक्रति हे
भूख अगर ना लगे
फिर अगर कोई खाए
तो यह विक्रति हे
खुद भूखा रहे
और दुसरे भूखे को
अपना खाना खिला दे
तो यह हमारी संस्क्रती हे
विक्रति में जीना
राक्षसी स्वभाव हे
प्रक्रति में जीना
सज्जन स्वभाव हे
संस्क्रती में तुम अगर जिए
तो मानव स्वभाव हे
हमरे देश की संस्क्रती
खिलाकर खाने की हे
जो खिलाकर खाता हे
आप जानते हें
वोह हमेशा खिलखिलाता हे
तो दोस्तों
थोड़ा खुद को बदलो
हर रोज़ खिलाकर खाओ
और हर रोज़ खिलखिलाओ ।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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