आपका-अख्तर खान

हमें चाहने वाले मित्र

02 सितंबर 2010

बेरहम नक्सली और संवेदन हीन सरकार

दश में बेरहम नक्सली और संवेदन हीन सरकार के होने से रोज़ पुलिस जनों की हत्याएं हो रही हें सरकार में बेठे मंत्री रोज़ नक्सलियों की पीठ थपथपा रहे हें इधर मुठभेड़ में पुलिस जवान बे म़ोत मारे जा रहे हें लेकिन इन सब के बावजूद भी पटना बिहार में अपह्रत चार पुलिस कर्मियों को जिंदा छुड़ाने के मामले में केंद्र और बिहार सरकार गम्भीर नहीं रही हे, आखिर कहां गया हमारा सुचना तन्त्र, कहाँ गये हमारे कमांडो, कहाँ गये प्रशिक्षित जासूस, कहा हें जांबाज़ सिपाही फोज जो कुछ गिनती के सिरफिरे नक्सलियों को काबू नहीं कर पा रहे हें काबू करना तो दूर की बात आज तक वोह अपह्रत जवानों को पता नहीं लगा पाए हें एक की हत्या कर दी गयी हे तीन जवानों की जिंदगी आज सुबह दस बजे पर टिकी हे , बिहार के मुख्य मंत्री बयान देते हें के बातचीत का रास्ता खुला हे नक्सलियों ने मुठभेड़ में जवान मारे थे इन्हें भी मार देते अपहरण क्यूँ किया यानी बिहार के मुख्य मंत्री को जवानों की चिंता नहीं अफ़सोस इस बात का हे के नक्सलियों ने जवानों का जिंदा अपहरण क्यूँ किया मुठभेड़ में मारा क्यूँ नहीं ।
केंद्र हो चाहे मध्य प्रदेश,आंध्र,बिहार,पश्चिमी बंगाल की सरकारे हों किसी ने भी ना तो नक्सली लोगों की समस्याओं ,उनकी मांगों,उनके आतंकवादी होने के पीछे उपजी परिस्थितियों का अध्ययन नहीं किया हे आखिर किया वजह हे के गाँव के गाँव नक्सली बन गये आतंकवादी बन गये उनका सरकार और कानून से विश्वास उठ गया उन्होंने हिंसा का रास्ता अपना लिया मरते वोह भी हे म़ोत का डॉ उन्हें भी सता रहा हे तो फिर आखिर बार बार वार्ता का नाटक करने वाली यह सरकारें खुद नक्सली समस्या कारण और निवारण पर समीक्षा आयोग गठित कर उनकी वाजिब मांगों को मान कर उनके कल्याण,सुरक्षा और भविष्य के लियें एक पैकेज जारी नहीं करती लेकिन बात साफ़ हे राज्य सरकारें और केंद्र सरकार उनकी समस्याओं और समाधान मामले में गम्भीर नहीं हे नेताओं को तो उम्स्ययें किया हें , क्यूँ उन्होंने ब्न्दुकं उठायी वोह सरकार से क्या चाहते हें उनकी नाराज़गी की वजह किया हे इस बारे में भी जानकारी नहीं हे क्योंकि सरकार खुद ऐसा नहीं चाहती सिर्फ हिंसा और बातचीत के नाम पर राजनीति करना चाहती हे अगर नहीं संभाल पा रही हे सरकार तो छोड़े गद्दी और सम्भला दे हम ब्लोगर्स को फिर हम खुद समस्याओं का समाधान मिल बेठ कर कर लेंगे सरकारों को तो खुद के मंत्रियों की सुरक्षा की फ़िक्र हे उन्हें जनता की समस्या और सुरक्षा से कोई लेना देना नहीं हे । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

दोस्तों, कुछ गिले-शिकवे और कुछ सुझाव भी देते जाओ. जनाब! मेरा यह ब्लॉग आप सभी भाईयों का अपना ब्लॉग है. इसमें आपका स्वागत है. इसकी गलतियों (दोषों व कमियों) को सुधारने के लिए मेहरबानी करके मुझे सुझाव दें. मैं आपका आभारी रहूँगा. अख्तर खान "अकेला" कोटा(राजस्थान)

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...